विश्व
2 घंटे पहले
3
विचारों
रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बरता
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों ने जानलेवा गोलीबारी कर दी। रावलकोट में हुई इस हिंसा में कम से कम 19 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। इस फायरिंग में दो दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा जारी किए गए एक वीडियो संदेश में इस घटना की भयावहता सामने आई है। कमेटी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का काफिला चिनार चौक से गुजरते हुए मकबूल भट शहीद चौक की ओर बढ़ रहा था, तभी उन पर हमला किया गया।
शहीदों में आंदोलन के संस्थापक के भाई भी शामिल
JAAC ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने निहत्थे और निर्दोष युवाओं को निशाना बनाया है। इस दुखद घटना में मारे गए 19 लोगों में आंदोलन के संस्थापक उमर नजीर कश्मीरी के छोटे भाई उस्मान नजीर भी शामिल हैं। कमेटी ने जानकारी दी है कि मृतकों में खैगाला, कोटली शहर, टट्टापानी, बंजा-बासपुर, छोटा गाला और हवेली क्षेत्र के लोग शामिल हैं। इसके अलावा दो बलूच नागरिक भी इस फायरिंग में मारे गए हैं। कमेटी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार लगाई है। विदेश में रह रहे कश्मीरियों से अपील की गई है कि वे पाकिस्तानी दूतावासों और संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे वैश्विक मंचों के बाहर विरोध प्रदर्शन करें ताकि इस अत्याचार और नरसंहार को दुनिया के सामने लाया जा सके।
मृतकों की सूची
रावलकोट लॉन्ग मार्च के दौरान मारे गए 19 लोगों के नाम निम्नलिखित हैं:
- नईम बट (कोटली)
- उस्मान नज़ीर (रावलकोट)
- निसार अहमद (बलूच)
- काशिफ़ याक़ूब (रावलकोट)
- सरदार फ़िदा हुसैन (त्रारखाल)
- मुज़म्मिल (अली सोजल)
- बासित शाह (हजीरा)
- फहीम अफजल (छोटा गल्ला, रावलकोट)
- कामरान मुश्ताक पनाखा (हजीरा)
- जरघम खलील (दारेक, रावलकोट)
- साकिब हनीफ़ (रीरह बान, रावलकोट)
- साकिब इशाक (नंब गवारा, पल्लंद्री)
- अरील असगर (तत्ता पानी)
- उस्मान गुल (दरेक ढोक, रावलकोट)
- जफीर पहलवान (त्रार खेल)
- निसार शाहीन (पाखो नरबाई)
- अली हुसैन (खारी शरीफ, मीरपुर)
- ख्वाजा अबरार लतीफ डार (खुर्शीदाबाद, हवेली)
- कामरान हाफ़िज़ (कहुटा)
भारत ने जताया कड़ा विरोध
इस पूरे मामले पर भारत ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है। भारत का स्पष्ट मानना है कि PoK में हो रहे ये विरोध प्रदर्शन वहां दशकों से जारी प्रशासनिक दमन और व्यवस्थित शोषण का परिणाम हैं। इस्लामाबाद द्वारा जबरदस्ती कब्जे वाले क्षेत्रों में जिस तरह से पुलिस और सेना ने बर्बरता की है, उसकी कड़ी आलोचना की गई है। भारत ने इसे स्थानीय लोगों पर पाकिस्तान के अवैध शासन का सीधा नतीजा बताया है।
Comments
0 comment