पश्चिम बंगाल: टीएमसी मुख्यालय पर बागी विधायकों का कब्ज़ा, ताला जड़कर चाबी ले गए और लगाए पोस्टर पश्चिम बंगाल 3 महीने पहले 120
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं ने पार्टी के मुख्य कार्यालय पर धावा बोल दिया है। इन नेताओं ने दफ्तर को ताला लगाकर खुद को असली टीएमसी बताते हुए नए पोस्टर जारी कर दिए हैं।

टीएमसी मुख्यालय पर बागी गुट का धावा

पश्चिम बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य में सत्ता गंवाने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सामने एक नया और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के बागी विधायकों के एक समूह ने मेट्रोपॉलिटन बाइपास रोड स्थित टीएमसी मुख्यालय पर धावा बोल दिया और इमारत पर अपना कब्जा जमा लिया। यह कार्यालय वही जगह है जहाँ से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी जैसे शीर्ष नेता अपनी कार्यप्रणाली संचालित करते थे। पाँच से छह मंजिला इस इमारत में बागी नेताओं ने न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि इसे अपने नियंत्रण में लेने का दावा भी कर दिया है।

ताला लगाकर चाबी ले गए बागी विधायक

घटनाक्रम के अनुसार, शाम को करीब साढ़े छह से सात बजे के बीच अरूप रॉय, ऋतब्रत बनर्जी और फरीद हाकिम समेत कई बागी विधायक अचानक पार्टी मुख्यालय पहुंचे। वहां मौजूद लोगों के अनुसार, ये सभी नेता पहले इमारत के भीतर गए और मुख्य कॉन्फ्रेंस रूम में बैठकर अपनी तस्वीरें भी खिंचवाईं। इसके बाद उन्होंने दफ्तर के दरवाजों पर ताला लगा दिया और अपने साथ चाबियां लेकर बाहर निकल आए। इन बागियों ने दफ्तर के बाहर नए पोस्टर भी चस्पा किए हैं, जिनमें अरूप रॉय को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का नया अध्यक्ष घोषित किया गया है, जबकि ममता बनर्जी को महज एक सलाहकार का दर्जा दिया गया है। ऋतब्रत बनर्जी के गुट का दावा है कि वही असली तृणमूल कांग्रेस हैं और अब पार्टी दफ्तर पर उन्हीं का अधिकार है।

पोस्टर वार और पुलिस की भूमिका पर सवाल

इस हंगामे के दौरान दफ्तर की दीवारों पर दो तरह के पोस्टर नजर आए। एक तरफ ममता बनर्जी का पोस्टर लगा है, तो दूसरी ओर अरूप रॉय के नाम के पोस्टर लगाए गए हैं। बाद में टीएमसी नेता कुणाल घोष और मदन मित्रा वहां पहुंचे और पुलिस को इस मामले की शिकायत दी। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि बागी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर किराए के दफ्तर में अवैध तरीके से घुसपैठ की है। उन्होंने पुलिस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पुलिस इस पूरे मामले में एक बी-टीम की तरह काम कर रही है। कुणाल घोष ने चेतावनी दी कि वे इस अवैध कब्जे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे और जनता के बीच जाकर इन नेताओं की असलियत उजागर करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि ममता बनर्जी की टीएमसी को हथियाना किसी के लिए भी संभव नहीं है।

अगस्त 2027 तक का एग्रीमेंट और कानूनी स्थिति

दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के खेमे ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि उनके पास इस बिल्डिंग के लिए अगस्त 2027 तक का वैध लीज एग्रीमेंट मौजूद है। ममता गुट का कहना है कि इमारत की पहली और दूसरी मंजिल पर अभी भी काम चल रहा है, जहाँ आईटी सेल, यूथ विंग और अन्य विभागों के लोग बैठते हैं। मंगलवार और शनिवार को ये लोग सुबह से शाम तक दफ्तर में मौजूद रहते हैं। ममता खेमे के अनुसार, कानूनी तौर पर पार्टी दफ्तर अभी भी उनके पास है, जिसे व्हाइट वॉश के लिए तैयार किया गया था। बागियों द्वारा किया गया यह कब्जा लीज और एग्रीमेंट के दस्तावेजों का दुरुपयोग है। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन और कानूनी तंत्र इस विवाद को कैसे सुलझाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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