तूफान काइल की दस्तक: 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मचाएगा तबाही, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट विश्व एक घंटा पहले 4
अटलांटिक महासागर में नवंबर की शुरुआत के साथ ही एक नया सबट्रॉपिकल तूफान काइल आकार ले रहा है, जिसके चलते 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और मूसलाधार बारिश होने की आशंका है।

समुद्र में फिर उठा तूफानी बवंडर

पिछले दो हफ्तों से समुद्र की लहरों में जो शांति छाई हुई थी, वह अब पूरी तरह से खत्म होने वाली है। अटलांटिक महासागर में नवंबर का महीना शुरू होते ही मौसम का मिजाज एक बार फिर खतरनाक रुख अपना रहा है। वैज्ञानिक और मौसम विशेषज्ञ एक नए बन रहे सबट्रॉपिकल स्टॉर्म पर बारीकी से नजर गड़ाए हुए हैं, जिसे काइल (Kyle) के नाम से जाना जाएगा। यह सिस्टम इतनी तेजी से अपनी ताकत जुटा रहा है कि आने वाले कुछ ही घंटों में यह एक विनाशकारी रूप धारण कर सकता है। इस तूफान के केंद्र में हवाओं की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जो तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही लाने के लिए पर्याप्त है।

तूफान काइल: कहां और कैसे बन रहा है खतरा?

अटलांटिक बेसिन में पिछले कई दिनों से चल रही मौसमी हलचल अब एक व्यवस्थित रूप लेती दिख रही है। बहामास के उत्तर-पूर्व में कई सौ मील दूर और अमेरिकी पूर्वी तट से काफी दूर खुले समुद्र में कम दबाव का एक बड़ा क्षेत्र विकसित हो रहा है। मौसम जानकारों का कहना है कि यदि यह सिस्टम हवा के दबाव और अपनी गति को बनाए रखने में सफल रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार इसे आधिकारिक रूप से 'काइल' नाम दिया जाएगा। फिलहाल यह तूफान बरमुडा के द्वीपीय क्षेत्रों की ओर बढ़ने के संकेत दे रहा है। सामान्य तौर पर नवंबर के महीने में समुद्री तूफानों की तीव्रता में कमी आ जाती है, लेकिन काइल का बनना इस बार एक अपवाद की तरह है, जिसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

कितना गंभीर है यह मौसमी बदलाव?

आखिरी बार 21-22 अक्टूबर को 'जोसेफिन' नामक तूफान ने दस्तक दी थी, जिसके बाद से समंदर पूरी तरह से शांत था। अब यह शांति टूटती हुई नजर आ रही है। इस नए सिस्टम के केंद्र में गरज-चमक के साथ तूफानी बादलों का जमावड़ा शुरू हो चुका है। यदि यह बादलों और ऊर्जा को पर्याप्त रूप से संगठित कर लेता है, तो यह एक पूर्ण सबट्रॉपिकल स्टॉर्म में तब्दील हो जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सिस्टम के पास खुद को संगठित करने के लिए समय बहुत कम है। इसे अपनी ताकत दिखाने के लिए इसी हफ्ते का इंतजार करना होगा। यदि यह वीकेंड तक अपनी पूरी क्षमता विकसित नहीं कर पाया, तो आसपास की विपरीत मौसमी स्थितियां इसे कमजोर कर सकती हैं और यह बिना नाम पाए ही समुद्र में विलीन हो सकता है।

किन इलाकों पर है खतरा और क्या हैं राहत की बातें?

राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि वर्तमान में यह तूफान अमेरिकी मुख्य भूमि से काफी दूर स्थित है। इसलिए अमेरिका को इससे सीधे तौर पर कोई बड़ा खतरा नहीं है। हालांकि, खुले समुद्र से गुजरते हुए यह बरमुडा के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश का संकट जरूर पैदा करेगा। एक बार बरमुडा के पास से गुजरने के बाद, इसके उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ते हुए खुले अटलांटिक में निकल जाने की संभावना जताई गई है।

अक्टूबर का 'जोसेफिन' और काइल की समानताएं

इस नए तूफान की भयावहता को समझने के लिए पिछले महीने अक्टूबर 2024 के अंत में आए 'जोसेफिन' के हमले को याद करना जरूरी है। उस समय अमेरिकी पूर्वी तट के काफी करीब अचानक सबट्रॉपिकल स्टॉर्म जोसेफिन का जन्म हुआ था। बिना किसी पूर्व चेतावनी के इस तूफान ने अचानक रौद्र रूप ले लिया था। उस समय हवाओं की निरंतर रफ्तार 105 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई थी, जबकि हवा के झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गए थे। हालांकि जोसेफिन लंबे समय तक नहीं टिका, लेकिन इसने तटीय क्षेत्रों में जलभराव, ऊंची लहरें और सड़कों पर भारी तबाही मचाई थी। मौसम विशेषज्ञों को डर है कि काइल भी जोसेफिन की ही तर्ज पर अचानक अपनी ताकत में इजाफा कर सकता है।

सबट्रॉपिकल स्टॉर्म आखिर इतना खतरनाक क्यों होता है?

आम धारणा के विपरीत, सबट्रॉपिकल स्टॉर्म सामान्य ट्रॉपिकल चक्रवात या हरिकेन से अलग और अधिक जटिल होते हैं। इन्हें 'हाइब्रिड' तूफान कहा जाता है, क्योंकि इनमें ट्रॉपिकल और गैर-ट्रॉपिकल दोनों तरह के मौसम प्रणालियों के गुण मौजूद होते हैं। इनकी बनावट गर्म समुद्री नमी और ठंडे हवा के दबाव के मिश्रण से होती है। नेशनल हरिकेन सेंटर (NHC) इन तूफानों को लेकर भी उतनी ही गंभीरता दिखाता है जितनी किसी बड़े हरिकेन को लेकर।

  • हवाओं की अप्रत्याशित चाल: सबट्रॉपिकल स्टॉर्म के भीतर हवाएं अपनी दिशा और गति बहुत तेजी से बदलती हैं। जब ये 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जमीनी इलाकों से टकराती हैं, तो पेड़ उखाड़ने और बिजली के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस करने में सक्षम होती हैं।
  • मूसलाधार बारिश: इन तूफानों का सबसे घातक पहलू इनमें मौजूद विशाल नमी है। यह नमी कुछ ही घंटों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश करवा सकती है, जिससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ जाती है।

फिलहाल, अत्याधुनिक सैटेलाइट और रडार प्रणालियों के जरिए वैज्ञानिक इस समुद्री हलचल पर 24 घंटे पैनी नजर रखे हुए हैं। आने वाले 48 से 72 घंटों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या काइल सचमुच एक विनाशकारी तूफान बनकर उभरेगा या फिर यह समुद्र की गहराइयों में ही अपनी ऊर्जा खो देगा। लेकिन एक बात निश्चित है, नवंबर की इस शुरुआत ने यह साबित कर दिया है कि इस साल का मौसमी चक्र अभी पूरी तरह थमा नहीं है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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