थाईलैंड में स्कूल के भीतर खूनी खेल, 14 साल के होनहार छात्र ने मचाया कत्लेआम विश्व एक घंटा पहले 2
थाईलैंड के एक स्कूल में 14 साल के छात्र द्वारा की गई अंधाधुंध फायरिंग में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 लोग घायल हुए हैं। घटना से पहले छात्र ने अपने घर पर दादा-दादी की भी हत्या कर दी थी।

स्कूली परिसर में पसरा मातम

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के निकट स्थित देबसिरीन नोंथाबुरी स्कूल में बीते शुक्रवार यानी 7 अगस्त को जो मंजर देखने को मिला, उसने पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक 14 वर्षीय छात्र ने स्कूल परिसर के भीतर ही गोलियों की बौछार कर दी। इस खौफनाक वारदात में कुल 8 लोगों की जान चली गई है, जबकि 22 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर होने की प्रतीक्षा की जा रही है। इस छात्र ने स्कूल में कत्लेआम मचाने के बाद अंत में खुद को भी गोली मारकर अपनी जान दे दी।

क्या था उस सुबह का घटनाक्रम

शुक्रवार की सुबह लगभग 10 बजे का समय था और स्कूल में सामान्य रूप से कक्षाएं चल रही थीं। तभी अचानक हुई गोलियों की आवाज से पूरा कैंपस दहल उठा। पो टेक तुंग फाउंडेशन के राहतकर्मियों को सूचित किया गया कि स्कूल के अंदर एक हमलावर अंधाधुंध फायरिंग कर रहा है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस नाबालिग छात्र ने कुल 26 राउंड गोलियां चलाईं। क्लासरूम और कॉरिडोर में मौजूद शिक्षक और छात्र उसकी चपेट में आ गए। स्कूल के शिक्षकों ने अपनी जान पर खेलकर छात्रों को कमरों के अंदर सुरक्षित किया और उन्हें फर्श पर लेटने का निर्देश दिया ताकि वे गोलियों के निशाने पर न आ सकें।

चश्मदीदों की आंखों में खौफ

इस हादसे को करीब से देखने वाले छात्रों के बयान रोंगटे खड़े करने वाले हैं। एक छात्र ने बीबीसी को बताया कि वह अपनी शिक्षिका के सामने खड़ा था, तभी हमलावर वहां पहुंचा और उसने शिक्षिका को गोली मार दी। छात्र ने बताया कि उसे धूल और धुएं के अलावा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, और वह हमलावर एक कमरे से दूसरे कमरे में जाकर लोगों को अपना निशाना बना रहा था। वहीं, 12वीं कक्षा की छात्रा पावारिसा मेलिसा का कहना है कि गोलियों की आवाज इतनी तेज थी कि उन्हें लगा हमलावर उनके ठीक ऊपर वाली मंजिल पर मौजूद है। फर्श पर गोलियों के टकराने की आवाज उन्हें स्पष्ट सुनाई दे रही थी। 18 वर्षीय एक अन्य विद्यार्थी ने बताया कि शुरुआत में उसे लगा कि शायद कहीं पटाखे फोड़े जा रहे हैं, लेकिन बाद में उसे एहसास हुआ कि यह बंदूक की आवाज है।

शिक्षक और छात्रों की असमय मौत

घटनास्थल पर पहुंचे बचाव दल के सदस्य किआतिखुन वेरापोंगप्रदिथ ने बताया कि राहत कार्य के दौरान दृश्य बेहद भयावह थे। कई छात्रों को पीठ, छाती और बांह में गोलियां लगी थीं। एक कमरे में एक पुरुष शिक्षक का शव मिला, जबकि दूसरे कक्ष में एक शिक्षिका ने दम तोड़ दिया था। मौतों के आंकड़ों को लेकर सरकारी तंत्र में अभी भी स्पष्टता की कमी है। उप गृह मंत्री पोलपी सुवांचावी के अनुसार हमले में 5 शिक्षकों की मौत हुई है, जबकि पुलिस की रिपोर्ट बताती है कि 3 शिक्षक और 3 छात्रों की जान गई है। हमलावर छात्र को भी अंत में मृत पाया गया, हालांकि राहतकर्मियों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की और सीपीआर भी दिया, लेकिन उसके सिर में लगी गोली जानलेवा साबित हुई।

पढ़ने में होनहार, फिर क्यों बना कातिल?

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो बच्चा पढ़ने में अव्वल था और जिसका ट्रैक रिकॉर्ड बेहतरीन था, वह अचानक हत्यारा कैसे बन गया? शिक्षकों का कहना है कि वह लड़का कभी भी हिंसक या आक्रामक नहीं रहा था। पुलिस की जांच के अनुसार, लड़का ऑनलाइन वीडियो गेम्स का बेहद शौकीन था। हालांकि, मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि स्कूल में तबाही मचाने से पहले उसने अपने घर पर अपने दादा-दादी की हत्या कर दी थी। थाईलैंड के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री ने भी इसकी पुष्टि की है कि दोनों बुजुर्गों के शव उनके निवास पर मिले हैं। पुलिस का मानना है कि स्कूल में 26 राउंड फायरिंग के लिए इस्तेमाल की गई 9mm पिस्टल उसी के दादा की थी, जो सेवानिवृत्त शिक्षक थे।

थाईलैंड में गन कल्चर का काला इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब थाईलैंड ने इस तरह की खूनी घटना देखी है। देश में हथियारों की आसान उपलब्धता हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही है। पिछले कुछ वर्षों में देश ने कई मास शूटिंग की घटनाओं का दंश झेला है। फरवरी 2026 में दक्षिणी थाईलैंड के एक स्कूल में 18 वर्षीय हमलावर ने प्रिंसिपल और एक छात्रा की जान ले ली थी। जुलाई 2025 में बैंकॉक के एक बाजार में पांच लोगों की हत्या कर दी गई थी। अक्टूबर 2022 की घटना को थाईलैंड के इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है, जब एक पूर्व पुलिसकर्मी ने डे-केयर सेंटर में घुसकर 36 लोगों की जान ले ली थी, जिनमें 22 मासूम बच्चे शामिल थे। फरवरी 2020 में भी नाखोन रत्चासिमा में एक सैनिक ने 29 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।

प्रशासन और समाज के सामने चुनौतियां

थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इसे देश के लिए अत्यंत दुखद और भयानक बताया है। इस घटना ने एक बार फिर थाईलैंड में गन कंट्रोल कानूनों को लेकर तीखी बहस छेड़ दी है। पुलिस और फॉरेंसिक टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या ऑनलाइन गेम्स के प्रभाव या किसी अन्य मानसिक दबाव के कारण वह छात्र इस हद तक पहुंच गया। फिलहाल पूरा देश शोकाकुल है और लोग इस बात से सहमे हुए हैं कि आखिर एक 14 साल का बच्चा किस तरह अपने ही परिवार और स्कूल के लोगों का काल बन सकता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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