कूल्हे में पनपा 8 किलो का कैंसर ट्यूमर, पटना के डॉ. करुणेश की सर्जरी से मिली नई जिंदगी बिहार एक घंटा पहले 2
समस्तीपुर की एक महिला के कूल्हे में करीब 8 किलो वजनी कैंसर ट्यूमर को पटना के डॉक्टरों ने साढ़े पांच घंटे की जटिल सर्जरी में सफलतापूर्वक निकाल दिया और उसका पैर भी सुरक्षित रखा। ऑपरेशन के अगले ही दिन मरीज बैठने और खड़ी होने लगी।

राजधानी पटना में चिकित्सा के क्षेत्र में एक बार फिर उल्लेखनीय कामयाबी सामने आई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने आधुनिक तकनीक के सहारे एक ऐसे ऑपरेशन को अंजाम दिया, जो देखने में लगभग असंभव लग रहा था, और मरीज को नई जिंदगी दी। समस्तीपुर की रहने वाली एक महिला के कूल्हे में लगभग 8 किलो वजन का कैंसरयुक्त ट्यूमर पनप चुका था। यह गांठ इतनी बड़ी हो गई थी कि कूल्हे की मांसपेशियों के साथ-साथ कूल्हे के ऊपरी हिस्से तक फैल गई थी। मामला इसलिए और पेचीदा था क्योंकि कैंसरग्रस्त भाग को निकालने के साथ ही मरीज के पैर को बचाना और उसे दोबारा चलने-फिरने योग्य बनाना भी बड़ी चुनौती थी।

साढ़े पांच घंटे चली जटिल सर्जरी

पटना के कंकड़बाग स्थित मौर्या सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में बोन ट्यूमर विशेषज्ञ डॉ. करुणेश रंजन ने अपनी कुशलता से इस कठिन काम को संभव कर दिखाया। उनके नेतृत्व में करीब साढ़े पांच घंटे तक चली इस मुश्किल सर्जरी के बाद ट्यूमर को पूरी तरह बाहर निकाल दिया गया। सबसे राहत भरी बात यह रही कि ऑपरेशन के अगले ही दिन मरीज बैठने और खड़ी होने लगी।

हड्डियों और मांसपेशियों तक फैल चुका था कैंसर

डॉ. करुणेश रंजन ने बताया कि मरीज को सार्कोमा नामक कैंसर था, जो हड्डी और उसके आसपास के हिस्से को प्रभावित कर रहा था। इस ट्यूमर का वजन करीब 8 किलो था और यह कूल्हे की मांसपेशियों के साथ ऊपरी हिस्सों तक पहुंच चुका था। उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसे मामलों में मरीज का पैर बचा पाना बेहद कठिन होता है, लेकिन इस बार कैंसरग्रस्त भाग को हटाते हुए पैर को सुरक्षित रखने में सफलता मिली।

हड्डी निकालकर किया गया पुनर्निर्माण

सर्जरी के दौरान सबसे पहले कैंसर से प्रभावित कूल्हे की हड्डी को हटाया गया। इसके बाद बचे हुए हिस्से का पुनर्निर्माण प्लेट और बोन सीमेंट की मदद से किया गया। ऑपरेशन में जिन मांसपेशियों को निकालना पड़ा, उन्हें फाइबर टेप की सहायता से दोबारा जोड़ा गया, ताकि मरीज की चलने-फिरने की क्षमता पर असर न पड़े।

डॉ. करुणेश रंजन के मुताबिक, बोन ट्यूमर की सर्जरी में केवल कैंसर को निकाल देना ही काफी नहीं होता, बल्कि इलाज इस तरह करना होता है कि मरीज सामान्य जीवन जी सके और बिना दिक्कत चल-फिर सके। यही कारण है कि इस प्रकार की सर्जरी को बेहद जटिल माना जाता है।

उम्मीद से बेहतर रही रिकवरी

ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी उम्मीद से कहीं अच्छी रही। सर्जरी के अगले दिन ही वह बैठने और खड़ी होने लगी। डॉक्टर के अनुसार यह इस बात का संकेत है कि सर्जरी के दौरान किया गया पुनर्निर्माण प्रभावी ढंग से काम कर रहा है।

कैसे करें बोन ट्यूमर की पहचान

डॉ. करुणेश रंजन ने बताया कि आम लोगों के लिए हड्डी के ट्यूमर को पहचान पाना आसान नहीं होता। कई बार लोग इसे सामान्य चोट या मामूली संक्रमण समझकर अनदेखा कर देते हैं और बिना किसी जांच के दर्द की दवाएं लेने लगते हैं। इससे बीमारी का सही समय पर पता नहीं चल पाता और हालत गंभीर हो सकती है।

उन्होंने सलाह दी कि अगर शरीर की किसी हड्डी में अचानक गांठ महसूस हो, वह गांठ कठोर हो, बिना दर्द के लगातार बढ़ रही हो, या किसी हड्डी में लंबे समय से बिना वजह दर्द बना रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे हालात में जल्द से जल्द विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। अगर विशेषज्ञ उपलब्ध न हों तो स्थानीय डॉक्टर से जांच जरूर करा लेनी चाहिए, ताकि समय रहते बीमारी पकड़ में आ सके।

समय पर जांच से बच सकती है जान

डॉक्टर का कहना है कि बोन ट्यूमर के कई मामलों में शुरुआती लक्षण बेहद सामान्य प्रतीत होते हैं, इसलिए लोग अक्सर इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन समय पर जांच और उपचार से न सिर्फ कैंसर का बेहतर इलाज संभव है, बल्कि मरीज के अंगों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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