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2 घंटे पहले
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बलूचिस्तान में धार्मिक स्थलों को निशाना बना रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों के साथ क्रूरता का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बलूचिस्तान प्रांत में अब प्रशासन ने मंदिरों के बाद ऐतिहासिक गुरुद्वारों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में सामने आई एक घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, जहां 200 साल पुराने एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गुरुद्वारे को गिराने के पीछे का मकसद उस जमीन पर एक व्यावसायिक मॉल का निर्माण करना है।
सिख समुदाय में भारी रोष
बलूचिस्तान के क्वेटा में स्थित यह गुरुद्वारा सिख समुदाय के लिए अत्यंत श्रद्धा का केंद्र रहा है। इस तोड़फोड़ की कार्रवाई को बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के अंजाम दिया गया, जिसने स्थानीय सिख समुदाय को सकते में डाल दिया है। लोगों का कहना है कि यह न केवल उनके धार्मिक अधिकारों का हनन है, बल्कि उनकी ऐतिहासिक विरासत को मिटाने की एक सोची-समझी साजिश भी है। प्रशासन की इस मनमानी के विरोध में समुदाय के लोग सड़क पर उतर आए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कब्जे की नीयत से गिराई गई धरोहर
स्थानीय निवासियों का स्पष्ट आरोप है कि इस पूरी कार्रवाई के पीछे किसी एक निजी कंपनी का हाथ है, जिसकी नजर इस कीमती जमीन पर लंबे समय से थी। जमीन हथियाने के लालच में ऐतिहासिक धार्मिक इमारत के बड़े हिस्से को मलबे में तब्दील कर दिया गया। समुदाय के प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया है कि आखिर प्रशासन की अनुमति के बिना इतनी पुरानी इमारत को कैसे गिराया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया है कि किसी भी विकास परियोजना के नाम पर सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को नष्ट करना किसी भी सभ्य समाज में अस्वीकार्य है।
125 साल पुराने गुरुद्वारे पर भी हो चुकी है कोशिश
यह कोई पहली बार नहीं है जब बलूचिस्तान में सिखों के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया है। इससे पहले जून के महीने में भी एक 125 साल पुराने गुरुद्वारे को ढहाने का कुत्सित प्रयास किया गया था। उस दौरान श्री गुरु सिंह सभा से जुड़े लोगों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके चलते उस समय तो कार्रवाई रुक गई थी। लेकिन अब फिर से उसी तरह की घटना ने समुदाय की रातों की नींद उड़ा दी है।
सिर्फ दो गुरुद्वारे बचे
एक आंकड़े के मुताबिक, किसी समय इस पूरे क्षेत्र में सिखों के 10 प्रमुख गुरुद्वारे हुआ करते थे। आज की स्थिति यह है कि इनमें से मात्र 2 गुरुद्वारे ही अस्तित्व में बचे हैं। इतने कम ऐतिहासिक स्थलों के बचने के बावजूद सरकार या प्रशासन द्वारा उनका संरक्षण न करना और उल्टा उन्हें मिटाने की कोशिशें करना, वहां की बिगड़ती स्थिति को दर्शाता है। बलूचिस्तान के लोग पहले से ही पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों से पीड़ित हैं। वहां के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर उन्हें दरकिनार करने वाली पाक हुकूमत अब उनकी पहचान और आस्था पर भी चोट कर रही है। अब सिख समुदाय प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच और गुरुद्वारे की बची हुई जमीन की सुरक्षा की गारंटी मांग रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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