अस्पताल खुद चलकर आएगा मरीज के पास: दुनिया की पहली सोलर एम्बुलेंस में ही होगा पूरा इलाज विश्व एक घंटा पहले 4
नीदरलैंड के छात्रों ने एक अनूठी सोलर एम्बुलेंस तैयार की है जो बिजली और ईंधन के बिना दूरदराज के इलाकों में चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करेगी। इस चलता-फिरता अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी आधुनिक मशीनें लगी हैं।

अफ्रीका में स्वास्थ्य सेवाओं की नई उम्मीद

अफ्रीका महाद्वीप के कई दुर्गम इलाकों में आज भी मरीजों के लिए अस्पताल तक पहुँचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ की लगभग एक-तिहाई आबादी ऐसे क्षेत्रों में निवास करती है जहाँ से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक जाने में ही दो घंटे से अधिक का समय लग जाता है। खराब सड़कें, यातायात के साधनों का अभाव और बिजली की भारी किल्लत स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए नीदरलैंड के 23 प्रतिभाशाली छात्रों ने एक अभिनव पहल की है, जिसे दुनिया की पहली सोलर एम्बुलेंस माना जा रहा है।

स्टेला जुवा: एक चलता-फिरता अस्पताल

नीदरलैंड के छात्रों की इस टीम ने इस विशेष वाहन का नाम स्टेला जुवा रखा है। यह गाड़ी सामान्य एम्बुलेंस की तरह केवल मरीज को अस्पताल तक पहुँचाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह खुद में एक पूर्ण अस्पताल है। इसमें एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउंड जैसी जांच सुविधाएं और टीकों को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष फ्रिज भी मौजूद है। इस गाड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसकी छत पर लगे सोलर पैनल हैं। जब यह एम्बुलेंस सड़क पर चल रही होती है, तब भी इसके पैनल ऊर्जा बनाते रहते हैं। वहीं, जब यह रुकती है, तो इसके पैनल पंखों की तरह फैल जाते हैं और सूरज की रोशनी से कहीं ज्यादा बिजली खींचने की क्षमता रखते हैं।

ईंधन और बिजली की जरूरत से मुक्ति

स्टेला जुवा की तकनीक इसे पारंपरिक वाहनों से पूरी तरह अलग बनाती है। इस मोबाइल क्लीनिक को चलाने के लिए किसी भी तरह के ईंधन या चार्जिंग स्टेशन पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। जिन क्षेत्रों में बिजली का नामो-निशान नहीं है, वहां सूरज की रोशनी ही इस वाहन के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। इस महीने की शुरुआत में छात्रों की टीम ने केन्या में इस एम्बुलेंस का परीक्षण किया। अमरेफ हेल्थ अफ्रीका के साथ मिलकर किए गए इस ट्रायल के दौरान, वाहन को 800 किलोमीटर से अधिक की कठिन यात्रा पर ले जाया गया। इसमें कीचड़, धूल भरी कच्ची सड़कें और बड़े-बड़े गड्ढों वाले रास्ते शामिल थे।

ऊर्जा क्षमता ने विशेषज्ञों को किया हैरान

टीम का सफर मोसिरो के एक ऐसे स्वास्थ्य केंद्र तक भी हुआ, जहाँ बुनियादी बिजली की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। यहाँ तक पहुँचने के लिए टीम को कई घंटों तक बेहद खराब सड़कों पर गाड़ी चलानी पड़ी। हालांकि, सबसे चौंकाने वाले नतीजे इस वाहन की ऊर्जा क्षमता को लेकर सामने आए। परीक्षण के दौरान, जब स्टेला जुवा को एक स्थान पर खड़ा करके इसके सभी मेडिकल उपकरणों को एक साथ चालू किया गया, तब भी सोलर पैनलों द्वारा उत्पादित ऊर्जा वाहन की खपत से अधिक थी। छात्रों का मानना है कि यह साबित करता है कि स्टेला जुवा बिना किसी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के भी दूरदराज के गांवों में प्रभावी ढंग से काम कर सकती है।

गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान

मोसिरो जैसे इलाकों में बिजली की कमी मरीजों के लिए जानलेवा साबित होती है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण जांच करवाना अक्सर नामुमकिन हो जाता है। यदि स्टेला जुवा जैसी सोलर एम्बुलेंस का उपयोग ऐसे सुदूर क्षेत्रों में किया जाए, तो इससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, मौजूदा परीक्षण के दौरान मरीजों पर इन उपकरणों का सीधा उपयोग नहीं किया गया, लेकिन सफलता की दर को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में यह तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति ला सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर तक पहुँचाने का यह सपना अब सच होता दिख रहा है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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