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एक घंटा पहले
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चीन के अरबों डॉलर के सपनों पर बलोच विद्रोही
बलूचिस्तान की धरती पर पाकिस्तानी सेना को करारी शिकस्त देने और खुद को स्वतंत्र घोषित करने के बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी BLA का रुख अब पूरी तरह से चीन की ओर मुड़ गया है। चीन के अरबों डॉलर के आर्थिक सपनों को चकनाचूर करने के लिए बलोच लड़ाकों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। केच जिले के क्लातुक इलाके से छह मजदूरों का अपहरण और उसके बाद उनकी गोलियों से छलनी लाशें मिलना इस बात का प्रमाण है कि BLA अब उन सभी लोगों को बलूचिस्तान से बाहर करने की योजना बना रही है जो चीन के प्रोजेक्ट्स में इंजीनियर, ठेकेदार या मजदूर के तौर पर जुड़े हैं।
पाकिस्तानी सत्ता और सेना के लिए बड़ा संकट
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे धकेलने के बाद बलोच लड़ाकों ने आसिम मुनीर की सेना को भारी नुकसान पहुंचाया है। पाकिस्तानी सेना की विफलता के कारण वहां के आला अधिकारी और शहबाज शरीफ की सरकार भारी बदनामी का सामना कर रहे हैं। बलोच लड़ाकों के इस नए तेवर से पाकिस्तान को मिलने वाली चीन की आर्थिक मदद पर भी गहरा असर पड़ सकता है। पाकिस्तान पहले ही आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है और ऐसे में चीनी प्रोजेक्ट्स पर हमले उसकी कमर तोड़ने के लिए काफी हैं।
केच में मजदूरों की निर्मम हत्या
इस खूनी रणनीति की शुरुआत 27 जुलाई से हुई थी। बलूचिस्तान के केच जिले के क्लातुक इलाके में BLA के हथियारबंद लड़ाकों ने निर्माण कार्य में लगे एक मजदूर समूह को घेर लिया। हमलावरों ने पहले खैबर पख्तूनख्वा के निवासी जावेद नाम के एक मजदूर को मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद उन्होंने अन्य 6 लोगों को बंधक बनाकर अपने साथ ले लिया। कुछ दिनों बाद तुर्बत के पास एक सुनसान इलाके में उन सभी 6 मजदूरों के शव मिले। इनमें से चार लोग पंजाब प्रांत के रहने वाले थे, जबकि दो खैबर पख्तूनख्वा के थे। बलोच लड़ाकों का यह कदम एक सीधा संदेश है कि बलूचिस्तान की जमीन पर चीन के किसी भी प्रोजेक्ट में बाहरी ताकतों का दखल उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
रणनीति में बदलाव: अब सिर्फ सेना नहीं, निवेश भी निशाने पर
खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केच की घटना कोई इकलौती वारदात नहीं है। यह BLA की युद्ध नीति में आए एक बहुत बड़े बदलाव को दर्शाती है। अब उनका ध्यान सिर्फ पाकिस्तानी चौकियों या झंडों पर हमला करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बलूचिस्तान में चल रहे चीनी निवेश, खनन कार्यों और संसाधनों से जुड़ी परियोजनाओं को निशाना बनाना उनका मुख्य उद्देश्य बन गया है। BLA ने स्थानीय लोगों, इंजीनियरों और बाहर से आए मजदूरों को कड़ी चेतावनी जारी की है कि वे चीन की कंपनियों के साथ काम करना बंद कर दें अन्यथा उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ेगी। यह चेतावनी बलूचिस्तान के स्थानीय निवासियों के लिए भी एक स्पष्ट निर्देश है कि वे चीनी प्रोजेक्ट्स से पूरी तरह दूरी बना लें।
मश्केल और मस्तुंग में भी दहशत का माहौल
मजदूरों की हत्याओं का यह सिलसिला केवल केच तक सीमित नहीं है। तुर्बत में शव मिलने से कुछ समय पहले मश्केल इलाके में भी इसी तरह का हमला हुआ था, जिसमें पांच मजदूरों को बेरहमी से मार दिया गया था। इसके अलावा, कुछ हफ्ते पहले मस्तुंग जिले में पाकिस्तानी सेना के एक बड़े काफिले पर BLA ने हमला कर दर्जनों सैनिकों को ढेर कर दिया था। उस हमले ने पाकिस्तानी सेना की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की पोल खोलकर रख दी थी। अब लड़ाके यह साबित कर रहे हैं कि वे सेना से सीधी जंग लड़ने के साथ-साथ चीन की आर्थिक रीढ़ तोड़ने में भी सक्षम हैं।
CPEC पर मंडरा रहा खतरा
चीन ने पाकिस्तान में चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC के नाम पर अरबों डॉलर निवेश किए हैं। ग्वादर पोर्ट से लेकर तांबे और सोने की खदानों तक, चीन की मौजूदगी बलोच जनता को शोषक के रूप में दिखाई देती है। बलोच लोगों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार उनके प्राकृतिक संसाधनों को चीन के हाथों बेच रही है, जबकि स्थानीय जनता सिर्फ तंगहाली और गरीबी का सामना कर रही है। यही कारण है कि बलोच विद्रोही चीन को एक कब्ज़ा करने वाली विदेशी ताकत मानते हैं। स्थिति यह हो गई है कि चीन के अधिकारी अपने ही प्रोजेक्ट्स पर जाने से कतरा रहे हैं और बीजिंग लगातार इस्लामाबाद पर अपने नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाने का दबाव बना रहा है।
शहबाज सरकार की विफलता
पाकिस्तानी सरकार बार-बार यह दावा करती है कि ये परियोजनाएं बलूचिस्तान के विकास के लिए जरूरी हैं, लेकिन हकीकत में वहां का सुरक्षा माहौल बदतर होता जा रहा है। सेना के तमाम बड़े-बड़े दावों के बावजूद BLA लगातार हमले कर रहा है, जिससे सरकारी सुरक्षा के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। यदि हिंसा का यही दौर जारी रहा, तो चीन को भविष्य में बलूचिस्तान में अपने अरबों डॉलर के निवेश पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। बलोच लड़ाकों ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान से जंग तो जारी ही रहेगी, अब चीन को भी अपनी गलतियों का खामियाजा भुगतना होगा।
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