पटना में फिल्म देखने का है प्लान? रीक्लाइनर पर लेटकर मूवी देखने से लेकर ऐतिहासिक सिनेमाघरों तक, ये हैं राजधानी के सबसे बेहतरीन थिएटर बिहार 3 महीने पहले 135
पटना में फिल्म प्रेमियों के लिए सिंगल स्क्रीन से लेकर हाई-टेक मल्टीप्लेक्स तक कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। अगर आप दोस्तों या परिवार के साथ फिल्म देखने की योजना बना रहे हैं, तो यहां जानिए शहर के सबसे प्रसिद्ध और आरामदायक सिनेमाघरों के बारे में।

बिहार की राजधानी पटना में सिनेमा का इतिहास बेहद समृद्ध और पुराना रहा है। अगर आप भी पटना में रहते हैं या इस ऐतिहासिक शहर की यात्रा पर हैं और अपने दोस्तों, परिवार या पार्टनर के साथ किसी बेहतरीन फिल्म का आनंद लेना चाहते हैं, तो आपको सही सिनेमा हॉल का चुनाव करना चाहिए। आज के समय में फिल्म देखना केवल बड़े पर्दे पर तस्वीरें देखना नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संपूर्ण अनुभव बन चुका है। बेहतरीन साउंड सिस्टम, आरामदायक सीटें, स्वादिष्ट खाने-पीने के विकल्प और शानदार माहौल किसी भी फिल्म के मजे को दोगुना कर देते हैं।

पटना में सिंगल स्क्रीन थियेटरों के पारंपरिक दौर से लेकर आज के अत्याधुनिक मल्टीप्लेक्स तक का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं पटना के उन चुनिंदा और सबसे प्रसिद्ध सिनेमाघरों के बारे में, जहां आपको फिल्म देखने का सबसे शानदार अनुभव मिलेगा।

एलिफस्टन सिनेमा: इतिहास और आधुनिकता का संगम

जब पटना में सबसे पुराने और ऐतिहासिक सिनेमाघरों की बात आती है, तो सबसे पहला नाम एलिफस्टन सिनेमा का ही लिया जाता है। गांधी मैदान के नजदीक स्थित यह सिनेमाहॉल पिछले कई दशकों से स्थानीय फिल्म प्रेमियों की पहली पसंद बना हुआ है। बेहद दिलचस्प बात यह है कि इसकी शुरुआत वर्ष 1902 में एलिफस्टन बायोस्कोप के रूप में हुई थी। उस शुरुआती दौर में यहां केवल मूक (साइलेंट) फिल्में दिखाई जाती थीं, जिन्हें देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती थी।

समय के बदलते चक्र के साथ इस सिनेमाघर ने खुद को पूरी तरह बदल लिया है। आज के समय में यह प्रसिद्ध सिनेमा हॉल गांधी मैदान के पास बने द प्रीमियर स्क्वायर परिसर का एक बेहद खूबसूरत और आधुनिक हिस्सा बन चुका है। इसी परिसर में बेहद लोकप्रिय मोना 70 एमएम सिनेमाघर भी संचालित होता है। यहां की सबसे अच्छी बात यह है कि अत्याधुनिक सुविधाओं के बावजूद यहां टिकटों की कीमतें काफी सामान्य और आम जनता के बजट में रहती हैं।

रीजेंट थिएटर: आज भी कायम है पुराना जादू

गांधी मैदान के ही पास स्थित रीजेंट थिएटर भी पटना के सबसे पुराने, प्रतिष्ठित और लोकप्रिय सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में गिना जाता है। यह थिएटर अपनी विशालकाय स्क्रीन और लंबे समय से चली आ रही समृद्ध फिल्मी विरासत के लिए आज भी चर्चा में रहता है। एक जमाना था जब यहां किसी नई फिल्म के रिलीज होने पर टिकट खिड़की पर सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें लग जाती थीं।

आज के इस डिजिटल और मल्टीप्लेक्स के दौर में भी रीजेंट थिएटर ने अपना पुराना आकर्षण खोया नहीं है। आज भी जब कोई बड़ी फिल्म रिलीज होती है, तो लोग यहां टिकट के लिए कतारों में खड़े दिखाई देते हैं। इस थियेटर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दर्शकों को बेहद कम खर्च में बिल्कुल मल्टीप्लेक्स जैसा शानदार अनुभव प्रदान करता है। यही वजह है कि यहां समाज के हर वर्ग के लोग, चाहे वे छात्र हों, कामकाजी लोग हों या परिवार, फिल्म का लुत्फ उठाने बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

