मखाना खेती को बनाएं मुनाफे का बिजनेस, वैज्ञानिक ने साझा किए 25% कमाई बढ़ाने वाले आधुनिक मंत्र बिहार एक घंटा पहले 3
मखाना किसान अब खेती के साथ प्रोसेसिंग अपनाकर अपनी आय में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकते हैं, इसके लिए बाजार में कई आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं।

मखाना खेती में उद्यमिता की नई राह

बाजार में मखाने की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते बड़ी संख्या में युवा किसान इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यदि आप भी मखाने की खेती से जुड़े हैं, तो अब केवल किसान बने रहना ही काफी नहीं है। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार का मानना है कि किसानों को अब उद्यमी बनने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। उनके अनुसार, वैज्ञानिक तकनीकों और मशीनों का उपयोग करके किसान अपनी आमदनी को 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।

प्रोसेसिंग से बढ़ेगी अतिरिक्त कमाई

डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि मखाने के बीजों यानी गुड़िया को सीधे बेचने के बजाय यदि किसान उसका प्रसंस्करण यानी प्रोसेसिंग करते हैं, तो लाभ की संभावनाएं कहीं अधिक बढ़ जाती हैं। यह अतिरिक्त मुनाफा सीधे तौर पर किसान की जेब में जाता है। हालांकि इसके लिए शुरुआत में कुछ निवेश करने की आवश्यकता होती है, लेकिन लंबे समय में यह निवेश काफी फायदेमंद साबित होता है। छोटे स्तर से शुरुआत करने का विकल्प भी उपलब्ध है, जिससे जोखिम को कम किया जा सकता है।

श्रम और समय की बचत

पहले के समय में लावा यानी फूला हुआ मखाना तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह से मानव श्रम पर निर्भर थी। यह काम न केवल थकाऊ होता था, बल्कि इसमें हाथ जलने का जोखिम भी बना रहता था। अब मखाना प्रसंस्करण के लिए सभी जरूरी मशीनें विकसित कर ली गई हैं। इन मशीनों के उपयोग से न केवल मेहनत बचती है, बल्कि काम में सटीकता और स्वच्छता भी आती है, जिससे अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होती है।

मखाना प्रोसेसिंग की चरणबद्ध प्रक्रिया

डॉ. मनोज ने मखाना प्रसंस्करण के विभिन्न चरणों और मशीनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। प्रक्रिया की शुरुआत मखाने को धूप में सुखाने से होती है। इसके बाद बीजों की ग्रेडिंग का कार्य आता है।

  • ग्रेडिंग मशीन: अलग-अलग आकार की गुड़िया को उनके साइज के अनुसार वर्गीकृत करना बहुत जरूरी होता है। ग्रेडिंग मशीन के इस्तेमाल से यह काम बहुत जल्दी और बेहतरीन तरीके से हो जाता है, जिससे रोस्टिंग की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
  • प्राथमिक भुनाई: इसके लिए 1 लाख 40 हजार रुपये वाली मशीन उपलब्ध है। इस मशीन के जरिए भुनी गई गुड़िया की शेल्फ लाइफ काफी बढ़ जाती है। इन्हें 24 घंटे के बाद से लेकर 4 से 5 महीने तक आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है।
  • सेकंड रोस्टिंग और पॉपिंग: लावा तैयार करने के लिए सेकंड रोस्टिंग और पॉपिंग का कार्य एक साथ होता है। इसके लिए मुख्य मशीन की कीमत लगभग 7 लाख रुपये है, लेकिन छोटे किसानों के लिए इसका छोटा वर्जन भी बाजार में उपलब्ध है जो 1 से 1.5 लाख रुपये तक की लागत में मिल जाता है।

पैकेजिंग और मार्केट सप्लाई

मखाना प्रोसेसिंग का अंतिम चरण पैकेजिंग है। वैज्ञानिक के अनुसार, पैकेजिंग मशीन का उपयोग करके किसान अपने उत्पाद को आकर्षक ढंग से पैक कर सकते हैं और सीधे बाजार में सप्लाई कर सकते हैं। इससे उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इस प्रकार, छोटे और युवा किसान कम पूंजी के साथ भी बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित कर सकते हैं और मखाना उत्पादन को एक लाभकारी व्यवसाय में बदल सकते हैं। वैज्ञानिक ने साफ कहा है कि बिना बहुत अधिक खर्च किए भी सही तकनीक के चुनाव से कमाई के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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