झारखंड के ग्रामीण इलाकों का अनोखा स्वाद: मात्र 200 रुपये में 12 लोगों के लिए शानदार नाश्ता जीवनशैली 2 घंटे पहले 5
झारखंड के गांवों में मेहमाननवाजी का अपना निराला अंदाज है, जहां बेहद कम खर्च में स्वादिष्ट और पारंपरिक नाश्ते का इंतजाम हो जाता है। यहाँ के स्थानीय फूड स्टॉल्स पर 200 रुपये के बजट में 10 से 12 लोगों का पेट भर जाता है।

झारखंड के गांवों में मेहमाननवाजी का खास अंदाज

शहरी जीवनशैली में जब घर पर मेहमान आते हैं, तो उनकी आवभगत के लिए काजू की बर्फी, रसमलाई, पेड़े और बाजार के महंगे नमकीन परोसे जाते हैं। लेकिन यदि आप झारखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाएं, तो वहां मेहमानों के स्वागत की एक अलग ही परंपरा देखने को मिलती है। वहां का नाश्ता न केवल स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि अपनी जेब पर भी काफी हल्का पड़ता है। इन गांवों में लगने वाले छोटे-छोटे फूड स्टॉल्स और ठेले मेहमाननवाजी के असली और पारंपरिक अंदाज को जिंदा रखे हुए हैं। यहाँ मिलने वाले पकवानों की वैरायटी और उनकी किफायती कीमतें किसी को भी दंग कर सकती हैं।

कम कीमत में लजीज पकवानों की लंबी फेहरिस्त

इस अद्भुत ग्रामीण स्वाद को करीब से जानने के लिए जब पड़ताल की गई, तो पता चला कि वहां की दुकानों पर नाश्ते के अनेक विकल्प मौजूद हैं। स्थानीय दुकानदार मीरा गोराई ने बताया कि झारखंड के गांवों में जब कोई मेहमान या रिश्तेदार घर आते हैं, तो उनके स्वागत के लिए स्थानीय स्वाद वाले व्यंजनों को प्राथमिकता दी जाती है। उनकी दुकान पर ब्रेड चाप, समोसा, आलू चाप, प्याजी, अंडा चाप और मसाला चना जैसे लोकप्रिय नमकीन आइटम हर वक्त उपलब्ध रहते हैं। इसके अलावा, यहां की खासियत नीम की पत्तियों और प्याज से तैयार किए गए पकौड़े हैं, जिन्हें ग्रामीण लोग बेहद चाव से खाते हैं। इन व्यंजनों की कीमत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि मात्र 20 रुपये में यहां तीन पीस तक नाश्ता मिल जाता है, जिससे आम आदमी का खर्च सीमित रहता है।

परंपरागत मिठाइयों का स्वाद

केवल नमकीन ही नहीं, बल्कि मिठाई के शौकीनों के लिए भी यहां पारंपरिक स्वाद मौजूद है। मीरा गोराई ने बताया कि उनकी दुकान पर लौंग लता, बालूशाही, मीठी नमकीन और शकरपाला जैसे पारंपरिक व्यंजन लगातार तैयार किए जाते हैं। गांव के लोग अक्सर अपने घरों में मेहमानों के आने पर यहां से मिठाई और नमकीन खरीदकर ले जाते हैं, ताकि मेहमाननवाजी में किसी प्रकार की कोई कमी न रहे। ये मिठाइयां न केवल ताजी होती हैं, बल्कि इनका स्वाद भी शहर की मशीनी मिठाइयों से बिल्कुल अलग और शुद्ध होता है।

महंगाई के दौर में किफायती नाश्ता

इस नाश्ते की सबसे बड़ी खूबी इसकी बजट-फ्रेंडली प्रकृति है। मीरा गोराई के अनुसार, अगर किसी के घर 10 से 12 मेहमान आ जाएं, तो लगभग 200 रुपये खर्च करके पूरे परिवार और मेहमानों के लिए भरपेट नाश्ते का इंतजाम किया जा सकता है। यह झारखंड के गांवों की उस परंपरा को दर्शाता है जहां मेहमाननवाजी महंगे उपहारों या मिठाइयों पर नहीं, बल्कि शुद्ध स्थानीय स्वाद और प्रेमपूर्ण व्यवहार पर निर्भर करती है। इतनी कम कीमत में इतने सारे लोगों का आतिथ्य सत्कार करना इस बात का सबूत है कि ग्रामीण भारत आज भी अपनी सरलता और किफायती जीवनशैली के लिए मशहूर है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप