पलामू के 'ट्री मैन' डॉ. कौशल किशोर जायसवाल को नेपाल में मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान झारखंड 3 महीने पहले 123
झारखंड के पलामू जिले के रहने वाले पर्यावरणविद् डॉ. कौशल किशोर जायसवाल को नेपाल में 'प्राइड ऑफ एशिया अचीवर समिट अवार्ड' से नवाजा गया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के विषयों पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है।

नेपाल में भारत का मान बढ़ाते हुए डॉ. कौशल का हुआ सम्मान

पलामू के विख्यात पर्यावरणविद् डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और अपने गृह जिले का नाम गौरवान्वित किया है। हाल ही में उन्होंने पांच दिनों के नेपाल दौरे के दौरान पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विषयों पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश का प्रतिनिधित्व किया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उन्हें पर्यावरण के प्रति उनके समर्पित और सराहनीय कार्यों के लिए 'प्राइड ऑफ एशिया अचीवर समिट अवार्ड' से सम्मानित किया गया। यह उनके करियर का 85वां सम्मान है, जिसमें कुल 11 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी शामिल हैं।

सम्मेलन की भव्य शुरुआत और आयोजन

नेपाल के पोखरा और काठमांडू में स्थित ललितपुर के हेरिटेज गार्डन में तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन का आगाज काफी गरिमामय रहा। कार्यक्रम की शुरुआत भारत और नेपाल के राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद कन्या पूजन, पर्यावरण धर्म की विशेष प्रार्थना और सामूहिक पौधारोपण के साथ आयोजन को आगे बढ़ाया गया। इस पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व नेपाल के केंद्रीय सहकारी अध्यक्ष सरोज कुमार शर्मा और कुलेश्वर विद्यालय के प्राचार्य मेघराज दुला द्वारा किया गया था। इस सम्मेलन के दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित डॉ. कौशल ने वहां मौजूद सभी लोगों को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की शपथ दिलाई। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि प्रकृति का संरक्षण करना ही मानव जीवन का सबसे प्राथमिक और महत्वपूर्ण दायित्व है।

वन राखी मूवमेंट और वृक्षों के साथ अनोखा जुड़ाव

इस अवसर पर डॉ. कौशल ने वन राखी मूवमेंट की स्वर्ण जयंती और अपने द्वारा पौधारोपण के 60 वर्ष पूरे होने की खुशी को साझा किया। उन्होंने वहां मौजूद छात्राओं के साथ मिलकर पुराने वृक्षों पर रक्षासूत्र बांधा। यह क्षण बेहद भावुक और खास था, क्योंकि जिन वृक्षों पर रक्षासूत्र बांधे गए, उनमें से कई पौधे उन्होंने स्वयं वर्ष 1980 में लगाए थे। उन्होंने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि कन्या पूजन धरती की रक्षा का प्रतीक है और पौधा पूजन पूरे ब्रह्मांड के संरक्षण का प्रतीक है। उन्होंने हर व्यक्ति से आग्रह किया कि वे अपने धार्मिक कर्तव्यों के साथ-साथ पर्यावरण धर्म को भी अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।

पर्यावरण संरक्षण को बनाया जीवन का मिशन

पिछले कई दशकों से डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने पर्यावरण सुरक्षा को ही अपने जीवन का एकमात्र मिशन बना लिया है। लाखों की संख्या में पौधे लगाने से लेकर वन राखी अभियान को एक बड़े जन-आंदोलन में बदलने तक, उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करने और पर्यावरण धर्म की अवधारणा को वैश्विक स्तर पर ले जाने में उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। उन्होंने विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से हजारों लोगों को पौधारोपण के लिए प्रोत्साहित किया है। उनके निरंतर प्रयासों के कारण ही पर्यावरण संरक्षण आज एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है।

प्रदूषण को माना मानव जाति का सबसे बड़ा संकट

इस सम्मेलन के दौरान डॉ. कौशल ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रदूषण पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा दुश्मन बनकर उभरा है। इसी प्रदूषण की वजह से जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएं विकराल रूप ले रही हैं। यदि हमें मानव जाति को इस संकट से सुरक्षित बचाना है, तो पर्यावरण संरक्षण को हर इंसान को अपनी दिनचर्या और संस्कारों में शामिल करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सूर्य, जल, वृक्ष और प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना करना भी असंभव है। इसलिए, इनकी सुरक्षा करना अब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बन गई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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