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14 घंटे पहले
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भूकंप से दहली जापान की सुबह
भारत में जहां लोग दीपावली के त्योहार की खुशियों में सराबोर थे, वहीं जापान के निवासियों के लिए आज की सुबह किसी बड़े खतरे और दहशत के साथ शुरू हुई। मध्य जापान में रिक्टर पैमाने पर 5.7 की तीव्रता वाले भूकंप ने धरती को बुरी तरह थर्रा दिया। झटके इतने तेज थे कि नींद में सोए हुए लोग घबराकर अपने घरों से बाहर सड़कों पर दौड़ पड़े। जान बचाने की इस आपाधापी और अफरा-तफरी में अब तक 22 लोगों के जख्मी होने की दुखद सूचना सामने आई है। भूकंप की तीव्रता और झटकों की अवधि ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया था।
भूकंप का केंद्र और तीव्रता का ब्योरा
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, यह भूकंप रात 1 बजकर 4 मिनट पर आया। भूकंप का केंद्र शिजुओका प्रांत के पश्चिमी हिस्से में जमीन से करीब 40 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। इसके सबसे भीषण झटके आइची प्रांत के चिता शहर में महसूस किए गए, जहां जापान के विशेष भूकंप मापन पैमाने पर इसकी तीव्रता ऊपरी स्तर 5 दर्ज की गई। इसके अलावा आइची, नागानो और गिफू प्रांतों के अनेक इलाकों में निचले स्तर 5 की तीव्रता के झटके महसूस किए गए। अचानक आई इस हलचल के चलते कई जगहों पर घरों के भीतर रखा सामान गिर गया और दुकानों के शीशे तक टूट गए। भूकंप के मुख्य झटकों के बाद भी कई छोटे झटके महसूस किए गए, जिससे लोग सहमे रहे। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखने और बचाव कार्यों में समन्वय के लिए तत्काल प्रभाव से एक आपात संपर्क कार्यालय की स्थापना की है।
सुनामी को लेकर क्या है स्थिति
भूकंप के तुरंत बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या इससे सुनामी का खतरा उत्पन्न होगा। हालांकि, जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट कर दी है। एजेंसी के अनुसार, इस भूकंप के कारण सुनामी आने की कोई आशंका नहीं है और फिलहाल किसी भी प्रकार की सुनामी चेतावनी जारी नहीं की गई है। राहत की बात यह है कि समुद्र के जलस्तर में कोई असामान्य बदलाव नहीं देखा गया है। इसके बावजूद, वैज्ञानिकों और प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। एजेंसी का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि भूकंप के बाद दोबारा तेज झटके महसूस किए जाने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है।
क्यों जापान में आते हैं बार-बार भूकंप
जापान दुनिया के उन चुनिंदा देशों में गिना जाता है जो भूकंप के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील हैं। इसका वैज्ञानिक कारण इसका भौगोलिक स्थान है। जापान प्रशांत महासागर के उस सक्रिय क्षेत्र में स्थित है जिसे रिंग ऑफ फायर के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र में कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, जिनके टकराने और खिसकने से जमीन के नीचे ऊर्जा पैदा होती है और धरती हिलने लगती है। यही वजह है कि जापान में छोटे और बड़े भूकंप आना एक सामान्य प्रक्रिया है।
जापान के हालिया बड़े भूकंप
अगर बीते कुछ समय के आंकड़ों पर नजर डालें तो जापान ने कई बड़ी आपदाओं का सामना किया है:
- जनवरी 2024: नोटो प्रायद्वीप में 7.6 तीव्रता का अत्यंत शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसमें 300 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी और भारी संख्या में इमारतें नष्ट हो गई थीं।
- अगस्त 2024: मियाजाकी के निकट 7.1 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे।
- 11 मार्च 2011: यह जापान के इतिहास का एक काला दिन था जब 9.0 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने पूरे देश को हिला दिया था। इसके कारण उठी सुनामी ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचाया और करीब 20,000 लोगों की मौत का कारण बनी थी।
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