पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच नया सैन्य गठबंधन, 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' हुआ लागू विश्व एक घंटा पहले 4
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक बड़ा रक्षा समझौता किया है, जिसके तहत किसी एक देश पर हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा। यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

सामूहिक सुरक्षा का नया अध्याय

पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरणों और बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक सैन्य समझौते को अंजाम दिया है। शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इन तीनों देशों ने मिलकर मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण शर्त यह है कि यदि इन तीनों में से किसी भी राष्ट्र पर कोई बाहरी सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों के खिलाफ साझा आक्रमण माना जाएगा और तीनों देश मिलकर इसका जवाब देंगे।

इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर मक्का स्थित अल-सफा पैलेस में संपन्न हुए। इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन उपस्थित थे। इन नेताओं ने आपसी चर्चा के बाद इस सुरक्षा ढांचे को अंतिम रूप दिया।

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का मुख्य उद्देश्य

इस त्रिपक्षीय गठबंधन का प्राथमिक लक्ष्य क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा को अभेद्य बनाना है। आधिकारिक बयानों के मुताबिक, समझौते का उद्देश्य किसी भी आक्रामक सैन्य कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना है। इसमें रक्षा सहयोग के हर उस पहलू को शामिल किया गया है जो तीनों देशों की रक्षा क्षमताओं को और अधिक आधुनिक और सशक्त बना सके।

यह निर्णय ऐसे संवेदनशील समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष की स्थिति लगातार बनी हुई है। विशेष रूप से लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट जैसे इलाकों में बढ़ती अस्थिरता ने खाड़ी देशों को सुरक्षा के मोर्चे पर एक साथ आने के लिए मजबूर किया है। इस समझौते के माध्यम से तीनों देश न केवल अपनी सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना चाहते हैं, बल्कि क्षेत्र के भीतर और बाहर शांति तथा स्थिरता को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहरा रहे हैं ताकि एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण हो सके।

सऊदी अरब और पाकिस्तान की पुरानी रणनीतिक साझेदारी

यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सुरक्षा के मामले में इतनी गहराई से कदम मिलाया है। इससे पहले बीते वर्ष सितंबर के महीने में दोनों देशों ने एक स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (रणनीतिक आपसी रक्षा समझौता) किया था। उस समझौते में भी यही प्रावधान था कि किसी एक पर हुआ हमला दोनों देशों पर आक्रामकता माना जाएगा। उस पुराने समझौते के तहत पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने सैनिकों और लड़ाकू विमानों की तैनाती की थी, साथ ही संयुक्त सैन्य अभ्यास को भी बढ़ावा दिया था।

नया मक्का समझौता इन दोनों देशों के बीच पहले से चले आ रहे ऐतिहासिक और भाईचारे के संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाता है। यह इस्लामी एकजुटता और साझा रणनीतिक हितों पर आधारित है, जो लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को और व्यापक बनाता है।

उच्च स्तरीय बैठक और राजनयिक महत्व

शुक्रवार की बैठक में तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने आपसी संबंधों की समीक्षा की और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि पाकिस्तान के रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी तीन दिनों की आधिकारिक यात्रा पर वहां मौजूद थे। प्रधानमंत्री के साथ इस दौरे पर उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार तथा रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल थे।

हालांकि जानकार इस यात्रा को क्षेत्र में जारी तनाव से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन विदेश कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते का महत्व तात्कालिक संकटों से कहीं ज्यादा गहरा है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन देशों के आपसी तालमेल और रणनीतिक सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाएगी।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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