चीन ने पाकिस्तान से खींचे हाथ, बलूचिस्तान की परियोजनाओं से बोरिया-बिस्तर समेट रहा ड्रैगन विश्व एक घंटा पहले 4
पाकिस्तान के सबसे भरोसेमंद साथी चीन ने अब बलूचिस्तान में जारी माइनिंग प्रोजेक्ट्स से अपने हाथ पीछे खींचना शुरू कर दिया है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने इस बात का दावा करते हुए पाक हुकूमत की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए हैं।

चीन और पाकिस्तान की दोस्ती में आई दरार

पाकिस्तान हमेशा से ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन को अपना सबसे करीबी और भरोसेमंद दोस्त बताता आया है। आर्थिक संकट हो या रक्षा क्षेत्र में निवेश की जरूरत, पाकिस्तान हर मौके पर ड्रैगन की ओर ही देखता रहा है। लेकिन अब इन दोनों देशों के बीच की दूरियां साफ नजर आने लगी हैं। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि चीन अब खुद को पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चल रहे माइनिंग यानी खनन प्रोजेक्ट्स से दूर कर रहा है। पाकिस्तान की आंतरिक और आर्थिक स्थिति जिस तरह से बिगड़ती जा रही है, उसने चीन जैसे सहयोगी को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

सेना का दबदबा और बिगड़ते हालात

जब से पाकिस्तान की सत्ता और नीतियों पर वहां के सेना प्रमुख का सीधा नियंत्रण बढ़ा है, देश की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल गई हैं। पाकिस्तान का पूरा ध्यान अब केवल हथियार बनाने और सैन्य शक्ति प्रदर्शन पर केंद्रित हो गया है। इस दौरान देश के भीतर हालात इस कदर खराब हो गए हैं कि अब उसके अंतरराष्ट्रीय मित्र भी अपने निवेश को सुरक्षित नहीं मान रहे। मौलाना फजलुर रहमान ने सीधे तौर पर पाकिस्तान की हुकूमत पर सवाल उठाया है कि आखिर देश के प्राकृतिक संसाधनों का नियंत्रण किसके पास है और उसका असली फायदा किसे मिल रहा है।

खनन परियोजनाओं पर गंभीर सवाल

फजलुर रहमान ने एक वीडियो के माध्यम से बलूचिस्तान की खनिज संपदा को लेकर कई तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने विशेष रूप से 'रेको दिक' (Reko Diq) परियोजना का जिक्र करते हुए पूछा कि आखिर वहां खनन का काम कौन कर रहा है और वहां से निकलने वाले कीमती खनिजों का निर्यात कहां किया जा रहा है। उनका कहना है कि पाकिस्तान अपनी खनिज संपदा का सही लाभ उठाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। देश के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और उससे मिलने वाला राजस्व कहां जा रहा है, यह एक ऐसा रहस्य बना हुआ है जिसका जवाब जनता को नहीं मिल पा रहा है।

चीन क्यों हुआ नाराज?

विश्लेषकों का मानना है कि केवल खनन में ही नहीं, बल्कि ग्वादर प्रोजेक्ट में हो रही अत्यधिक देरी ने भी चीन को पाकिस्तान से खफा कर दिया है। चीन कई मौकों पर पाकिस्तान को सुरक्षा और कार्यप्रणाली को लेकर सख्त चेतावनियां दे चुका है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से सुस्त रवैया अपनाए जाने के कारण अब चीन का धैर्य जवाब दे रहा है। दशकों से लटकी हुई परियोजनाओं के कारण चीन अब अपनी पूंजी को बलूचिस्तान से बाहर निकालने पर विचार कर रहा है। मौलाना फजलुर रहमान के अनुसार, चीन का यह कदम पाकिस्तान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

कर्ज में डूबी अर्थव्यवस्था और राजनीतिक गुलामी

JUI-F प्रमुख ने 'सैंदक' (Saindak) खनन परियोजना के कामकाज पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतने सालों से काम चलने के बावजूद पाकिस्तान को उस स्तर का लाभ नहीं मिल सका है जिसकी उम्मीद की गई थी। मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली पर दुख जताते हुए कहा कि देश आज भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसे कर्जदाताओं की दया पर जीवित है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि पाकिस्तान की नीतियां अब देश के नेता नहीं बल्कि उसे कर्ज देने वाली विदेशी संस्थाएं तय करती हैं। उन्होंने इसे एक प्रकार की नई राजनीतिक गुलामी करार दिया है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने की मांगें देश की समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं है, क्योंकि समस्या का मूल कारण प्रशासनिक और आर्थिक कुप्रबंधन में छिपा हुआ है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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