डोनाल्ड ट्रंप की तारीफों से पाकिस्तान का नाम नदारद, इस्लामाबाद ने दी सफाई विश्व एक घंटा पहले 3
अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रयासों में नाम न आने पर पाकिस्तान ने अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे अब भी इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं और पर्दे के पीछे सक्रिय हैं।

शांति प्रयासों में पाकिस्तान का नाम गायब होने पर स्पष्टीकरण

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को शांत करने की दिशा में जारी प्रयासों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी देशों द्वारा निभाई गई शांतिपूर्ण मध्यस्थता की जमकर सराहना की, लेकिन अपने संबोधन या प्रशंसा सूची में उन्होंने कहीं भी पाकिस्तान का जिक्र नहीं किया। राष्ट्रपति की ओर से पाकिस्तान का नाम न लिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटकलें तेज हो गई थीं। इन परिस्थितियों के बीच इस्लामाबाद ने अब अपना पक्ष रखा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता राजदूत ताहिर अंद्राबी ने साफ किया कि देश अभी भी इस पूरी प्रक्रिया में मजबूती से और सक्रियता के साथ जुड़ा हुआ है।

संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है इस्लामाबाद

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान का नाम न लेने के विषय में सवाल किया, तो अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से बातचीत का सिलसिला अभी भी जारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस्लामाबाद दोनों ही पक्षों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। उनके अनुसार, अलग-अलग वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग देशों की भूमिका अलग-अलग हो सकती है। हालांकि, व्यापक दृष्टिकोण से देखें तो पाकिस्तान, कतर और अन्य मित्र देशों के प्रयास एक समन्वित रणनीति का हिस्सा हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े गतिरोध के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ऐसे समय में संवाद को आगे बढ़ाने और तनाव घटाने में सहायक की भूमिका निभाना बेहद अनिवार्य हो जाता है, जिसे पाकिस्तान बखूबी कर रहा है।

पाकिस्तान का योगदान सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं

प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता को लेकर अक्सर लोगों की राय अलग होती है, लेकिन पाकिस्तान की जिम्मेदारी केवल एक घटना या विशेष संकट तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब कोई मुद्दा लंबे समय से खिंचा हुआ हो और उस पर लगातार बातचीत की जरूरत हो, तो पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है। वहीं, अचानक उत्पन्न हुए गंभीर संकटों में उसका प्राथमिक उद्देश्य संवाद के रास्ते को सुगम और सरल बनाना होता है। इस दृष्टिकोण से पाकिस्तान की निरंतरता बनी हुई है।

ओमान और कतर के साथ तालमेल की तारीफ

अपनी सफाई में ताहिर अंद्राबी ने कतर के साथ मिल रहे सहयोग का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और कतर मिलकर तकनीकी स्तर पर बातचीत का एक ढांचा तैयार करने में लगे हैं। इसके अलावा, उन्होंने ओमान की भूमिका को भी सराहनीय बताया। अंद्राबी का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित देश होने के नाते ओमान ने इस मामले में काफी सकारात्मक योगदान दिया है। अंत में उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान अपने सहयोगी देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर शांति बहाल करने की अपनी कोशिशों को भविष्य में भी जारी रखेगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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