खेत में छिपकर मेटल डिटेक्टर ले गया शख्स, बीप की आवाज के साथ धरती से निकला 933 सोने के सिक्कों का खजाना विश्व एक घंटा पहले 3
ब्रिटेन के एसेक्स में एक व्यक्ति ने बिना अनुमति के एक निजी खेत में मेटल डिटेक्टर का इस्तेमाल किया, जहाँ उसे 2000 साल पुराने सोने के सिक्कों का एक बड़ा भंडार मिला। यह लौह युग का अब तक का सबसे बड़ा खजाना माना जा रहा है, जिसे अब संग्रहालय में सहेजा गया है।

अनधिकृत खोज और एक ऐतिहासिक कामयाबी

कल्पना कीजिए कि आप किसी खेत में टहल रहे हों और अचानक जमीन के भीतर से सोने की चमक बाहर आने लगे। यह किसी फिल्म की कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। हाल ही में एक व्यक्ति मेटल डिटेक्टर लेकर ऐसी जगह पहुंच गया जहां उसे जाने की इजाजत नहीं थी। वह व्यक्ति वहां चोरी-छिपे मेटल डिटेक्टर का इस्तेमाल कर रहा था, तभी अचानक उसे एक बीप की आवाज सुनाई दी। उसने जैसे ही मिट्टी हटाई, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। वहां सोने के सिक्कों का एक ऐसा ढेर दबा था जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए। यह घटना ब्रिटेन के एसेक्स में स्थित ग्रेट बैडो इलाके की है। इस शख्स को जो खजाना मिला, उसने पुरातत्वविदों और इतिहासकारों को भी चौंका दिया है। आज इसे ग्रेट बैडो डिस्कवरी के नाम से दुनिया जानती है और इसे लौह युग के सोने के सिक्कों का ब्रिटेन में अब तक का सबसे बड़ा खजाना माना जा रहा है।

कानूनी पेंच और पुरातत्व का नुकसान

यह महत्वपूर्ण खोज किसी सार्वजनिक स्थल पर नहीं बल्कि एक निजी जमीन के टुकड़े पर हुई थी। सबसे बड़ी समस्या यह रही कि जिस व्यक्ति ने इन सिक्कों को खोजा, उसके पास उस क्षेत्र में मेटल डिटेक्टर का उपयोग करने की कोई वैध अनुमति नहीं थी। यही कारण रहा कि जब यह खजाना मिला, तो इसे ट्रेजर एक्ट 1996 के तहत निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया के अनुसार तुरंत सूचित नहीं किया गया। इस लापरवाही का एक बड़ा नुकसान यह हुआ कि सिक्के जिस स्थिति में, जिस गहराई पर और जिस संदर्भ में जमीन के नीचे दबाए गए थे, उस बारे में वैज्ञानिक जानकारी पूरी तरह से नष्ट हो गई। अगर खुदाई पेशेवर तरीके से की जाती, तो इतिहास के कई पन्नों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता था, लेकिन अनधिकृत खुदाई ने उस संदर्भ को मिटा दिया।

सिक्कों का विवरण और प्राचीन इतिहास

खेत से कुल 933 सोने के सिक्के बरामद हुए हैं। विशेषज्ञों द्वारा किए गए गहन विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से 930 सिक्के ईस्टर्न ब्रिटिश स्टेटर हैं, जिन्हें व्हाडन चेज के नाम से जाना जाता है। इन सिक्कों को लगभग 60 से 20 ईसा पूर्व के बीच उत्तरी टेम्स क्षेत्र में ढाला गया था। इस खजाने में केवल स्टेटर ही नहीं मिले, बल्कि इसमें एक क्वार्टर स्टेटर, एक दुर्लभ महाद्वीपीय गैलो बेल्गिक ई प्रकार का सिक्का और ईस्ट एंग्लिया का नॉरफ्लॉक वुल्फ स्टेटर भी शामिल है। इसके अलावा, वहां से कुछ ऐसे अवशेष भी मिले हैं जो संकेत देते हैं कि सिक्के कभी किसी पात्र या बर्तन में रखे गए थे, जो समय के साथ नष्ट हो गया होगा।

विशेषज्ञों की जांच और रोमन कनेक्शन

खोज के सार्वजनिक होने के बाद पुरातत्व विशेषज्ञों की एक टीम ने उस स्थान का दौरा किया। टीम ने वहां दोबारा गहन खोज अभियान चलाया, जिसमें उन्हें एक और सिक्का मिला, हालांकि उस स्थल पर अन्य कोई महत्वपूर्ण सामग्री नहीं मिल सकी। इस खजाने के साथ एक रोमांचक ऐतिहासिक पहेली भी जुड़ी है। क्या इन सिक्कों का संबंध जूलियस सीजर के आक्रमण से है? ग्रेट बैडो का क्षेत्र प्राचीन काल में ट्रिनोवेंटेस समुदाय से जुड़ा माना जाता है, जबकि अधिकांश सिक्के उस क्षेत्र के हैं जो बाद में कैटुवेलोनी के अंतर्गत आया। चूंकि 54 ईसा पूर्व में जूलियस सीजर ने ब्रिटेन पर सैन्य अभियान चलाया था, इसलिए कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि पूर्वी ब्रिटेन में इतनी बड़ी संख्या में सोने के स्टेटरों का निर्माण रोमन खतरे या आक्रमण से जुड़ी उथल-पुथल की प्रतिक्रिया हो सकता है।

संग्रहालय में खजाने का नया पता

इस अनमोल धरोहर को संरक्षित करने के लिए मई 2025 में म्यूजियम ऑफ चेम्सफोर्ड ने कदम बढ़ाया। नेशनल लॉटरी हेरिटेज फंड और कई अन्य संस्थाओं से मिले सहयोग की बदौलत इसे £250000 की राशि में हासिल किया गया। 2026 की गर्मियों के दौरान इसे पहली बार एक विशेष प्रदर्शनी के जरिए आम जनता के दर्शन के लिए रखा गया। अब संग्रहालय प्रबंधन इस खजाने को एक स्थायी प्रदर्शनी के रूप में प्रदर्शित करने की योजना बना रहा है, जिसकी शुरुआत 2027 से होने की उम्मीद है। ये 933 सिक्के केवल सोने के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि ये दो हजार साल पुराने उस लौह युग की खामोश गवाही हैं, जब ब्रिटेन में स्थानीय शक्तियों का वर्चस्व था और रोमन साम्राज्य के दस्तक देने से पहले का दौर पूरी तरह अस्थिर और संघर्षपूर्ण था।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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