किसानों के लिए कमाई का जरिया: बैकयार्ड में वनराजा मुर्गी पालन से बढ़ेगा मुनाफा बिहार 3 महीने पहले 70
मुर्गी पालन के व्यवसाय में बेहतर मुनाफे की तलाश कर रहे किसानों के लिए वनराजा नस्ल एक शानदार विकल्प साबित हो रही है। कम लागत और बीमारियों से बचाव के चलते यह प्रजाति अंडे और मांस दोनों के लिए बेहद लाभदायक है।

मुर्गी पालन में वनराजा नस्ल की बढ़ती लोकप्रियता

कृषि आधारित व्यवसायों में मुर्गी पालन एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, लेकिन अक्सर किसान इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि कौन सी नस्ल का चुनाव करना सबसे सही रहेगा। बदलते मौसम के अनुकूल ढलने की क्षमता, दाने का खर्च और रखरखाव की चुनौतियां कई बार इस मुनाफे वाले काम को नुकसानदेह बना देती हैं। इन समस्याओं का एक प्रभावी समाधान पशु वैज्ञानिकों ने वनराजा नस्ल के रूप में दिया है। यह नस्ल कम खर्च में अधिक लाभ देने वाली मानी जाती है और विशेष रूप से उन किसानों के लिए उपयुक्त है जो अपने घर के पिछले हिस्से यानी बैकयार्ड में छोटे स्तर पर इसकी शुरुआत करना चाहते हैं।

वनराजा नस्ल की खासियतें और उत्पादन क्षमता

माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के पशु वैज्ञानिक डॉ. जगपाल के अनुसार, वनराजा नस्ल सामान्य देसी मुर्गियों की तुलना में कहीं अधिक उत्पादक है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह देसी मुर्गियों के मुकाबले करीब दो महीने पहले ही अंडे देना शुरू कर देती है। एक स्वस्थ वनराजा मुर्गी से साल भर में लगभग 110 से 140 अंडे तक प्राप्त किए जा सकते हैं। इस नस्ल में बीमारियों का खतरा काफी कम होता है, जिससे किसानों को उनके स्वास्थ्य और इलाज पर होने वाले अनावश्यक खर्च से मुक्ति मिलती है।

मांस और अंडे से दोहरी कमाई

वनराजा नस्ल न केवल अंडों के लिए, बल्कि अपने बेहतरीन मांस के लिए भी बाजार में काफी मांग में रहती है। इसका मांस काफी पौष्टिक माना जाता है और इसमें चर्बी की मात्रा भी कम होती है। इस नस्ल के मुर्गों की वृद्धि दर काफी तीव्र है। मात्र 12 सप्ताह की अवधि में ही एक मुर्गे का वजन 1800 से 2000 ग्राम तक पहुंच जाता है। इस नस्ल को हैदराबाद स्थित डायरेक्टरेट ऑफ पोल्ट्री रिसर्च (DPR) ने विकसित किया है। कत्थई रंग और आकर्षक शारीरिक बनावट वाली यह मुर्गी आसानी से पहचानी जा सकती है।

पालन-पोषण और विकास के चरण

विशेषज्ञों की सलाह है कि खुले स्थान या बैकयार्ड पोल्ट्री के लिए यह नस्ल सबसे बेहतरीन है। जब चूजा जन्म लेता है, तो उसका वजन लगभग 34 से 40 ग्राम होता है। सही देखभाल और पोषण मिलने पर, केवल छह सप्ताह के भीतर ही इसका वजन बढ़कर 700 से 850 ग्राम के बीच हो जाता है। यह मुर्गी करीब पांच महीने की आयु में अंडे देना शुरू कर देती है।

बेहतर परिणाम के लिए कुछ जरूरी सुझाव

वनराजा मुर्गियों से अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • मुर्गियों को हमेशा छायादार और स्वच्छ स्थान पर रखें।
  • आहार में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल से भरपूर संतुलित खुराक दें।
  • नियमित साफ-सफाई से बीमारियों का खतरा शून्य के बराबर हो जाता है।

यदि किसान इन सरल दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं, तो वे कम निवेश में भी इस व्यवसाय से अपनी आय में एक बड़ा इजाफा कर सकते हैं। यह नस्ल विशेषकर उन लोगों के लिए है जो पारंपरिक खेती के साथ-साथ एक अतिरिक्त आय का स्रोत तलाश रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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