बरसात के मौसम में भिंडी की फसल को बर्बाद होने से कैसे बचाएं, अपनाएं ये खास टिप्स बिहार 2 घंटे पहले 4
मानसून के दौरान अधिक बारिश से भिंडी की खेती पर बुरा असर पड़ सकता है। जमुई के प्रगतिशील किसान ने फसल को सुरक्षित रखने और बंपर पैदावार पाने के लिए प्रभावी उपाय बताए हैं।

मानसून में भिंडी की खेती की चुनौतियां

मानसून की बारिश खेती के लिए एक वरदान की तरह होती है, लेकिन कई बार अत्यधिक वर्षा सब्जी उत्पादक किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती है। खासकर जो किसान अपने खेतों में भिंडी उगाते हैं, उन्हें इस मौसम में बहुत अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। लगातार बारिश और खेतों में पानी भरने की समस्या से भिंडी के पौधों के खराब होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालांकि, कुछ छोटे और सही उपायों को अपनाकर किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल को न केवल सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि बंपर पैदावार भी प्राप्त कर सकते हैं।

जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था है जरूरी

जमुई जिले के प्रगतिशील किसान साकेंद्र यादव के अनुसार, बारिश के मौसम में खेत में पानी का जमा होना भिंडी के पौधों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यदि भिंडी के खेत में पानी लंबे समय तक रुका रहे, तो पौधों की जड़ों में सड़न पैदा हो जाती है और कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगता है। इसलिए, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे सबसे पहले अपने खेतों में जल निकासी की एक सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करें। खेत से अतिरिक्त पानी को समय रहते बाहर निकाल देना फसल को बचाने का सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है।

मिट्टी की देखभाल और खरपतवार नियंत्रण

साकेंद्र यादव बताते हैं कि जब बारिश का दौर थमे और खेत की मिट्टी में नमी थोड़ी कम हो जाए, तो पौधों के आसपास हल्की गुड़ाई करना बेहद फायदेमंद होता है। गुड़ाई करने से मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है और पौधों की जड़ों तक हवा का संचार अच्छी तरह होता है, जिससे उनकी विकास प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसके साथ ही, मानसून के दौरान खेतों में खरपतवार बहुत तेजी से पनपते हैं। ये घास और अनावश्यक पौधे मुख्य फसल के पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, इसलिए बारिश के दौरान नियमित रूप से खेतों से खरपतवार को हटाते रहना बहुत आवश्यक है।

रोगों से सुरक्षा और बेहतर पैदावार के उपाय

बारिश के चलते अक्सर भिंडी की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, जो फसल के कमजोर होने का संकेत है। ऐसी स्थिति में पौधों से रोगग्रस्त या सूखी पत्तियों को तुरंत तोड़कर खेत से दूर फेंक देना चाहिए। इसके अलावा, मानसून के समय भिंडी की नियमित तुड़ाई बहुत मायने रखती है। यदि किसान दो से तीन दिन के अंतराल पर फल तोड़ते रहते हैं, तो पौधों में नए फूल आने की प्रक्रिया निरंतर बनी रहती है, जिससे उत्पादन में काफी वृद्धि होती है।

बारिश के सीजन में भिंडी की फसल में पीला मोजैक, झुलसा और पत्ती धब्बा जैसे रोगों का खतरा सबसे अधिक रहता है। यदि पौधों पर किसी भी प्रकार के रोग के लक्षण दिखाई दें, तो उसमें देरी नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर ही किसी अनुशंसित कीटनाशी या फफूंदनाशी का छिड़काव करना चाहिए ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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