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2 घंटे पहले
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शेयर बाजार के अनुपालन ढांचे में बड़ा बदलाव
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने शेयर बाजार के नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के लिए सेटलमेंट प्रक्रिया में व्यापक बदलाव लागू किए हैं। इन नई व्यवस्थाओं का उद्देश्य बाजार में अनुशासन बनाए रखना और छोटी कानूनी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को कम करना है। विशेष रूप से 10 लाख रुपये तक की सेटलमेंट राशि वाले मामलों को अब बेहद तेजी से निपटाने की तैयारी है। इस बदलाव का मुख्य लक्ष्य पूरी प्रक्रिया को सरल और पहले से अधिक अनुमानित बनाना है, ताकि बाजार में छोटे-मोटे उल्लंघन के मामलों में अनावश्यक रूप से वर्षों तक देरी न हो। हालांकि, नियामक ने स्पष्ट किया है कि इसका अर्थ नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज करना बिल्कुल नहीं है। सेटलमेंट के बावजूद संबंधित इकाई पर नियामकीय शर्तें लागू रहेंगी और गलत तरीके से अर्जित किए गए लाभ की पूरी वसूली भी की जाएगी।
सेटलमेंट राशि तय करने का नया फॉर्मूला
6 अक्टूबर को जारी SEBI की अधिसूचना के अनुसार, अब सेटलमेंट की रकम तय करने के लिए एक नई आधार राशि निर्धारित की गई है। यह राशि प्रतिभूति कानूनों के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम जुर्माने से सीधे तौर पर जुड़ी होगी। राशि को अंतिम रूप देते समय कई कारकों का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसमें मामले की वर्तमान स्थिति, पूर्व में हुई नियामकीय कार्रवाई, उल्लंघन की प्रकृति, गंभीरता और कानूनी खर्चों का विवरण शामिल है। इस नई व्यवस्था से अलग-अलग मामलों में सेटलमेंट राशि की गणना में स्पष्टता आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
निवेशकों के नुकसान और अनुचित लाभ की गणना
नए नियमों के तहत एक महत्वपूर्ण बदलाव यह किया गया है कि किसी भी प्रकार की गलत कमाई, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए प्रत्यक्ष नुकसान को अब आधार सेटलमेंट राशि का हिस्सा नहीं माना जाएगा। यदि इन आंकड़ों की सटीक गणना संभव है, तो नियामक उनकी वसूली अलग से सुनिश्चित करेगा। पूर्व की प्रक्रिया में यह रकम सेटलमेंट गणना में शामिल होती थी, जिससे दोहरी गणना का डर बना रहता था। अब सेटलमेंट राशि, अवैध लाभ की वापसी और सुधारात्मक शर्तों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। इसके अलावा, जो पहले गैर-मौद्रिक शर्तें कहलाती थीं, उन्हें अब रेमेडियल एंड रेगुलेटरी टर्म्स (RRT) के रूप में परिभाषित किया गया है।
फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट के नए प्रावधान
SEBI ने सेटलमेंट को त्वरित करने के लिए दो मुख्य रास्ते खोले हैं। पहली व्यवस्था रकम की सीमा पर केंद्रित है, जिसके तहत 10 लाख रुपये तक के मामले आंतरिक समिति से सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास भेजे जाएंगे। दूसरी व्यवस्था उल्लंघन के प्रकार पर आधारित है, जिसमें SEBI स्वयं संबंधित इकाई को नोटिस भेजेगा और एक निर्धारित राशि जमा कर मामले को बंद करने का विकल्प देगा। इस भुगतान के बाद सदस्यों का पैनल औपचारिक सेटलमेंट आदेश पारित करेगा।
वित्तीय गड़बड़ियों पर भी लागू होगा नया ढांचा
नियमों के दायरे में वे मामले भी शामिल किए गए हैं जिनमें वित्तीय विवरणों में हेरफेर या फंड के दुरुपयोग की शिकायतें हैं। इन मामलों को भी सेटलमेंट के जरिए निपटाया जा सकेगा, लेकिन इसके लिए संबंधित इकाई को कड़े सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। इसमें उचित वित्तीय खुलासे करना और गलत तरीके से निकाले गए फंड को वापस करना अनिवार्य होगा।
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