हिमाचल प्रदेश
4 घंटे पहले
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हिमाचल में मौसम का बदला मिजाज, पालमपुर और आसपास के क्षेत्रों में बरसे बादल
हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम ने करवट बदल ली है। राज्य में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के साथ ही विभिन्न हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल गया है। प्रदेश के कई इलाकों जैसे पालमपुर, जोगिंद्रनगर और सराहन में बारिश की गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। इसके अलावा, बीते कल की रात को मंडी जिले के कुछ चुनिंदा हिस्सों में भी हल्की बूंदाबांदी देखने को मिली थी। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण मंगलवार की देर शाम से राज्य के अधिकांश हिस्सों में वर्षा का दौर तेज होने की पूरी संभावना है।
मौसम विभाग ने आने वाले चार दिनों के लिए पहाड़ी राज्य के कई हिस्सों में भारी वर्षा और आकाशीय बिजली चमकने को लेकर एक विशेष येलो अलर्ट भी जारी किया है। इस दौरान मैदानी इलाकों के साथ-साथ मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम काफी खराब रह सकता है। इसके विपरीत, राज्य के बेहद ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी होने का भी अनुमान लगाया गया है, जिससे आने वाले दिनों में ठंड का प्रकोप और अधिक बढ़ सकता है।
9 अक्टूबर तक जारी रहेगा बारिश का दौर, मौसम विभाग ने दी चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के प्रमुख वैज्ञानिक संदीप कुमार शर्मा द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, मंगलवार की देर शाम से राज्य के वायुमंडल में बदलाव महसूस किया जाने लगेगा। इसके साथ ही रात होते-होते बारिश की तीव्रता और उसका दायरा दोनों बढ़ जाएंगे। राज्य के मैदानी और मध्य पर्वतीय जिलों में 9 अक्टूबर तक मौसम इसी तरह खराब रहने का अनुमान है। इस समयावधि के दौरान दोपहर के बाद अथवा देर शाम को कुछ विशेष स्थानों पर गरज-चमक के साथ आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने की प्रबल आशंका व्यक्त की गई है।
विभाग के अनुसार, मुख्य रूप से निम्नलिखित जिलों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की जा सकती है:
- ऊना
- बिलासपुर
- हमीरपुर
- कांगड़ा
- मंडी
- शिमला
- सोलन
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 10 अक्टूबर से राज्य में बारिश की इन गतिविधियों में काफी हद तक कमी दर्ज की जाएगी और इसके बाद लोगों को मौसम से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना
सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ का सबसे अधिक प्रभाव प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, कांगड़ा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिले के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी या हिमपात होने की संभावना बनी हुई है। पहाड़ों पर होने वाली इस ताजा बर्फबारी के कारण इन क्षेत्रों के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे वहां रहने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ सकता है।
वर्तमान में सामान्य से अधिक चल रहा है तापमान
अगर हम पिछले 24 घंटों की बात करें, तो हिमाचल प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में दिन का तापमान सामान्य स्तर से करीब 2 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। राजधानी शिमला में अधिकतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि सामान्य तापमान से लगभग 3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है।
इसके अलावा, केलांग में अधिकतम तापमान 24.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से तकरीबन 9 डिग्री सेल्सियस अधिक पाया गया। वहीं, कल्पा में भी दिन का पारा 25.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से लगभग 5 डिग्री सेल्सियस अधिक है। मैदानी इलाकों की बात करें तो बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी और ऊना जैसे जिलों में दिन का तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के दायरे में बना हुआ है। पूरे प्रदेश में सबसे अधिक गर्म इलाका ऊना रहा, जहां अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
साल 2026 में मॉनसून की देरी से विदाई का लेखा-जोखा
मौसम वैज्ञानिक संदीप कुमार शर्मा के अनुसार, वर्ष 2026 में हिमाचल प्रदेश में मॉनसून का आगमन सामान्य तारीख से थोड़ा विलंब से हुआ था। प्रदेश में मॉनसून ने करीब 30 जून को प्रवेश किया था और 1 जुलाई तक इसने पूरे राज्य को अपने दायरे में ले लिया था। आमतौर पर तय तिथि से यह करीब छह दिन की देरी से हिमाचल पहुंचा था। इसी प्रकार, मॉनसून की वापसी या विदाई में भी इस वर्ष देरी देखने को मिली है।
आम दिनों में हिमाचल प्रदेश से मॉनसून की विदाई 25 सितंबर के आसपास हो जाती है, परंतु इस वर्ष मॉनसून ने 3 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर विदाई ली। इस लिहाज से देखा जाए तो विदाई की प्रक्रिया में भी लगभग एक सप्ताह से अधिक का विलंब हुआ है।
मॉनसून के इस सीजन में 11 फीसदी कम बरसे बादल
इस वर्ष के पूरे मॉनसून सत्र के दौरान हिमाचल प्रदेश में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से करीब 11 फीसदी कम दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग के तय मानकों और मानदंडों के हिसाब से इस आंकड़े को अभी भी सामान्य वर्षा की श्रेणी में ही रखा जा रहा है। अलग-अलग जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सीजन में वर्षा का स्तर इस प्रकार रहा:
- लाहौल-स्पीति: यहां सामान्य से लगभग 65 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, जो सबसे कम है।
- हमीरपुर: इस जिले में सामान्य की तुलना में करीब 34 फीसदी कम वर्षा दर्ज हुई।
- सोलन और मंडी: इन दोनों जिलों में सामान्य वर्षा के मुकाबले करीब 14 से 16 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।
- किन्नौर: इस सीमावर्ती जिले में सामान्य से करीब 18 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई।
- शिमला: राजधानी शिमला और उसके आसपास के क्षेत्रों में सामान्य से लगभग 14 फीसदी अधिक मेघ बरसे।
आने वाले महीनों (अक्टूबर से दिसंबर) के लिए मौसम का पूर्वानुमान
आने वाले महीनों के लिए मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार, अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक के पोस्ट-मॉनसून काल में कुल मिलाकर वर्षा सामान्य या उससे अधिक रहने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, अगर हम केवल चालू महीने यानी अक्टूबर की बात करें, तो इस दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश सामान्य स्तर से थोड़ी कम दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही, अक्टूबर के दौरान दिन का तापमान भी सामान्य स्तर से थोड़ा अधिक रहने की संभावना जताई गई है, जिससे दिन में हल्की गर्मी का अहसास बना रहेगा।
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