बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर पर बरसे मतदाता, बोले- भाड़े की भीड़ के साथ घूम रहे पीके, जमानत बचना नामुमकिन बिहार एक महीने पहले 54
पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में सियासी सरगर्मी तेज है। क्षेत्र के मतदाताओं का कहना है कि प्रशांत किशोर के साथ बाहरी लोगों की भीड़ है और इस बार भी यहां भारतीय जनता पार्टी की ही बड़ी जीत होगी।

बांकीपुर में उपचुनाव की गहमागहमी

राजधानी पटना की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर सियासी तापमान अपने चरम पर है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है। एक तरफ जन सुराज के मुखिया प्रशांत किशोर मैदान में अपनी ताल ठोक रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में लगभग 200 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। वहीं दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने बूथ स्तर पर काम करने वाले जमीनी नेता नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। राष्ट्रीय जनता दल ने भी रेखा गुप्ता के रूप में अपनी दावेदारी पेश की है। सभी बड़े उम्मीदवार दिन में 14 से 15 घंटे तक मतदाताओं के बीच पसीना बहा रहे हैं।

भाजपा का गढ़ बना हुआ है बांकीपुर

क्षेत्र की गलियों और चाय की दुकानों पर आम जनता के बीच चुनाव को लेकर स्पष्ट राय देखी जा सकती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बांकीपुर लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का सुरक्षित किला रहा है। मतदाताओं के एक वर्ग ने विश्वास जताया कि इस बार भी परिणाम भाजपा के पक्ष में ही जाएंगे। चाय की चुस्कियों के बीच चर्चा करते हुए कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर का प्रचार अभियान केवल दिखावटी है। उनके काफिले में चलने वाले अधिकतर लोग स्थानीय नहीं हैं, बल्कि उन्हें बाहर से भाड़े पर बुलाकर भीड़ जुटाने का खेल खेला जा रहा है। लोगों का स्पष्ट दावा है कि प्रशांत किशोर के लिए इस बार बांकीपुर में अपनी जमानत बचाना भी एक बड़ी चुनौती साबित होगी।

जनता का भरोसा नहीं जीत पा रहे प्रशांत किशोर

अशोक कुमार नामक एक मतदाता का कहना है कि बांकीपुर के लोग समझदार हैं और किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले कई चुनावों की तरह इस बार भी भाजपा प्रत्याशी को ही जीत मिलेगी, और यह जीत पिछली बार के अंतर से भी अधिक बड़ी हो सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि केंद्र और बिहार में डबल इंजन की सरकार होने के कारण विकास की गति बरकरार है। प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के अन्य हिस्सों में पहले भी उन्हें जनता ने पूरी तरह नकार दिया था। बांकीपुर में भी उनकी रणनीति काम नहीं आएगी और उनकी जमानत जब्त होना तय है। उन्होंने पीके के वादों को 'लॉलीपॉप' करार दिया।

चुनावी राजनीति और प्रशांत किशोर की छवि

अरविंद कुमार का मानना है कि प्रशांत किशोर का नाम भले ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो, लेकिन जमीनी राजनीति में उन्हें बिहार में आज तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। वे हाई-प्रोफाइल तरीके से चुनाव लड़ते और लड़वाते जरूर हैं, लेकिन बिहार के मतदाता जमीन से जुड़े मुद्दों पर वोट करते हैं। अरविंद ने कहा कि पीके अक्सर यह दावा करते हैं कि उन्होंने कई बड़े नेताओं को जिताने में भूमिका निभाई है, लेकिन जब खुद चुनावी मैदान में उतरने की बारी आती है, तो उन्हें हार का सामना करना पड़ता है। चुनावी विश्लेषक के रूप में उनकी चर्चा जितनी होती है, चुनावी नतीजों में उसका असर रत्ती भर भी नहीं दिखता।

क्या मैदान छोड़कर भाग जाएंगे पीके?

अरविंद ने आगे यह भी आशंका जताई कि क्या प्रशांत किशोर मतदान से पहले खुद ही चुनावी मैदान से हट जाएंगे। उन्होंने कहा कि 200 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक होने के बावजूद अगर उन्हें बांकीपुर में मामूली वोट मिलते हैं, तो यह उनकी राजनीतिक छवि के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। उनके अनुसार, प्रशांत किशोर के नाम और कद के हिसाब से यह स्थिति उनके लिए शर्मनाक होगी, इसलिए उन्हें चुनाव लड़ने का निर्णय फिर से सोचना चाहिए था।

आम चुनाव के बाद से नहीं बदली तस्वीर

अविनाश कुमार के मुताबिक, बांकीपुर से प्रशांत किशोर की हार निश्चित है। वह दूसरे या तीसरे स्थान पर रहेंगे, यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि आम चुनाव के दौरान बिहार की जनता ने प्रशांत किशोर को पूरी तरह खारिज कर दिया था। पिछले 8 महीने के अंतराल के बाद भी जनमत में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है। यदि जनता को उनकी कार्यशैली और बातों पर जरा भी भरोसा होता, तो आम चुनाव में उन्हें परिणाम देखने को मिलते, लेकिन उन्हें पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया था।

भाड़े के लोगों का आरोप

एसके भारद्वाज ने कड़े शब्दों में कहा कि बांकीपुर की जनता को ठगा नहीं जा सकता। उन्होंने दावा किया कि प्रशांत किशोर जिस काफिले और भीड़ के साथ क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं, उसमें अधिकांश लोग किराए पर लाए गए बाहरी व्यक्ति हैं। इस प्रकार की दिखावटी भीड़ से जनता का मन नहीं बदला जा सकता। उन्होंने दोहराया कि बांकीपुर की जनता ने मन बना लिया है कि इस बार भी भाजपा को प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल होगी और प्रशांत किशोर अपनी जमानत राशि खो देंगे। स्थानीय लोगों के इस आक्रोश से यह स्पष्ट है कि बांकीपुर में बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा इस चुनाव में काफी हावी होने वाला है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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