पूर्णिया में आस्था की मिसाल: पति को मिला कोमा से नया जीवन, पत्नी सीने पर कलश रखकर कर रही कठिन साधना धर्म 4 घंटे पहले 2
बिहार के पूर्णिया में दोनों किडनियां खराब होने और कोमा में जाने के बाद डॉक्टरों द्वारा जवाब दिए गए पति की जान बचाने के लिए पत्नी ने मां दुर्गा से मन्नत मांगी थी। पति के पूरी तरह ठीक होने पर अब वह सीने पर कलश रखकर 9 दिनों की कठोर साधना कर रही हैं।

बिहार के पूर्णिया जिले से भक्ति और अटूट विश्वास की एक बेहद अनोखी और भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है। नवरात्रि 2026 के इस पावन पर्व पर जहां हर तरफ मां शक्ति की आराधना की जा रही है, वहीं मरंगा थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 9 स्थित सत्संग विहार के पास रहने वाले एक परिवार ने ईश्वर की असीम कृपा की प्रत्यक्ष मिसाल पेश की है। यहां रहने वाली सुनीता देवी नामक महिला अपने पति की लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपने सीने पर कलश स्थापित करके बेहद कठोर तपस्या कर रही हैं। यह कहानी सिर्फ भक्ति की नहीं, बल्कि मौत के मुंह से लौटकर आए एक पति और उसकी पत्नी के कभी न डिगने वाले विश्वास की है।

गंभीर बीमारी और डॉक्टरों की लाचारी

घटनाक्रम की शुरुआत बीते 2 साल पूर्व हुई थी, जब सुनीता देवी के पति दिनेश प्रसाद सिंह अचानक बेहद गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। उनकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह से काम करना बंद कर चुकी थीं। दिनेश प्रसाद सिंह के इलाज के लिए परिवार उन्हें पूर्णिया के स्थानीय अस्पतालों से लेकर देश के कई बड़े-बड़े राज्यों और नामचीन चिकित्सा संस्थानों में ले गया। परिजनों ने अपने स्तर पर हर संभव प्रयास किया और भारी भागदौड़ की, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए।

स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः दिनेश प्रसाद सिंह कोमा में चले गए। चिकित्सा विशेषज्ञों ने परिवार को स्पष्ट कह दिया था कि अब डॉक्टरी विज्ञान के पास कोई उपाय नहीं बचा है और केवल ईश्वर ही कोई चमत्कार कर सकते हैं। डॉक्टरों ने परिजनों को सलाह दी कि वे भगवान की शरण में जाएं और उनकी सेवा-प्रार्थना करें।

निराशा के बीच जगी उम्मीद की किरण

जब डॉक्टरों ने जवाब दे दिया, तो पूरा परिवार पूरी तरह से निराश और हताश हो चुका था। अस्पताल के आसपास ही मां दुर्गा का एक मंदिर स्थित था। जब परिवार के सामने जीवन का हर रास्ता बंद हो चुका था, तब सुनीता देवी ने अपनी पूरी आस्था और विश्वास के साथ मां दुर्गा के दरबार में माथा टेका। उन्होंने रोते-बिलखते हुए अपने पति के दीर्घायु होने और स्वस्थ जीवन के लिए मां के चरणों में प्रार्थना की।

इसके बाद सुनीता देवी को सपने में एक विशेष संकेत मिला। उन्होंने स्वप्न में देखा कि यदि वह नवरात्रि के दौरान अपने सीने पर कलश रखकर 9 दिनों तक कठिन साधना का संकल्प लेंगी, तो उनके पति पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे। सुनीता देवी ने सपने में ही मां दुर्गा के इस आदेश को सहर्ष स्वीकार कर लिया और मनोकामना पूरी होने पर यह कठोर व्रत करने की हां भर दी।

कोमा से बाहर आए पति, चमत्कार से हैरान हुए लोग

मां दुर्गा के प्रति जताई गई इस अटूट भक्ति का असर जल्द ही देखने को मिला। स्वप्न में संकल्प लेने के कुछ ही दिनों के भीतर दिनेश प्रसाद सिंह कोमा से बाहर आ गए। उनकी स्थिति में धीरे-धीरे अप्रत्याशित सुधार होने लगा और वे पूरी तरह से ठीक होकर अपने घर लौट आए। जो व्यक्ति मौत के मुहाने पर खड़ा था और जिसे डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था, उसका इस तरह पूरी तरह स्वस्थ हो जाना किसी चमत्कार से कम नहीं था।

वचन निभाने के लिए सीने पर रखा कलश

जब पति पूरी तरह ठीक हो गए और सामान्य जीवन जीने लगे, तो सुनीता देवी ने मां दुर्गा को दिया गया अपना वचन पूरा करने का निर्णय लिया। इस बार नवरात्रि के अवसर पर उन्होंने अपने सीने पर कलश स्थापित कर 9 दिनों की कठोर साधना शुरू कर दी।

इस बेहद कठिन तपस्या को शुरू करने से पहले सुनीता देवी ने विशेष तैयारियां की थीं। उन्होंने बातचीत में बताया कि इस शारीरिक पीड़ा और अनुष्ठान की कठोरता को सहन करने के लिए उन्होंने नवरात्रि की शुरुआत से तीन दिन पहले से ही अपने खान-पान पर कड़ा नियंत्रण लागू कर दिया था। उन्होंने अन्न-जल का त्याग और अन्य शारीरिक गतिविधियों से परहेज करते हुए अपने शरीर को इस साधना के योग्य बनाया और फिर नवरात्रि के पहले दिन से ही सीने पर कलश रखकर इस महान संकल्प में लीन हो गईं।

"ईश्वर की कृपा से ही मिला है नया जीवन"

साधना स्थल पर मौजूद उनके पति दिनेश प्रसाद सिंह ने बेहद भावुक होकर बताया कि उनका यह वर्तमान जीवन ईश्वर की ही देन है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की असीम अनुकंपा से ही उन्हें मौत के मुंह से नया जीवनदान मिला है। उन्होंने कहा कि जब विज्ञान और डॉक्टर हार मान चुके थे, तब उनकी पत्नी की प्रार्थना और मां भगवती की कृपा ने उन्हें दूसरा जन्म दिया। इसी आभार और दिए गए वचन को निभाते हुए उनकी पत्नी आज इस कठिन तपस्या में जुटी हुई हैं।

दिनेश प्रसाद सिंह, उनकी पत्नी सुनीता देवी और पूरे परिवार का मानना है कि ईश्वर ही परम सत्य हैं। आज उनका पूरा घर और जीवन भगवान के भरोसे ही सुचारू रूप से चल रहा है। इस घटना ने क्षेत्र के लोगों के बीच भी ईश्वर के प्रति आस्था और भक्ति की भावना को और अधिक मजबूत कर दिया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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