छत्तीसगढ़
6 घंटे पहले
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विचारों
आम की खेती और अक्टूबर का महत्व
फलों का राजा कहे जाने वाले आम की खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह किसानों के लिए आय का एक सशक्त जरिया भी साबित हो सकती है। अगर आप भी बागवानी या व्यावसायिक स्तर पर आम के बगीचे लगाने पर विचार कर रहे हैं, तो अक्टूबर का महीना इसके लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मल्हार क्षेत्र में स्थित डीजे वर्मा जैविक कृषि फार्म में किसान यदुनंदन प्रसाद वर्मा आम की विभिन्न उन्नत किस्मों के साथ प्रयोग कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से ग्राफ्टेड यानी कलम से तैयार पौधों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ग्राफ्टेड पौधों का महत्व
यदुनंदन प्रसाद वर्मा के अनुसार, आम के पौधों का चयन करते समय ग्राफ्टेड किस्मों को चुनना अधिक लाभप्रद होता है। पारंपरिक तौर पर बीज से उगाए गए आम के पेड़ों की तुलना में ग्राफ्टेड पौधे बहुत कम समय में फल देना शुरू कर देते हैं। हालांकि, किसान को यह समझना चाहिए कि फलों का उत्पादन पूरी तरह से पौधे की किस्म, उसकी उम्र, मिलने वाली देखभाल और स्थानीय मौसम जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए, रोपाई के तुरंत बाद ही पहले साल में फल मिलने की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती है, लेकिन सही देखभाल से बेहतर परिणाम जरूर मिलते हैं।
स्वीट कटिमन आम की खासियत
फार्म में लगाई गई किस्मों में मियां जाकी और स्वीट कटिमन प्रमुख हैं। स्वीट कटिमन किस्म आम की खेती में एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखी जा रही है, जिसे बारहमासी आम के नाम से भी जाना जाता है। इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर साल में अलग-अलग समय पर फल लग सकते हैं। किसान यदुनंदन प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2024 में लगाया गया स्वीट कटिमन का पौधा वर्तमान में भी फल दे रहा है। हालांकि, स्थानीय जलवायु और देखभाल के आधार पर फल आने की निरंतरता में अंतर हो सकता है। अधिक वर्षा के कारण इस वर्ष कुछ फलों पर हल्के दाग भी देखे गए हैं, फिर भी पौधे में फल लगना इसकी स्वस्थ वृद्धि और भविष्य में बेहतर उत्पादन का सकारात्मक संकेत है।
पौधे लगाने की वैज्ञानिक विधि
आम का पौधा लगाने के लिए सही प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है ताकि पौधा अपनी जड़ों को मजबूती से जमीन में जमा सके:
- जगह का चयन: सबसे पहले एक उपयुक्त स्थान चुनें जहाँ उचित धूप और हवा की आवाजाही हो।
- गड्ढा तैयार करना: मिट्टी की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था को देखते हुए एक उचित आकार का गड्ढा खोदें।
- सावधानीपूर्वक रोपण: पौधे को लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसकी जड़ों को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुँचे।
- मिट्टी को दबाना: पौधा लगाने के बाद उसके चारों ओर की मिट्टी को हल्के हाथों से दबाएं ताकि वह स्थिर रहे।
- सिंचाई: रोपण के तुरंत बाद पर्याप्त पानी दें। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि पौधे के तने के आसपास पानी का जमाव न हो, क्योंकि जलभराव होने से जड़ें सड़ सकती हैं।
कम पानी में आम की खेती और प्रबंधन
यदुनंदन प्रसाद वर्मा का अनुभव बताता है कि आम का पौधा एक बार जब मिट्टी में स्थापित हो जाता है, तो उसे पानी की आवश्यकता को परिस्थितियों के अनुसार प्रबंधित किया जा सकता है। शुरुआती दौर में नियमित सिंचाई अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर भीषण गर्मी के दौरान पौधे को नमी की कमी से बचाना बहुत महत्वपूर्ण होता है। वहीं, बारिश के मौसम में खेत में जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था होना अनिवार्य है। सही किस्म के चयन के साथ-साथ पौधों के बीच की दूरी, समय पर खाद का उपयोग और उनकी नियमित देखरेख ही बेहतर उत्पादन की कुंजी है।
अंतरवर्तीय खेती से अतिरिक्त आमदनी
आम के बागान लगाने के शुरुआती कुछ वर्षों तक पेड़ों के बीच काफी खाली जगह उपलब्ध रहती है। किसान इस जगह का उपयोग अंतरवर्तीय खेती यानी इंटरक्रॉपिंग के लिए कर सकते हैं। किसान अपनी जमीन की स्थिति और पौधों के बीच के अंतराल के अनुसार अन्य मौसमी सब्जियों की खेती कर सकते हैं। इससे आम के पेड़ों के बड़े होकर फल देने योग्य होने तक किसान को अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होती रहती है। हालांकि, इस दौरान यह ध्यान रखना जरूरी है कि सब्जियों और आम के पेड़ों के बीच धूप, पोषक तत्वों और पानी के लिए प्रतिस्पर्धा न हो, अन्यथा दोनों फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
किसानों के लिए विशेष परामर्श
यदुनंदन प्रसाद वर्मा सभी किसानों को प्रेरित करते हैं कि वे अपने खेतों और घरों के पास खाली पड़ी बाड़ियों में आम के पौधे लगाएं। ग्राफ्टेड पौधों की खरीद हमेशा किसी विश्वसनीय नर्सरी से ही करनी चाहिए ताकि किस्म और गुणवत्ता की पुष्टि हो सके। पौधे लगाने के बाद उनकी शुरुआती देखभाल में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरतनी चाहिए। वैज्ञानिक प्रबंधन और सही नियोजन के साथ आम की खेती किसानों के लिए लंबे समय तक फलदायी और लाभकारी विकल्प बनकर उभर सकती है।
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