राजस्थान
एक घंटा पहले
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विचारों
वीरता की नई परिभाषा लिख रही बेटियां
इतिहास में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य की कहानियां हम सभी ने पढ़ी हैं, लेकिन राजस्थान के पाली में यह नजारा हकीकत में देखने को मिल रहा है। पाली के लाखोटिया गार्डन रोड स्थित आर्य वीर दल में चल रहे एक विशेष शिविर में नन्हीं बेटियां पूरी निडरता के साथ तलवारें चला रही हैं। हालांकि ये कोई पेशेवर योद्धा नहीं हैं, लेकिन इनका साहस और कौशल किसी कुशल योद्धा से कम नहीं है। सुबह के समय गूंजती तलवारों की खनक और लाठियों की आवाज यहां के माहौल को पूरी तरह बदल देती है।
शिविर में खास आकर्षण
इस शिविर में बच्चों की ऊर्जा और अनुशासन वाकई हैरान करने वाला है। यहां प्रमुख आकर्षण निम्नलिखित हैं:
- 8 वर्षीय सिद्धार्थ का दोनों हाथों से तलवार चलाने का हुनर और 5 फीट ऊंचाई पर लाठी चलाने का साहसिक प्रदर्शन।
- 3 साल की एक नन्हीं बच्ची द्वारा योगाभ्यास में दिखाया गया गजब का समर्पण।
- 6 से 16 वर्ष के बच्चों द्वारा लाठी और तलवारबाजी में दिखाई जा रही दक्षता।
विशेषज्ञों की देखरेख में चरित्र निर्माण
आर्य वीर दल के अध्यक्ष दिलीप परिहार के अनुसार, यह शिविर बच्चों में आत्मविश्वास जगाने और उनके चरित्र निर्माण के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
- शिविर की शुरुआत 12 जून को हुई और यह 27 जून तक चलेगा।
- प्रशिक्षण का समय सुबह 5:30 बजे से 8:00 बजे तक और शाम को 5:00 बजे से 8:00 बजे तक है।
- वर्तमान में 105 से अधिक बच्चे यहां कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।
- उदयपुर से आए विशेषज्ञ प्रशिक्षक जीवनलाल आर्य बच्चों को योगाभ्यास, जूडो और कठिन शारीरिक कौशल सिखा रहे हैं।
अभिभावकों का भी मिल रहा साथ
यह प्रशिक्षण शिविर केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अभिभावकों की मेहनत का भी गवाह है। उतवण गांव के रहने वाले श्यामलाल अपने बेटे सचिन को इस हुनर में निपुण बनाने के लिए रोज सुबह 4 बजे उठकर बाइक से पाली आते हैं। श्यामलाल का कहना है कि वे बेटे के उज्जवल भविष्य के लिए यह सफर तय कर रहे हैं, और जब तक बच्चा प्रशिक्षण लेता है, वे स्वयं भी पार्क में व्यायाम कर फिट रहने की कोशिश करते हैं।
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