राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
भारत और रूस की दोस्ती अटूट
भारत और रूस के बीच के संबंध हमेशा से ही वैश्विक कूटनीति में एक अलग स्थान रखते हैं। हाल ही में रूसी दूतावास के प्रवक्ता पेत्र सिजोव ने नई दिल्ली में इस बात पर जोर दिया कि भारत के साथ मॉस्को के संबंधों पर किसी भी तीसरे देश का कोई असर नहीं पड़ सकता। बदलते हुए अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक हालात के बावजूद दोनों देशों की मित्रता हर कसौटी पर खरी उतरी है। सोमवार की शाम को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एक विशेष रूसी सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान सिजोव ने यह महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हम सच्चे दोस्त हैं और इस दोस्ती की नींव इतनी मजबूत है कि कोई तीसरा पक्ष इसे बदलने या प्रभावित करने की स्थिति में नहीं है।
सांस्कृतिक जुड़ाव की ऐतिहासिक विरासत
सिजोव ने भारत और रूस के रिश्तों को केवल राजनयिक नहीं, बल्कि सदियों पुराना मानवीय जुड़ाव बताया। इस गहरे संबंध का उदाहरण देते हुए उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और प्रसिद्ध रूसी लेखक लियो टॉल्स्टॉय के बीच हुए पत्राचार का जिक्र किया। सिजोव ने बताया कि गांधीजी, टॉल्स्टॉय को अपना गुरु मानते थे। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों महान विभूतियां कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिलीं, लेकिन उनके पत्रों का आदान-प्रदान इस बात का सबूत है कि दोनों देशों के लोगों के बीच ऐतिहासिक और वैचारिक जुड़ाव हमेशा से रहा है।
सांस्कृतिक कूटनीति का महत्व
रूसी राजनयिक ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में संस्कृति की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने भारत में रूसी बैले (पारंपरिक रूसी नृत्य) की पुरानी लोकप्रियता और रूस में भारतीय सिनेमा के प्रति लोगों के लगाव का उदाहरण दिया। सिजोव ने बताया कि रूस भारत के साथ अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है। इस विशेष अवसर से पहले भारत में संगीत, कला और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला आयोजित करने की योजना है, जिससे आपसी रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाया जा सके।
लोगों के बीच का रिश्ता है सबसे अहम
भारत में तैनात रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव की पत्नी डायना अलीपोव ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को केवल सरकारी वार्ताओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे आम लोगों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सांस्कृतिक कूटनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे जनमानस तक पहुंचती है। यह सरकारों के बीच का औपचारिक संबंध नहीं, बल्कि एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति के साथ जुड़ाव है।
युवा पीढ़ी पर रूस का विशेष ध्यान
रूस अब युवा भारतीयों को अपनी समृद्ध संस्कृति से परिचित कराने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है। डायना अलीपोव के अनुसार, रूसी दूतावास दिल्ली के विभिन्न स्कूलों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि सांस्कृतिक गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके। रूस संस्कृति दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में होली ट्रिनिटी-सेंट सर्जियस लावरा और मॉस्को थियोलॉजिकल अकादमी के संयुक्त दल ने शिरकत की। इन कलाकारों ने रूसी धार्मिक सामूहिक गायन और पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत किए, जिसने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस प्रकार के निरंतर सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से रूस भारत के साथ अपने आपसी संपर्कों को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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