दिल्ली
45 मिनट पहले
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हादसे के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई
पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास स्थित तीन मंजिला इमारत के ढहने से हुई त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है। इस हृदयविदारक हादसे के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया है और मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए कुल चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पकड़े गए आरोपियों में इमारत का मालिक साइमुल्लाह उर्फ अयूब शामिल है। इसके अलावा पुलिस ने तीन ठेकेदारों सिराज, ताजुद्दीन और फरकान को भी अपनी गिरफ्त में लिया है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन तीनों ठेकेदारों को फरीदाबाद के सिरोही इलाके से पकड़ा गया है, जबकि मकान मालिक को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
भाई का घर सुरक्षित, दूसरा ढह गया
यह पूरी घटना एक पुश्तैनी संपत्ति के बंटवारे से जुड़ी है। गली शाहतारा के अंतर्गत आने वाली संकरी शीशमहल गली में स्थित इस पुश्तैनी घर में परिवार पिछले 100 वर्षों से रह रहा था। मकान मालिक अयूब और उनके भाई बरकतुल्ला के बीच कुछ महीने पहले इस संपत्ति का बंटवारा हुआ था। बंटवारे के बाद दोनों भाई अपने-अपने हिस्से में नए सिरे से मकान बना रहे थे। संयोग देखिए कि अयूब का मकान तो पूरी तरह बनकर तैयार हो गया, लेकिन बरकतुल्ला के हिस्से का मकान निर्माण के दौरान ही ताश के पत्तों की तरह ढह गया, जिसमें 6 मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
गुरुवार सुबह हुआ था दर्दनाक हादसा
इमारत के गिरने की यह घटना बीते गुरुवार की सुबह करीब 9:45 बजे हुई। उस वक्त तीन मंजिला इमारत का निर्माण कार्य चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत अचानक भरभराकर जमीनदोज हो गई। जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय घटनास्थल पर करीब 10 से 15 मजदूर काम में जुटे हुए थे। मलबा काफी ज्यादा होने के कारण राहत और बचाव कार्य काफी चुनौतीपूर्ण रहा। शनिवार तक भी प्रशासन द्वारा मलबा हटाने और मलबे के नीचे दबे होने की किसी भी संभावना की जांच का कार्य जारी रखा गया था।
मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान संजीत कुमार, किशोरी साह, पंकज शर्मा, विपिन राम, शंटू और दिनेश साह के रूप में की गई है। मृतकों में से 4 लोग मूल रूप से बिहार के निवासी थे, जबकि विपिन राम दिल्ली के मंडावली के रहने वाले थे। इस घटना में साहदेव चौधरी (25) और फिरोज (37) घायल हुए थे, जिन्हें मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। हादसे वाले दिन ही किशोरी (40) और संजीत (45) को मृत घोषित कर दिया गया था।
बिना किसी मंजूरी के चल रहा था काम
जांच में पता चला है कि लगभग 50 वर्ग मीटर के छोटे से प्लॉट पर बिना किसी कानूनी अनुमति के निर्माण किया जा रहा था। दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस इमारत का कोई भी बिल्डिंग प्लान स्वीकृत नहीं किया गया था। निगम के मुताबिक, निर्माण कार्य तीसरी मंजिल तक पहुंच चुका था और उस समय छत का स्लैब डाला जा रहा था, तभी पूरी इमारत भरभरा कर गिर गई। शुरुआती जांच में निर्माण सामग्री के गैर-इंजीनियरिंग उपयोग और सामग्री के सही तरह से न जमने को हादसे का बड़ा कारण माना जा रहा है।
जून में ही निगम को दी गई थी चेतावनी
इस हादसे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली पुलिस ने इसी साल जून के महीने में इस संपत्ति पर हो रहे अवैध निर्माण के बारे में नगर निगम को आधिकारिक सूचना दी थी। 15 जून को हौज काजी थाने के एसएचओ ने MCD के सिटी सदर पहाड़गंज जोन को पत्र लिखकर अनधिकृत निर्माण से अवगत कराया था। इस पत्र में जमीन के मालिक के अलावा ठेकेदार फरकान का नाम भी स्पष्ट रूप से दर्ज था।
भारतीय न्याय संहिता के तहत FIR
पुलिस ने 5 नवंबर को हौज काजी थाने में मामला दर्ज किया है। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 290, 125(a) और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। ये धाराएं गैर-इरादतन हत्या, खतरनाक ढंग से भवन गिराने, दूसरों के जीवन को खतरे में डालने और साझा मंशा से अपराध करने के गंभीर आरोपों से संबंधित हैं। पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जांच कर रही है और लापरवाही के हर पहलू को खंगाला जा रहा है।
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