जीवनशैली
एक घंटा पहले
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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में जैसे ही बरसात का मौसम शुरू होता है, वैसे ही लोगों के घरों में चटपटे और गरमा-गरम पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू महकने लगती है। निमाड़ क्षेत्र के खान-पान की अपनी एक अलग ही पहचान है और इस सुहावने मौसम में यहां की रसोई में कई तरह के खास पकवान तैयार किए जाते हैं। इन्हीं लोकप्रिय व्यंजनों में से एक बेहद खास डिश है 'चिकोली', जो अपने अनोखे स्वाद के लिए स्थानीय लोगों के बीच काफी पसंद की जाती है।
स्वाद और सेहत का बेहतरीन संगम
चिकोली न केवल खाने में लाजवाब होती है, बल्कि यह सेहत के लिहाज से भी काफी अच्छी मानी जाती है। इस पारंपरिक व्यंजन को मुख्य रूप से गेहूं के आटे और तुवर की दाल के मेल से तैयार किया जाता है। स्वादिष्ट होने के साथ-साथ यह पचाने में भी आसान होती है और बारिश के मौसम में इसे गरमा-गरम खाने का मजा ही कुछ और है।
चिकोली की कुछ मुख्य खासियतें
- यह डिश गेहूं के आटे और तुवर की दाल के पौष्टिक मेल से बनती है।
- इसे बनाने के लिए किसी भी तरह की बाहरी या महंगी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती है।
- घर की रसोई में आसानी से मिलने वाले साधारण मसालों और चीजों से इसे झटपट तैयार किया जा सकता है।
कम सामग्री में मिनटों में होती है तैयार
इस डिश की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम करने की जरूरत नहीं पड़ती। स्थानीय एक्सपर्ट महिला फूलाबाई ने इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनाने की बेहद आसान विधि साझा की है। उनके अनुसार, बुरहानपुर की यह पारंपरिक डिश बहुत ही कम समय और सीमित सामग्री के साथ घर पर आसानी से तैयार की जा सकती है, जिससे इसका लुत्फ कभी भी उठाया जा सकता है।
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