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2 घंटे पहले
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कनॉट प्लेस के होटल में बनी रणनीति
गुरुवार को दिल्ली की सियासत का केंद्र कनॉट प्लेस बना रहा। दोपहर के समय विपक्षी दलों के दिग्गज नेताओं ने एक स्थानीय रेस्टोरेंट में लंच के बहाने मुलाकात की और आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की। सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर रखी थी और होटल के बाहर भारी तैनाती थी। मोएट होटल के अंदर विपक्ष के कई प्रमुख चेहरे मौजूद थे। इनमें तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा के साथ-साथ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे शामिल थे। होटल के भीतर जहां रणनीति पर मंथन चल रहा था, वहीं बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़ती जा रही थी। हर कोई यह जानने को उत्सुक था कि पिछले दो दिनों के घटनाक्रम के बाद राहुल गांधी का अगला कदम क्या होगा।
कार्यकर्ताओं का जत्था और राहुल गांधी की बस
लंच बैठक के बाद जब मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, अभिषेक बनर्जी और मनोज झा बाहर निकले, तो यह साफ कर दिया गया कि वे चुनाव आयोग के दफ्तर या जंतर-मंतर की ओर नहीं जाएंगे। इसके बजाय, उन्होंने राजघाट पर शांतिपूर्ण धरने का निर्णय लिया। इस बार प्रदर्शन का तरीका थोड़ा अलग था। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसद एक बस में सवार होकर निकले। हवाई सर्वेक्षण की तस्वीरों में देखा जा सकता था कि बस के आगे-आगे तिरंगा थामे हुए हजारों की संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता चल रहे थे और उनके पीछे नेताओं की बस धीरे-धीरे राजघाट की तरफ बढ़ रही थी।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर टिकी है मांग
कांग्रेस की मुख्य मांग स्पष्ट है, वे ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़े हुए हैं। राहुल गांधी पिछले तीन दिनों से सड़क पर लगातार सक्रिय हैं। प्रदर्शन के पहले दिन 6 अक्टूबर को जब वे पैदल निकले थे, तब पुलिस ने उन्हें रोक लिया था। अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को दोबारा प्रयास करने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। इसी कड़ी में 8 अगस्त को राहुल गांधी ने बस का सहारा लिया और विपक्षी सांसदों के साथ तीन बसों में सवार होकर मिंटो रोड होते हुए राजघाट की ओर रवाना हुए। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता बीजेपी मुख्यालय की ओर जाने वाली सड़क पर मुड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वहां पहले से तैनात दिल्ली पुलिस के सुरक्षा प्रबंधों के कारण वे सफल नहीं हो पाए।
पुरानी यादें और पुलिस की सख्ती
गौरतलब है कि 6 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पुलिस को चकमा देकर आकाशवाणी भवन में आठ घंटे तक धरना दिया था। इस कारण आज भी पुलिस पूरी तरह सतर्क थी कि कहीं नेता अचानक अपना रास्ता न बदल लें। राजघाट पर पहले से ही एनएसयूआई और कांग्रेस के कार्यकर्ता पोस्टर और बैनर के साथ डटे हुए थे और नारेबाजी कर रहे थे। एक तरफ राजघाट पर भीड़ जमा हो रही थी, तो दूसरी तरफ कांग्रेस मुख्यालय के बाहर बीजेपी महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहां भी पुलिस ने महिला और पुरुष सुरक्षा बल तैनात कर रखे थे। बीजेपी की प्रदर्शनकारी राहुल और प्रियंका के खिलाफ नारेबाजी कर रही थीं और तख्तियां लेकर अपना विरोध दर्ज करा रही थीं।
राजघाट पर एक घंटे का समय और समापन
हजारों समर्थकों के काफिले के साथ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे राजघाट स्थित बापू के समाधि स्थल पहुंचे। प्रशासन की ओर से केवल राहुल और खरगे को ही अंदर जाने की अनुमति मिली। वहां पहुंचकर उन्होंने महात्मा गांधी को नमन किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। पुलिस ने विपक्षी नेताओं को राजघाट परिसर में रुकने के लिए सिर्फ एक घंटे की अनुमति दी थी। निर्धारित समय समाप्त होने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वहां से रवाना हो गए। उनके बाद इंडिया गठबंधन के अन्य विपक्षी सांसद भी एक-एक करके वहां से बाहर निकल गए, जिसके साथ ही दिन भर का यह बड़ा प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया।
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