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एक घंटा पहले
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समुद्र में 9 महीने बिताने के बाद थाईलैंड पहुंचा अमेरिकी विमानवाहक पोत
अमेरिकी नौसेना का विशाल विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन हाल ही में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लगातार 9 महीने से ज्यादा समय तक खुले समुद्र में तैनात रहने के बाद, यह युद्धपोत बुधवार को थाईलैंड के लैम चाबांग बंदरगाह पर लंगर डालने पहुंचा। लेकिन जैसे ही इस पोत की तस्वीरें सामने आईं, दुनिया भर के लोगों का ध्यान उसकी शानदार ताकत से हटकर उसके बाहरी हिस्से की ओर चला गया। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जहाज के बाहरी ढांचे पर जगह-जगह जंग लगी हुई है, कहीं-कहीं पेंट पूरी तरह उखड़ा हुआ है, और पानी की सतह के पास जहाज की बॉडी पर हरी काई जम गई है। यह जर्जर दृश्य देखकर सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की तीखी टिप्पणियां कर रहे हैं और इसकी तुलना कबाड़ से की जा रही है।
सोशल मीडिया पर मज़ाक और तीखी आलोचना
इस एयरक्राफ्ट कैरियर की तस्वीरें वायरल होने के बाद ऑनलाइन मंचों पर लोगों ने इसे अमेरिकी सैन्य ताकत के पतन के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है। एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने तंज कसते हुए लिखा कि जो जहाज कभी दुनिया को अपनी ताकत दिखाता था, अब वह टिटनेस के खतरे जैसा नजर आ रहा है। वहीं, अन्य लोगों ने इसे किसी हारी हुई सेना का प्रतीक बताया है। इन आलोचनाओं के बीच जहाज के खराब लुक्स को लेकर बहस छिड़ गई है। आम लोग इस विशालकाय युद्धपोत की बदहाल स्थिति पर आश्चर्य जता रहे हैं, जिसे देखकर कतई नहीं लगता कि यह दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौसेना का हिस्सा है।
क्या वाकई यह जहाज कबाड़ हो चुका है?
हालांकि, इन तस्वीरों को लेकर हो रहे शोर-शराबे के बीच रक्षा विशेषज्ञों का नजरिया बिल्कुल अलग है। पूर्व अमेरिकी नौसेना अधिकारी रॉबर्ट मुरेट के अनुसार, नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र के खारे पानी में निरंतर रहने के बाद जहाज का ऐसा दिखना बेहद सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी सतह पर लगी जंग या रंग का उतरना जहाज की आंतरिक सैन्य क्षमता या उसकी मारक क्षमता को प्रभावित नहीं करता है। यह महज एक सतही टूट-फूट है जो इतने लंबे अभियान के बाद किसी भी युद्धपोत में देखी जा सकती है। USS अब्राहम लिंकन नवंबर 2025 में सैन डिएगो से रवाना हुआ था और तब से यह लगातार ऑपरेशन्स में जुटा था।
मिशन और तैनाती का लंबा सफर
अपने नौ महीने के सफर में, USS अब्राहम लिंकन ने कई महत्वपूर्ण अभियानों को अंजाम दिया है। शुरुआत में इसे पैसिफिक क्षेत्र में तैनात किया गया था, लेकिन बाद की रणनीतिक आवश्यकताओं के चलते इसे मध्य पूर्व में भेज दिया गया। वहां इसने ईरान के खिलाफ चलाए गए अमेरिकी सैन्य अभियानों में मुख्य भूमिका निभाई। विशेष रूप से 28 फरवरी को शुरू हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में इस जहाज की भूमिका अहम रही थी। करीब 286 दिनों की लगातार तैनाती के बाद अब इसे थाईलैंड में आराम और मरम्मत का मौका मिला है, जो चालक दल और जहाज के रखरखाव के लिए बेहद जरूरी था।
सुरक्षा घेरा और चालक दल का मानसिक तनाव
लैम चाबांग बंदरगाह पर पहुंचते ही प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए हैं। बंदरगाह के उप निदेशक वीरचत फुत्थराक्सा के मुताबिक, यह एक विदेशी सैन्य संपत्ति है, इसलिए आम लोगों को इसके पास जाने की अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि, जहाज के साथ-साथ उसके चालक दल की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण सैनिकों के मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की खबरें सामने आती रही हैं। पिछले महीने एक सैनिक के समुद्र में कूदने की दुखद घटना हुई थी, जिसे किसी तरह बचा लिया गया, जबकि एक अन्य व्यक्ति के भी ऐसा करने की कोशिश की खबरें मिली थीं। ये घटनाएं लगातार तैनाती के दबाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।
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