हरियाणा
3 घंटे पहले
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अस्पताल की बड़ी लापरवाही का मामला
हरियाणा के पानीपत में स्थित पार्क अस्पताल में चिकित्सा क्षेत्र की एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाली लापरवाही सामने आई है। अस्पताल में भर्ती हुई एक महिला मरीज गुड्डी देवी के साथ जो हुआ, उसने सभी को सकते में डाल दिया है। महिला अपने पैर की हड्डी की समस्या का इलाज करवाने के लिए अस्पताल पहुंची थी, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने गलत प्रक्रिया अपनाते हुए उसके दिल का ऑपरेशन कर दिया, जिसमें स्टेंट यानी छल्ला डाला गया। इस पूरी प्रक्रिया के बाद महिला की मौत हो गई, जिससे हड़कंप मच गया है।
प्रबंधन ने स्वीकार की प्रशासनिक चूक
इस पूरे मामले पर सोमवार को पार्क अस्पताल प्रबंधन ने मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखा। प्रेस वार्ता के दौरान अस्पताल ने अपनी प्रशासनिक स्तर पर हुई गलतियों को स्वीकार किया है। प्रबंधन ने माना कि मरीज के सहमति फॉर्म यानी कंसेंट फॉर्म में हस्ताक्षर वाले कॉलम को लेकर लापरवाही बरती गई। अस्पताल ने स्वीकार किया कि उस फॉर्म पर परिजनों का नाम अस्पताल के ही कर्मचारियों ने अपनी तरफ से लिख दिया था। प्रबंधन ने इसे अपने स्टाफ की एक बड़ी प्रशासनिक चूक के रूप में पेश किया है।
सहमति को लेकर अस्पताल का अपना तर्क
अपनी सफाई में पार्क अस्पताल प्रशासन ने दावा किया है कि मरीज को दिल की बीमारी के बारे में पहले ही अवगत करा दिया गया था। प्रबंधन का कहना है कि जब उन्होंने परिजनों को दिल में स्टेंट डालने की बात कही, तो शुरुआत में उन्होंने इसके लिए मना कर दिया था। अस्पताल के अनुसार, उन्होंने बाद में परिजनों को बीमारी की गंभीरता के बारे में विस्तार से समझाया। अस्पताल का दावा है कि उन्होंने महिला के बेटे से फोन पर बातचीत की थी और उनकी मौखिक सहमति मिलने के बाद ही दिल में स्टेंट डालने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया था।
परिजनों पर लगाए गंभीर आरोप
जहाँ एक तरफ अस्पताल ने अपनी गलती मानी है, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने मृतक महिला के परिजनों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रबंधन का आरोप है कि महिला की मृत्यु के बाद उसके परिवार वालों ने अस्पताल से बड़ी धनराशि की मांग की थी। अस्पताल का दावा है कि उनकी मांग पूरी न होने के कारण परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और उनके खिलाफ पुलिस केस दर्ज करवाया।
एफआईआर को बताया नियम विरुद्ध
पार्क अस्पताल प्रबंधन ने अपने खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को पूरी तरह से गलत और नियमों के विरुद्ध बताया है। इस मामले में उन्होंने पानीपत के एसपी भूपेंद्र सिंह को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने मुकदमा रद्द करने की मांग की है। अस्पताल का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और चिकित्सा नियमों के अनुसार, किसी अस्पताल या डॉक्टर के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना है कि पहले मेडिकल बोर्ड द्वारा मामले की गहन जांच होनी चाहिए और यदि बोर्ड की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तब ही कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। अस्पताल का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का इंतजार किए जल्दबाजी में यह मामला दर्ज किया है।
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