राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
संसद के विस्तार पर शशि थरूर का सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के उस विचार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके तहत संसद में सांसदों की संख्या 850 करने की बात हो रही है। थरूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का होना एक मजाक जैसा है, क्योंकि अभी 543 सांसदों के साथ ही संसद का कामकाज चलाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
- अमेरिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां की आबादी बढ़ने के बावजूद हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में सीटों की संख्या 435 पर ही सीमित है।
- थरूर ने तर्क दिया कि अगर सांसदों की संख्या 850 हो गई, तो कई सदस्यों को जीरो आवर में अपनी बात रखने या बहस में भाग लेने का मौका ही नहीं मिल पाएगा।
- उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को भी राज्यों के प्रतिनिधित्व के लिए यूरोपियन यूनियन जैसे मॉडल पर विचार करना चाहिए, ताकि उत्तर प्रदेश और सिक्किम जैसे राज्यों के बीच संतुलन बना रहे।
TMC में बगावत और राजनीति
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों के एनडीए में शामिल होने पर शशि थरूर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे सिद्धांतों से रहित राजनीति का दुखद उदाहरण करार दिया। थरूर के अनुसार, जो सांसद पिछले 12 सालों से एनडीए का पुरजोर विरोध करते रहे, उनका अचानक पाला बदल लेना पूरी तरह से लालच, दबाव और सत्ता की ताकत का खेल है।
राम मंदिर और आस्था पर चोट
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर भी शशि थरूर ने हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि मंदिर आस्था का केंद्र होते हैं और लोग वहां पवित्र भावना से दान करते हैं। करोड़ों रुपये के गबन की खबरों को उन्होंने श्रद्धालुओं के भरोसे और आस्था के साथ बड़ा धोखा बताया है।
US-Iran शांति समझौते पर नजरिया
अमेरिका-ईरान संबंधों पर चर्चा करते हुए थरूर ने कहा कि कोई भी शांति समझौता तभी टिक सकता है जब दोनों पक्षों को अपनी जीत का अहसास हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध के दौरान नष्ट हुई तेल और गैस सुविधाओं को बहाल करने में समय लगेगा और स्थिति सामान्य होने में अभी डेढ़ साल तक का वक्त लग सकता है।
PM मोदी के नेतृत्व पर टिप्पणी
पीएम मोदी की कार्यशैली पर बात करते हुए उन्होंने उन्हें एक प्रभावशाली और जबरदस्त वक्ता माना, लेकिन साथ ही देश में बढ़ती सांप्रदायिक फूट और स्वतंत्र संस्थाओं के कमजोर होने पर गहरी चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सत्ता के इस दौर में आबादी का एक बड़ा वर्ग खुद को अलग-थलग महसूस करने लगा है।
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