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एक घंटा पहले
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जलवायु संकट और विकसित देशों की बेरुखी
पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी और उसे निभाने के लिए आर्थिक सहयोग के मुद्दे पर भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी मुखर आवाज उठाई है। जर्मनी के बर्लिन में आयोजित बर्लिन ग्लोबल डायलॉग के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विकसित देशों की कथनी और करनी में अंतर को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि विकासशील राष्ट्र आज भी उस आर्थिक सहायता के इंतजार में हैं, जिसका वादा अमीर देशों ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए कई साल पहले किया था। उन्होंने पूछा कि जब वैश्विक प्रदूषण के पीछे विकसित देशों का मुख्य इतिहास रहा है, तो फिर मदद के मामले में वे अपना हाथ पीछे क्यों खींच रहे हैं?
11 साल बाद भी वादे अधूरे
पीयूष गोयल ने एक गोलमेज चर्चा के दौरान खुलासा किया कि 2015 के पेरिस जलवायु सम्मेलन में विकसित देशों ने एक बड़ा संकल्प लिया था। इसके तहत विकासशील और गरीब देशों को जलवायु संबंधी खतरों से निपटने के लिए सालाना 100 अरब डॉलर की सहायता राशि देने का वादा किया गया था। गोयल ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण वादे को बीते हुए अब 11 साल का लंबा समय हो चुका है, लेकिन आज तक उस वादे की एक फूटी कौड़ी भी जमीन पर नहीं उतरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये बड़ी बातें केवल फाइलों और समझौतों तक ही सीमित होकर रह गई हैं। इसके अलावा उन्होंने यूरोपीय संघ की कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म यानी CBAM नीति को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
उत्सर्जन और आबादी का सीधा गणित
भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए पीयूष गोयल ने आंकड़ों के जरिए यूरोप के साथ एक बड़ा अंतर साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत विश्व की कुल आबादी का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा समेटे हुए है, जबकि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारत की भागीदारी 3 प्रतिशत से भी काफी नीचे है। गोयल के मुताबिक, यूरोप में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन का स्तर भारत के मुकाबले कहीं अधिक है। उन्होंने जोर दिया कि विकसित देशों ने अपने औद्योगिक विकास के दौर में पर्यावरण का भरपूर दोहन किया और लाभ उठाया, लेकिन अब जब संकट का समय आया है, तो वे जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं।
भारत का संकल्प और ग्रीन एनर्जी की ओर कदम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अपनी 140 करोड़ से अधिक की जनसंख्या की खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। तमाम चुनौतियों के बावजूद, भारत स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से मांग की कि वे अपनी जिम्मेदारी को समझें और विकासशील देशों को तकनीक तथा धन मुहैया कराएं।
औद्योगिक सहयोग पर भी चर्चा
बर्लिन दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने अपने कार्यक्रमों में व्यावसायिक बैठकें भी शामिल कीं। उन्होंने नॉफ ग्रुप के ग्लोबल जनरल पार्टनर मुरात अकयिल्दिज के साथ मुलाकात की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र भारत में कंपनी का विस्तार करना और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहयोग बढ़ाना रहा।
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