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8 घंटे पहले
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सर्वपितृ अमावस्या 2026 की सही तिथि
पितृ पक्ष के दौरान आने वाली अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या के रूप में जाना जाता है। यह पूरे श्राद्ध पक्ष का अंतिम और सबसे निर्णायक दिन होता है। जिन लोगों को अपने पितरों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं होती या जो किसी कारणवश पूरे पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाते, उनके लिए यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन पूरे मन से किया गया श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान सभी पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति प्रदान करता है। इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या और महालय अमावस्या के नामों से भी पुकारा जाता है।
वर्ष 2026 में सर्वपितृ अमावस्या का समय
इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, दिन शनिवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, इस दिन अमावस्या तिथि का मान रात के 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भक्त अपने पितरों के निमित्त विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर सकते हैं।
श्राद्ध अनुष्ठान के लिए शुभ मुहूर्त
श्राद्ध कर्म को विधिपूर्वक करने के लिए सही समय का चुनाव करना बहुत आवश्यक है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन निम्नलिखित मुहूर्त श्राद्ध के लिए सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं:
- कुतुप मूहूर्त: सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तक
- रौहिण मूहूर्त: दोपहर 12:31 से 01:18 तक
- अपराह्न काल: दोपहर 01:18 से 03:37 तक
सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
सर्वपितृ अमावस्या का दिन सभी ज्ञात और अज्ञात पूर्वजों को समर्पित होता है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि कोई व्यक्ति किसी विशेष तिथि पर अपने पितर का श्राद्ध करने में असमर्थ रहता है, तो वह इस अमावस्या को श्राद्ध करके पुण्य प्राप्त कर सकता है। इसे महालय अमावस्या कहने के पीछे कारण यह है कि यह वह महान तिथि है जब सभी पितरों का एक साथ आह्वान करके उनका पूजन किया जा सकता है।
मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान जो पितर पृथ्वी लोक पर आते हैं, वे इसी अमावस्या तिथि को विदा लेकर वापस लौटते हैं। इस दिन विधि-विधान से किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों को शांति मिलती है। इस शुभ अवसर पर ब्राह्मण भोज, वस्त्र दान, तिलदान, जलदान, दीपदान और गाय को हरा चारा खिलाना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्ची श्रद्धा के साथ श्राद्ध करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितृ ऋण उतर जाता है।
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