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3 घंटे पहले
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विचारों
पर्यावरण संरक्षण में भारत की ऐतिहासिक भूमिका और वैश्विक नेतृत्व
नई दिल्ली में आयोजित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु संकट को लेकर भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। शनिवार को अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सदियों से प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के मामले में पूरी दुनिया का मार्गदर्शक रहा है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत वर्तमान में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक अनुभवों का उपयोग करके आधुनिक दौर की पर्यावरणीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में तकनीक का लाभ उठाने के लिए प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर NGT का नया मोबाइल ऐप भी पेश किया। यह सम्मेलन ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ विषय पर आयोजित किया गया था। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति हमेशा से गहरा आदर भाव रहा है, और देश इसी जिम्मेदारी के साथ आधुनिक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर रहा है।
विकासशील देशों पर अनुचित दोषारोपण और कार्बन उत्सर्जन की सच्चाई
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर विकासशील देशों का पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि कार्बन उत्सर्जन के मामले में विकासशील देशों को अक्सर गलत तरीके से निशाना बनाया जाता है। कार्यक्रम में उपस्थित ग्लोबल साउथ के देशों के प्रतिनिधियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखा। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि वैश्विक औसत की तुलना में आज भी भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन आधे से भी कम है।
विकसित राष्ट्रों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि अमीर और विकसित देशों में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन का स्तर भारत के मुकाबले 6 गुना अधिक है। उन्होंने वैश्विक मंचों पर भारत द्वारा इस पक्ष को लगातार और दृढ़ता से उठाने की बात कही और देश के प्रत्येक नागरिक से भी पर्यावरण के प्रति इसी संकल्प को अपनाने का आह्वान किया।
नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियां
पिछले एक दशक से अधिक समय में देश के भीतर हुए बदलावों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीते 12 वर्षों के दौरान भारत ने पर्यावरण की रक्षा और सुधार के क्षेत्र में असाधारण सफलताएं हासिल की हैं। देश ने विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा के विकास पर बहुत बड़ा दांव लगाया है, जिसने कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में अत्यंत प्रभावी भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री ने गर्व से उल्लेख किया कि भारत दुनिया के G20 देशों में एकमात्र ऐसा देश है जिसने पेरिस (COP-21) सम्मेलन के दौरान तय किए गए अपने सभी जलवायु लक्ष्यों को निर्धारित समय से पहले ही पूरा कर लिया है। सौर ऊर्जा क्षमता के विस्तार, गैर-जीवाश्म ईंधन के बढ़ते उपयोग और कार्बन उत्सर्जन के मानकों को कम करने के मामले में भारत के बेहतरीन प्रयासों को आज पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है।
दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जुटे दिग्गज
पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी जटिल चुनौतियों पर मंथन करने के लिए आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन दो दिनों तक चलेगा, जो 19 और 20 सितंबर को आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका, सरकारी तंत्र और कानूनी क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है ताकि जलवायु परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर विमर्श किया जा सके।
इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कई महत्वपूर्ण हस्तियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल होने वालों में निम्नलिखित दिग्गज थे:
- भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत
- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव
- अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी
- NGT के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव
सम्मेलन में उपस्थित सभी हितधारकों ने इस बात पर सहमति जताई कि पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
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