हिमाचल प्रदेश
2 घंटे पहले
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शिमला पुलिस में बड़ी कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इन दिनों पुलिस महकमे में हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। शिमला के पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कुल तीन पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। इन पुलिस कर्मियों पर सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया गया है। निलंबन की इस कार्रवाई के बाद से पूरे विभाग में हड़कंप की स्थिति है।
नियमों की अनदेखी पड़ी भारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन तीन पुलिस कर्मचारियों में एक सब-इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबल शामिल हैं। विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। जिन पर कार्रवाई हुई है, उनमें सब-इंस्पेक्टर चिंतामणी, और कांस्टेबल राजेश व अनूप का नाम शामिल है। इन अधिकारियों पर अलग-अलग अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट और शराब पीकर ड्यूटी
निलंबित किए गए सब-इंस्पेक्टर पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से एक राजनीतिक पोस्ट साझा की थी, जो कि सरकारी सेवा नियमों के खिलाफ है। वहीं, दोनों कांस्टेबलों पर आरोप है कि वे ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पाए गए थे। बताया जा रहा है कि इन कांस्टेबलों की मुख्य जिम्मेदारी कैदियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने या उन्हें अदालत में पेश करने की थी। इस दौरान कई बार उनकी शिकायतें मिली थीं कि वे नशे की हालत में ड्यूटी कर रहे हैं। निलंबन की अवधि के दौरान, इन दोनों कांस्टेबलों को पुलिस लाइन शिमला में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाल के दिनों में पुलिस पर अन्य कार्रवाइयां
शिमला पुलिस पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में रही है। इससे पहले भी विभाग के भीतर कई स्तरों पर कार्रवाई देखी गई है। 29 जुलाई को ट्रैफिक, टूरिस्ट एंड रेलवे विभाग में तैनात सहायक उप-निरीक्षक पुनीत को निलंबित किया गया था। उन पर एक कांस्टेबल को प्रताड़ित करने और उससे अपने निजी काम करवाने का आरोप सिद्ध हुआ था, जिसके बाद पुलिस महानिदेशक ने स्वयं यह कार्रवाई की थी।
इसके अलावा, कोटखाई में हुए बहुचर्चित गुड़िया मर्डर केस और सूरज कस्टोडियल डेथ मामले में गवाह रहे कांस्टेबल दिनेश पर भी गाज गिरी थी। दिनेश को भी हाल ही में सस्पेंड कर दिया गया था। उन पर कई तरह के आरोप लगे थे, और उन्होंने अपने तबादले की गुहार लगाने के लिए सीधे राज्यपाल से मुलाकात की थी, जो कि विभागीय अनुशासन के दायरे से बाहर माना गया। इन सभी घटनाओं के बाद हिमाचल पुलिस प्रशासन अब सख्त निगरानी और अनुशासनात्मक सुधारों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।
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