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4 घंटे पहले
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गंभीर आर्थिक तंगी का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ओर से एक राहत भरी खबर आई है। दोनों पक्षों के बीच करीब 1.21 अरब डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय मदद को लेकर स्टाफ-लेवल समझौता हो गया है। हालांकि, पाकिस्तान को यह बड़ी धनराशि मिलने से पहले अभी IMF के कार्यकारी बोर्ड की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। इस नए वित्तीय सहयोग से बदहाल पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को कुछ समय के लिए जरूरी सहारा मिलने की उम्मीद है।
किस्तों में दी जाएगी सहायता राशि
इस ताजा समझौते के तहत मिलने वाले फंड को दो विशेष श्रेणियों में विभाजित किया गया है। कार्यकारी बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद पाकिस्तान को निम्नलिखित कार्यक्रमों के तहत पैसा दिया जाएगा:
- पाकिस्तान के वर्तमान आर्थिक सुधार कार्यक्रम के तहत लगभग 1 अरब डॉलर की वित्तीय मदद दी जाएगी।
- देश की आर्थिक स्थिति और जलवायु परिवर्तन संबंधी मजबूती के कार्यक्रम के तहत करीब 21 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि आवंटित होगी।
इन दोनों कार्यक्रमों के तहत मिलने वाले नए फंड को जोड़ने के बाद, पाकिस्तान को हासिल होने वाली कुल सहायता राशि का आंकड़ा बढ़कर लगभग 5.7 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत
IMF द्वारा जारी किए गए आकलन के अनुसार, पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में अब बहुत धीमी गति से ही सही, लेकिन सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। देश की विकास दर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा, महंगाई के मोर्चे पर भी थोड़ी राहत मिलती दिख रही है। मई महीने में अपने उच्चतम स्तर पर रहने के बाद, सितंबर में महंगाई की दर घटकर करीब 10.3 प्रतिशत पर आ गई है।
इस आर्थिक सुधार में विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों द्वारा भेजी जाने वाली रकम यानी रेमिटेंस की भी अहम भूमिका रही है, जिसने देश को सहारा दिया है। सितंबर के अंत तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार सुधरकर करीब 21.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया। IMF का मानना है कि पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग में आया सुधार और वैश्विक वित्तीय बाजारों तक उसकी दोबारा पहुंच बनना एक सकारात्मक बदलाव है।
IMF ने दी कड़े जोखिमों की चेतावनी
राहत पैकेज पर सहमति बनने के बावजूद वैश्विक वित्तीय संस्था ने पाकिस्तान को आगाह किया है कि उसके आर्थिक सुधारों की राह में अभी भी कई बड़ी मुश्किलें खड़ी हैं। IMF के अनुसार, पाकिस्तान के सामने निम्नलिखित प्रमुख जोखिम बने हुए हैं:
- देश में बिजली और ऊर्जा की अत्यधिक ऊंची दरें।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव।
- वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों में आने वाली रुकावटें।
इन चुनौतियों के कारण पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता पर कभी भी दोबारा संकट आ सकता है, जिससे बचने के लिए सरकार को कड़े आर्थिक फैसले लेते रहने होंगे।
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