सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की 70 साल पुरानी मस्जिद हटाने का आदेश, 6 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 65
सहारनपुर की नगर मजिस्ट्रेट अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित 70 साल पुरानी मस्जिद को अवैध निर्माण घोषित करते हुए इसे खाली करने का आदेश दिया है। अदालत ने अवैध कब्जे के लिए 6.41 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया है।

सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को हटाने का निर्देश

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में पिछले करीब 70 वर्षों से बनी मस्जिद को लेकर नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम के अंतर्गत चल रहे इस कानूनी विवाद में, दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने के बाद अदालत ने मस्जिद के निर्माण को सरकारी भूमि पर किया गया अवैध अतिक्रमण करार दिया है। न्यायालय ने मस्जिद को परिसर से हटाने के आदेश जारी करने के साथ ही, अवैध रूप से कब्जा करने वालों पर 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने प्रशासन को इस जुर्माने की राशि को नियमानुसार वसूलने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

कमरों को किराये पर उठाकर की जा रही थी कमाई

इस पूरे मामले की शुरुआत बजरंग दल के प्रांत संयोजक रहे विकास त्यागी की एक शिकायत के बाद हुई थी। शिकायत में यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि जिलाधिकारी कार्यालय जैसा संवेदनशील इलाका, जो कलेक्ट्रेट परिसर के अधीन आता है, वहां बनी मस्जिद का इस्तेमाल केवल इबादत या धार्मिक कार्यों के लिए ही नहीं हो रहा है। शिकायत के अनुसार, परिसर के अंदर एक डाकघर चलाया जा रहा था और कई कमरों को किराये पर देकर वहां से नियमित रूप से आर्थिक लाभ कमाया जा रहा था।

अदालत ने माना सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा

नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत में चली इस सुनवाई के दौरान खसरा संख्या-539 के दस्तावेजों का विश्लेषण किया गया। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, यह भूमि कचहरी या कलेक्ट्रेट के नाम पर दर्ज है। न्यायालय ने पाया कि इस सरकारी जमीन के करीब 315 वर्ग मीटर के हिस्से पर मस्जिद का निर्माण किया गया है। तमाम साक्ष्यों और सरकारी अभिलेखों की पड़ताल के बाद अदालत ने इस पूरे ढांचे को अवैध अधिभोग के रूप में चिह्नित किया।

30 दिन के भीतर कब्जा हटाने की मोहलत

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सभी न्यायिक प्रक्रियाओं का पालन करने और पक्षों को सुनने के बाद यह निर्णय लिया गया है, क्योंकि अवैध कब्जाधारी अपने दावे को साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। न्यायालय ने इन्हें अपने स्तर पर 30 दिन के भीतर कब्जा हटाने का अवसर दिया है। यदि तय समय सीमा के भीतर यह जमीन खाली नहीं की जाती है, तो स्थानीय प्रशासन के पास बल प्रयोग करके बेदखली की कार्रवाई करने का अधिकार होगा। इसके साथ ही, निर्धारित जुर्माना राशि भी कानूनन वसूल की जाएगी। प्रशासन अब इस बड़े फैसले के बाद अगली कार्रवाई की रणनीति बना रहा है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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