मिस्र में 3,000 साल पुरानी कब्र का रहस्य आया सामने, फराओ काल का अनमोल खजाना मिला विश्व 2 महीने पहले 88
मिस्र के लक्सर में पुरातत्वविदों ने एक प्राचीन मकबरे को खोज निकाला है जो लगभग 3,000 साल पुराना बताया जा रहा है। इस खोज से प्राचीन न्यू किंगडम काल के सामाजिक और धार्मिक रहस्यों के बारे में नई जानकारी मिलने की उम्मीद है।

मिस्र के लक्सर में मिली इतिहास की धरोहर

मिस्र की तपती रेत के नीचे दबे रहस्यों ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है। लक्सर के पश्चिमी तट पर चल रही खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों के एक दल को लगभग 3,000 साल पुराना एक प्राचीन मकबरा मिला है। यह खोज सीधे फराओ युग से जुड़ी हुई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह मकबरा न्यू किंगडम काल का है, जिसका समय 1550 ईसा पूर्व से 1069 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है। मिस्र के पर्यटन एवं पुरावशेष मंत्रालय ने रविवार को इस ऐतिहासिक उपलब्धि की पुष्टि की है। यह महत्वपूर्ण खोज थीबन नेक्रोपोलिस में कार्यरत एक डच पुरातात्विक टीम के शोध के दौरान सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मकबरा उस काल के धार्मिक और सामाजिक जीवन के कई अनकहे अध्यायों को समझने में मददगार साबित होगा।

मकबरे के मालिक की पहचान और शिलालेख

मिस्र की सुप्रीम काउंसिल ऑफ एंटीक्विटीज (SCA) के महासचिव हिशाम एल-लेइथी ने इस खोज के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मकबरे के भीतर मौजूद शिलालेखों की बारीकी से जांच करने के बाद इसके मालिक की पहचान पासेर के रूप में हुई है। दीवारों पर उकेरी गई कलाकृतियों और शिलालेखों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि यह न्यू किंगडम काल का एक निजी मकबरा था। पुरातत्वविद अब इस स्थल का वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं ताकि यहां दफन किए गए लोगों की जीवनशैली और उस दौर के इतिहास को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

मकबरे की अनोखी बनावट

इस मकबरे की वास्तुकला उस समय के उच्च अधिकारियों की कब्रों की पारंपरिक शैली को दर्शाती है। इसके ढांचे में एक खुला हुआ आंगन है, जिसके साथ ही चट्टानों को काटकर बनाया गया एक उल्टे 'टी' आकार का प्रार्थना कक्ष मौजूद है। इसके अलावा, परिसर में कई भूमिगत कमरे भी बने हुए हैं। पुरातत्व विभाग के प्रमुख मोहम्मद अब्देल-बादी के अनुसार, मकबरे का बाहरी आंगन काफी अच्छी स्थिति में संरक्षित पाया गया है। यहां मिट्टी की ईंटों से बना एक विशेष समाधि मंच यानी मस्तबा भी मिला है, जिसके बीचों-बीच अंतिम संस्कार से संबंधित शिलापट्ट स्थापित करने का स्थान सुनिश्चित किया गया था। मकबरे के मुख्य द्वार तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां और दोनों तरफ रैंप का निर्माण किया गया था, जो उस काल के इंजीनियरिंग कौशल को दर्शाता है।

दीवारों पर उकेरी गई रंगीन कला

इस खोज का सबसे आकर्षक पहलू मकबरे की दीवारों पर मौजूद जीवंत और रंगीन चित्रकारी है। हालांकि, समय की मार के कारण कुछ हिस्से धूल और गाद से ढके हुए हैं, लेकिन सफाई के बाद जो हिस्से सामने आए हैं, वे अत्यंत खूबसूरत हैं। इन चित्रों में मकबरे के मालिक पासेर को विभिन्न देवताओं के मंदिरों में प्रार्थना करते हुए और अपनी पत्नी के साथ पारंपरिक भेंट चढ़ाते हुए दिखाया गया है। ये चित्र उस समय की धार्मिक मान्यताओं और कलात्मक उत्कृष्टता का प्रमाण देते हैं।

ऐतिहासिक महत्व और हालिया खोजें

मिस्र में पिछले कुछ महीनों के दौरान पुरातात्विक खोजों की गति बढ़ गई है। यह खोज मिस्र के इतिहास के प्रति दुनिया की दिलचस्पी को और बढ़ाती है। इससे पहले अप्रैल में मिन्या प्रांत में रोमन और यूनानी काल का एक दुर्लभ मकबरा मिला था, जो काफी चर्चा में रहा। उस स्थान से कई ममियां, लकड़ी के ताबूत और सोने व तांबे से बनी कृत्रिम जीभें बरामद हुई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि नई खोज भी प्राचीन मिस्र के अंतिम संस्कार की परंपराओं और वहां के सामाजिक ढांचे को समझने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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