पश्चिम बंगाल
4 घंटे पहले
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पश्चिम बंगाल सरकार ने देश की सीमाओं की रक्षा में समर्पित जवानों के सम्मान में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि वर्ष 2027 से 'सीमा मित्र' पुरस्कार की शुरुआत की जाएगी। यह सम्मान सीमा सुरक्षा बल (BSF), सशस्त्र सीमा बल (SSB) और पश्चिम बंगाल पुलिस के उन निष्ठावान जवानों तथा अधिकारियों को प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और सतर्कता बनाए रखने में अद्वितीय योगदान दिया है।
योग्य कर्मियों के चयन के लिए बनेगी समिति
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 'सीमा मित्र' सम्मान के लिए सबसे उपयुक्त और योग्य दावेदारों का पारदर्शी तरीके से चयन करने के उद्देश्य से एक विशेष समिति गठित की जाएगी। यह समिति सुरक्षाबलों के कर्मियों के उत्कृष्ट कार्यों का मूल्यांकन करेगी और पुरस्कार के लिए पात्र नामों की सिफारिश करेगी।
गौरतलब है कि भारतीय सीमाओं की सुरक्षा में विभिन्न केंद्रीय और राज्य बलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है:
- बीएसएफ (BSF): भारत और बांग्लादेश की सीमा की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी निभाता है।
- एसएसबी (SSB): नेपाल और भूटान से सटी भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर मुस्तैदी से तैनात रहता है।
- पश्चिम बंगाल पुलिस: सीमावर्ती इलाकों में आंतरिक कानून-व्यवस्था और सुरक्षा तालमेल बनाए रखने में सहयोग करती है।
हिंगलगंज सीमा चौकी पहुंचे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
यह महत्वपूर्ण घोषणा रविवार को उस समय की गई जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी उत्तर 24 परगना जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे हिंगलगंज क्षेत्र की सीमा चौकी पर पहुंचे थे। वे दिवाली और काली पूजा के पावन अवसर पर सीमा पर तैनात जवानों का उत्साहवर्धन करने और उन्हें त्योहार की शुभकामनाएं देने के लिए स्वयं वहां पहुंचे थे।
जवानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अगले साल से 'सीमा मित्र' पुरस्कार देने के संकल्प को दोहराया और सुरक्षाबलों के समर्पण की दिल खोलकर सराहना की।
पूर्ववर्ती सरकार के रवैये पर मुख्यमंत्री ने मांगी माफी
हिंगलगंज में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछली ममता बनर्जी सरकार द्वारा बीएसएफ और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों के साथ अनुचित और अपमानजनक व्यवहार किया गया था।
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए कहा, "पिछली सरकार द्वारा बीएसएफ और सीआरपीएफ के जवानों के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों और उनके साथ किए गए व्यवहार के लिए मैं राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में आपसे माफी मांगता हूं।"
600 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाने और भूमि आवंटन का मुद्दा
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सीमा सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मुद्दे का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के दौरान भारत-बांग्लादेश सीमा के पश्चिम बंगाल से होकर गुजरने वाले लगभग 600 किलोमीटर लंबे हिस्से में सुरक्षा बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद इस दिशा में तेजी से कदम उठाए गए। खुली सीमा पर बाड़ लगाने के कार्य को पूरा करने के लिए बीएसएफ को आवश्यक जमीन तुरंत हस्तांतरित और उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित की गई। मुख्यमंत्री के इस कदम और 'सीमा मित्र' पुरस्कार की घोषणा को सीमा पर तैनात केंद्रीय सुरक्षाबलों और राज्य पुलिस के योगदान को राज्य स्तर पर आधिकारिक सम्मान देने की एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
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