बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
बिहार की सम्राट सरकार ने राज्य में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण को लेकर एक अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में इससे जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। माना जा रहा है कि इस फैसले से उन जमीन मालिकों और किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनकी भूमि सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं के दायरे में आती है।
दरअसल, राज्य में प्रस्तावित 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में भूमि के क्रय-विक्रय और हस्तांतरण पर पहले से रोक लगी हुई थी। इसी वजह से कई जमीन मालिक अपनी निजी और पारिवारिक आवश्यकताओं के बावजूद जमीन का लेन-देन नहीं कर पा रहे थे। स्थानीय स्तर पर इसका विरोध भी सामने आ रहा था। अब सरकार ने नियमों में आंशिक संशोधन करते हुए जमीन मालिकों को राहत देने का रास्ता खोल दिया है।
क्या है कैबिनेट का नया फैसला?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विशेष परिस्थितियों में जमीन मालिकों को छूट मिलेगी। यदि किसी व्यक्ति को शादी, इलाज, शिक्षा, पारिवारिक संकट या किसी अन्य तात्कालिक वित्तीय आवश्यकता के लिए जमीन बेचने की जरूरत होगी, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऐसा कर सकेगा। सरकार ने इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था को भी स्पष्ट किया है, ताकि जरूरतमंद लोगों को राहत मिल सके और विकास परियोजनाएं भी प्रभावित न हों।
कैबिनेट ने तय किया है कि बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के तहत प्रशासनिक अधिकारियों को भूमि खरीदने के लिए अधिकृत किया जाएगा।
किसानों और जमीन मालिकों को कैसे मिलेगा फायदा?
सरकार का कहना है कि इस फैसले से उन जमीन मालिकों को राहत मिलेगी, जो आर्थिक या पारिवारिक कारणों से अपनी जमीन का उपयोग नहीं कर पा रहे थे। अब वे नियमों के अनुसार अपनी जमीन बेचकर तत्काल वित्तीय जरूरतें पूरी कर सकेंगे। इसके साथ ही निवेश परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध होने से औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
क्यों चर्चा में है सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना?
बिहार सरकार राज्य के विभिन्न हिस्सों में आधुनिक सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, मुंगेर, छपरा, पूर्णिया, सहरसा और सीतामढ़ी में सैटेलाइट टाउनशिप बनाई जाएगी। इसके लिए कई जिलों में भूमि चिह्नित की जा चुकी है।
हालांकि भूमि अधिग्रहण तथा खरीद-बिक्री पर रोक को लेकर किसान और स्थानीय लोग लगातार सवाल उठा रहे थे। अब कैबिनेट के इस निर्णय को सरकार की ओर से राहत देने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे विकास परियोजनाओं और जमीन मालिकों के हितों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
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