सिनेपोलिस: पटना के मल्टीप्लेक्स युग की शुरुआत

अगर आप प्रीमियम और लग्जरी सिनेमाई अनुभव की तलाश में हैं, तो सिनेपोलिस आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक है। पटना के सुप्रसिद्ध पी एंड एम मॉल में स्थित इस मल्टीप्लेक्स को पटना का पहला मल्टीप्लेक्स होने का ऐतिहासिक गौरव प्राप्त है। इसकी शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी, जिसने पटना के लोगों के फिल्म देखने के नजरिए और संस्कृति को हमेशा के लिए बदल दिया।

सिनेपोलिस में एक साथ कई अलग-अलग स्क्रीनों पर हॉलीवुड, बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा की फिल्में दिखाई जाती हैं। इस मल्टीप्लेक्स की बेहद आरामदायक सीटें, आसान ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा, शानदार फूड कोर्ट और विश्वस्तरीय तकनीक इसे परिवारों और आज के युवाओं के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय बनाती है।

वीणा थिएटर: पुरानी यादें और भोजपुरी फिल्मों का अड्डा

पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन के बिल्कुल नजदीक स्थित वीणा थिएटर शहर के सबसे पुराने और ऐतिहासिक सिनेमाघरों की सूची में प्रमुख स्थान रखता है। एक समय ऐसा था जब वीणा थिएटर पटना का सबसे बड़ा मनोरंजन केंद्र माना जाता था और स्टेशन रोड के पूरे इलाके की रौनक इसी सिनेमाघर से हुआ करती थी। नई फिल्मों की रिलीज के समय यहां का माहौल देखने लायक होता था। हालांकि, समय बीतने के साथ इस थियेटर की चमक थोड़ी फीकी पड़ी है और वर्तमान में इसकी स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है। आज के समय में यहां ज्यादातर भोजपुरी भाषा की फिल्में ही दिखाई जाती हैं। इसके बावजूद, पुराने दौर के सिनेमा प्रेमियों और स्टेशन के आस-पास रहने वाले लोगों के लिए यह आज भी एक खास पहचान रखता है।

अशोक आईनॉक्स: आधुनिक तकनीक के साथ नया अवतार

बुद्ध मार्ग पर स्थित अशोक सिनेमा को कौन नहीं जानता? यह पटना का एक ऐसा ऐतिहासिक सिनेमाघर है, जिसकी पहचान इतनी मजबूत है कि यह आज एक बड़ा लैंडमार्क बन चुका है। पटना में ऑटो वाले आज भी सवारियों को बुलाने के लिए 'अशोक सिनेमा' चिल्लाते हैं। समय की मांग को देखते हुए इस पुराने सिनेमाघर को पूरी तरह से नया और अत्याधुनिक रूप देकर अब अशोक आईनॉक्स में तब्दील कर दिया गया है।

नया रूप मिलने के बाद यहां दर्शकों को अत्याधुनिक डिजिटल प्रोजेक्शन सिस्टम, बेहद आरामदायक और आधुनिक सीटें और बेहतरीन साउंड क्वालिटी का अनुभव मिलता है। शहर के बिल्कुल बीचोबीच स्थित होने के कारण यहां फिल्म देखने के लिए कॉलेज जाने वाले युवाओं और परिवारों की बहुत बड़ी भीड़ उमड़ती है। यहां लगातार नई हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्में प्रदर्शित की जाती हैं।

कॉम्प्लेक्स स्मार्ट थिएटर: रिक्लाइनर पर लेटकर फिल्म देखने का नया कॉन्सेप्ट

पटना के पारंपरिक सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों और बड़े-बड़े मॉल वाले मल्टीप्लेक्सों के बीच एक नए और अनूठे कॉन्सेप्ट के साथ कॉम्प्लेक्स स्मार्ट थिएटर सिनेमा ने अपनी एक खास जगह बनाई है। इस नए जमाने के सिनेमाघर की शुरुआत एस. पी. वर्मा रोड पर स्थित कॉम्प्लेक्स भवन में की गई थी।

इस थिएटर की खासियत यह है कि यहां दर्शकों के लिए कम सीटों वाले छोटे लेकिन बेहद आधुनिक और प्रीमियम ऑडिटोरियम बनाए गए हैं। यहां सबसे बड़ी यूएसपी इसकी आलीशान रिक्लाइनर सीटें हैं, जहां आप बिल्कुल आराम से लेटकर फिल्म देखने का एक नया और शानदार अनुभव ले सकते हैं। इसके साथ ही यहां बेहतरीन डिजिटल प्रोजेक्शन और साउंड सिस्टम की सुविधा दी गई है।

पटना के लोगों को यह अनोखा कॉन्सेप्ट इतना पसंद आया कि आज यह बेहद लोकप्रिय हो चुका है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए अब कॉम्प्लेक्स स्मार्ट थिएटर पटना के अन्य प्रमुख इलाकों जैसे कंकड़बाग, राजाबाजार, फुलवारीशरीफ और बिहटा में भी अपनी सेवाएं दे रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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