बिहार भूमि सर्वे के बीच बड़ा खुलासा: समस्तीपुर के 140 से अधिक गांवों के 100 साल पुराने खतियान गायब बिहार 2 घंटे पहले 2
बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वे के बीच समस्तीपुर जिले में 17 अंचलों के 140 से ज्यादा गांवों के 100 साल पुराने कैडस्ट्रल सर्वे (सीएस) खतियान सरकारी रिकॉर्ड से गायब हो गए हैं, जिससे हड़कंप मच गया है।

भूमि सर्वे के बीच खड़ा हुआ बड़ा संकट, पुराने रिकॉर्ड रूम से दस्तावेज गायब

बिहार सरकार पूरे राज्य में विशेष भूमि सर्वे का काम जोर-शोर से चला रही है। इस महाअभियान का मुख्य उद्देश्य जमीन के मालिकाना हक को पूरी तरह स्पष्ट करना और भूमि विवादों को हमेशा के लिए समाप्त करना है। लेकिन इसी बीच समस्तीपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिले के 17 अंचलों के अंतर्गत आने वाले 140 से अधिक राजस्व गांवों के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज, यानी 100 साल पुराने कैडस्ट्रल सर्वे (सीएस) खतियान सरकारी अभिलेखागार से गायब पाए गए हैं।

ये लापता दस्तावेज करीब 100 वर्ष से भी ज्यादा पुराने हैं। अधिकारियों के अनुसार, इनका संबंध साल 1901 के आसपास हुए राज्य के पहले बड़े भूमि सर्वे से है। सरकारी कार्यालयों में इन बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेजों के न मिलने से पूरा प्रशासनिक अमला हैरान है। कुछ जगहों पर जो रिकॉर्ड बचे भी हैं, उनकी स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि उन्हें खोलना या पढ़ना लगभग नामुमकिन हो गया है।

दाखिल-खारिज और मापी जैसे जरूरी कामों पर लगा ब्रेक

विशेष भूमि सर्वे के वर्तमान दौर में पुराने सीएस खतियान की मांग और जरूरत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इनके गायब होने से आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी रिकॉर्ड में ये कागजात उपलब्ध न होने के कारण ग्रामीण इलाकों में कई जरूरी काम अटक गए हैं:

  • दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में आ रही बाधा: जमीन की नई रजिस्ट्री के बाद नाम चढ़ाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।
  • जमीन की मापी और सीमांकन ठप: अमीन के पास पुराने नक्शे और खतियान न होने से वे जमीन की सही पैमाइश नहीं कर पा रहे हैं।
  • वंशावली का सत्यापन अटका: पुश्तैनी संपत्तियों के बंटवारे के समय वंशावली मिलान करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
  • भूमि विवादों में बढ़ोतरी: साक्ष्यों के अभाव में गांवों में जमीन से जुड़े विवाद और ज्यादा उग्र रूप ले रहे हैं।

बिहार सरकार ने जनता से की खास अपील: आपके पास है खतियान तो करें मदद

इस अप्रत्याशित समस्या को देखते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक नया रास्ता निकाला है। विभाग ने आम जनता, किसानों और रैयतों से सीधे तौर पर मदद मांगी है। प्रशासन ने अपील की है कि जिन ग्रामीणों या भूस्वामियों के पास अपने पुश्तैनी गांव का मूल सीएस खतियान सुरक्षित बचा हुआ है, वे उसे तुरंत अपने स्थानीय अंचल कार्यालय या जिला अभिलेखागार में लेकर आएं।

विभाग ने जनता को भरोसा दिलाया है कि उन्हें अपने मूल दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकारी दफ्तरों में इन दस्तावेजों की केवल उच्च गुणवत्ता वाली स्कैनिंग की जाएगी। जैसे ही उनकी डिजिटल कॉपी तैयार हो जाएगी, मूल दस्तावेज पूरी सुरक्षा के साथ मालिक को तुरंत वापस सौंप दिए जाएंगे। इस पहल से गायब हो चुके ऐतिहासिक रिकॉर्ड को दोबारा जीवित किया जा सकेगा।

इन 17 अंचलों के गांवों के रिकॉर्ड हुए हैं गायब

राजस्व विभाग ने समस्तीपुर जिले के जिन अंचलों की सूची जारी की है, जहां के गांवों के पुराने खतियान गायब मिले हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • कल्याणपुर और मोहनपुर अंचल
  • मोहीउद्दीननगर और शिवाजीनगर अंचल
  • हसनपुर और सिंघिया अंचल
  • वारिसनगर और रोसड़ा अंचल
  • सरायरंजन और उजियारपुर अंचल
  • पटोरी और मोरवा अंचल
  • खानपुर और बिथान अंचल
  • दलसिंहसराय, विभूतिपुर और विद्यापतिनगर अंचल

इन सभी 17 अंचलों के अंतर्गत आने वाले 140 से अधिक राजस्व गांवों के भूस्वामी इस समय अपने जमीन के सबसे पुराने साक्ष्यों को ढूंढने के लिए परेशान हो रहे हैं।

डिजिटलीकरण से हमेशा के लिए सुरक्षित रहेगा जमीन का ब्योरा

राजस्व विभाग का असली मकसद इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित करना और इनका एक स्थायी डिजिटल डेटाबेस बनाना है। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद, जमीन मालिकों को भविष्य में कई बड़े फायदे मिलेंगे। भूस्वामी अपने गांव का पूरा खतियान इंटरनेट के जरिए सीधे ऑनलाइन देख सकेंगे। किसी भी काम के लिए उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी और वे घर बैठे ही इसे डाउनलोड कर सकेंगे। इससे बिचौलियों का प्रभाव खत्म होगा और पूरे तंत्र में पारदर्शिता आएगी।

भूमि विशेषज्ञों का भी मानना है कि वर्ष 1901 के आसपास के पुराने खतियान किसी भी जमीन के असली और सबसे मजबूत कानूनी सबूत होते हैं। अगर किसी परिवार के पास यह दस्तावेज आज भी सुरक्षित है, तो उसे देशहित और खुद के हित में प्रशासन की इस मुहिम का हिस्सा बनकर इसे डिजिटल रूप में दर्ज कराना चाहिए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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