पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार की भारत से बातचीत की वकालत: कहा- युद्ध और ताकत से नहीं सुलझते विवाद विश्व 7 घंटे पहले 11
पाकिस्तान के कानून एवं न्याय मंत्री आजम नजीर तरार ने भारत के साथ संवाद की पैरवी करते हुए कहा है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने सिंधु जल संधि, आतंकवाद और कश्मीर जैसे लंबे समय से जारी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया।

भारत के साथ संवाद पर पाकिस्तानी मंत्री की अहम टिप्पणी

पाकिस्तान के कानून एवं न्याय मंत्री आजम नजीर तरार ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव खत्म करने के लिए द्विपक्षीय बातचीत की जरूरत पर बल दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि युद्ध और सैन्य ताकत का प्रयोग करके किसी भी विवाद का समाधान नहीं निकाला जा सकता। विश्व बैंक की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान आईएएनएस से बातचीत करते हुए तरार ने कहा कि दुनिया भर में कई बड़े और जटिल विवादों को केवल संवाद और समझौतों के जरिए ही हल किया गया है। इसलिए भारत और पाकिस्तान को भी अपने आपसी मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत का ही रास्ता अपनाना चाहिए।

सिंधु जल संधि और 1960 के समझौते का जिक्र

सिंधु जल संधि से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए पाकिस्तानी मंत्री ने वर्ष 1960 में हुए इस ऐतिहासिक समझौते को बेहद खास और विशिष्ट बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि 1965 और 1971 के युद्धों के अलावा 1999 के कारगिल संघर्ष जैसे भारी तनाव के दौर में भी यह जल समझौता पूरी तरह बना रहा। उस दौरान भी दोनों मुल्कों के बीच जल से जुड़े आंकड़ों का आदान-प्रदान निरंतर होता रहता था।

तरार ने कहा कि दुर्भाग्यवश अब इस संधि को लेकर स्थितियां बदल गई हैं। पाकिस्तान इस विषय पर लगातार वार्ता की मांग कर रहा है और उसने इस मामले को विश्व बैंक के समक्ष भी उठाया है। उन्होंने कहा कि पानी जीवन का मुख्य आधार है और अंतरराष्ट्रीय नियमों में निचले तटवर्ती देशों के जल अधिकारों का अपना महत्व है। इसे राजनीतिक टकराव का जरिया बनाने के बजाय दोनों देशों को एक साथ बैठकर इसका स्थायी और सर्वमान्य समाधान ढूंढना चाहिए।

170 करोड़ की आबादी और परमाणु शक्ति का हवाला

द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को समझाते हुए आजम नजीर तरार ने कहा कि भारत और पाकिस्तान की कुल मिलाकर 170 करोड़ से भी ज्यादा की आबादी है। इसके साथ ही दोनों देश परमाणु क्षमता से संपन्न हैं। ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और सह-अस्तित्व की आवश्यकता और भी ज्यादा बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सरकारों को अपनी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए।

यूरोप का उदाहरण और सांस्कृतिक समानताएं

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए तरार ने यूरोपीय देशों का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यूरोप का इतिहास भीषण युद्धों और लंबी शत्रुता से भरा रहा है, लेकिन इसके बावजूद आज वे देश आपसी सहयोग और शांतिपूर्ण माहौल में एक साथ रह रहे हैं। भारत और पाकिस्तान को भी यूरोप के इस अनुभव से सीख लेते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

इसके अतिरिक्त उन्होंने दोनों देशों की सांस्कृतिक साझ को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत के कई हिस्सों और पाकिस्तान में लोगों के खानपान, सामाजिक परंपराओं और संस्कृति में काफी समानता है। आम जनता के स्तर पर संबंधों में कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन राजनीति और कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों का इन संबंधों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

आतंकवाद और आरोप-प्रत्यारोप पर दिया बयान

आतंकवाद के मुद्दे पर बात करते हुए तरार ने दावा किया कि पाकिस्तान खुद भी कई दशकों से आतंकवाद की समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे पर केवल आरोप और प्रत्यारोप लगाने से किसी भी मुल्क को कोई सकारात्मक नतीजा नहीं मिल सकता। दोनों देशों को एक साथ बैठकर वास्तविक मुद्दों की पहचान करनी चाहिए और मिलकर उनके समाधान तलाशने चाहिए। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच वार्ता के लिए अभी भी पर्याप्त संभावनाएं बची हुई हैं।

क्षेत्रीय भूमिका और आंतरिक चुनौतियों का उल्लेख

पाकिस्तानी मंत्री ने अपनी हालिया कूटनीतिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनके देश ने अमेरिका और ईरान के बीच उपजे तनाव को कम करने की कोशिशों में अपनी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान न केवल अपने क्षेत्र में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति प्रयासों में योगदान देना चाहता है।

हालांकि, आतंकवाद को संरक्षण देने के आरोपों पर उन्होंने पाकिस्तान की संलिप्तता से इनकार किया और इसके बजाय बलूचिस्तान तथा खैबर पख्तूनख्वा में जारी हिंसा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अतिवादी या सख्त रुख अपनाने से कभी कोई नतीजा नहीं निकलता। देशों को तार्किक ढंग से वार्ता की मेज पर आने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि दोनों देशों के आम नागरिकों को बेहतर जीवन, विकास और शांति का पूरा अधिकार है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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