NASA का खास Swift स्पेस टेलीस्कोप हुआ खतरे में, बचाने के लिए भेजा जाएगा रोबोटिक रेस्क्यू मिशन अमेरिका एक महीने पहले 61
NASA का Swift स्पेस टेलीस्कोप सूरज की बढ़ती गतिविधियों के कारण धरती की ओर गिर रहा है, जिसे बचाने के लिए कंपनी Katalyst Space Technologies एक विशेष 'LINK' स्पेसक्राफ्ट लॉन्च करने जा रही है।

संकट में NASA का मशहूर टेलीस्कोप

NASA की Swift स्पेस ऑब्जर्वेटरी पिछले 20 सालों से ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर कर रही है। यह टेलीस्कोप अंतरिक्ष में होने वाले बड़े धमाकों की निगरानी करता है, लेकिन अब यह खतरे में है। सूरज की सक्रियता के कारण अंतरिक्ष का वातावरण बदल गया है, जिससे इस टेलीस्कोप की कक्षा (ऑर्बिट) तेजी से नीचे गिर रही है। यदि इसे समय पर नहीं बचाया गया, तो यह इसी साल के अंत तक वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाएगा।

क्या है Swift बूस्ट मिशन?

इस टेलीस्कोप को बचाने के लिए NASA ने एक ऐतिहासिक रेस्क्यू मिशन तैयार किया है, जिसे 'Swift बूस्ट मिशन' नाम दिया गया है। इस मिशन के तहत एरिजोना की कंपनी Katalyst Space Technologies का 'LINK' स्पेसक्राफ्ट लॉन्च किया जाएगा। यह स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में जाकर Swift टेलीस्कोप के साथ जुड़ेगा और उसे एक सुरक्षित तथा ऊंची कक्षा में धकेल देगा।

मिशन के मुख्य तथ्य और बजट

  • Swift मिशन को साल 2004 में लगभग 250 मिलियन डॉलर की लागत से लॉन्च किया गया था।
  • इस रेस्क्यू मिशन के लिए 30 मिलियन डॉलर का बजट निर्धारित किया गया है।
  • Katalyst कंपनी ने मात्र 9 महीने के रिकॉर्ड समय में LINK स्पेसक्राफ्ट तैयार किया है।
  • इस मिशन का आधिकारिक लॉन्च 27 जून के लिए तय किया गया है।

टेलीस्कोप गिरने की असल वजह

Swift टेलीस्कोप में कोई थ्रस्टर या प्रोपल्शन सिस्टम नहीं है। सूर्य की सक्रियता बढ़ने से धरती का वायुमंडल फैल गया है, जिससे टेलीस्कोप पर अधिक खिंचाव (ड्रैग) पड़ रहा है। इसी कारण यह अपनी कक्षा से नीचे आ रहा है। वैज्ञानिक ब्रैड सेंको के अनुसार, Swift ने ब्रह्मांड के छोर तक 2000 से अधिक हाई-एनर्जी सोर्सेज का पता लगाया है, जो इसे विज्ञान के लिए बेहद कीमती बनाता है।

कैसे काम करेगा LINK स्पेसक्राफ्ट?

LINK स्पेसक्राफ्ट का वजन लगभग 425 किलोग्राम है। इसे Pegasus XL रॉकेट के जरिए हवा में लॉन्च किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • इसे L-1011 Stargazer विमान के नीचे फिट करके ले जाया जाएगा।
  • निश्चित ऊंचाई पर पहुंचने के बाद रॉकेट को विमान से अलग करके अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
  • अंतरिक्ष में पहुंचकर LINK स्पेसक्राफ्ट अपने रोबोटिक आर्म्स की मदद से Swift के साथ डॉक करेगा।
  • अगले कुछ महीनों में यह धीरे-धीरे Swift को सुरक्षित ऑर्बिट में स्थापित करेगा।

यदि यह रेस्क्यू सफल होता है, तो Swift टेलीस्कोप को कम से कम 5 साल की अतिरिक्त जिंदगी मिल जाएगी। हालांकि, इस मिशन में कई चुनौतियां भी हैं, जिसमें सौर तूफान और टेलीस्कोप के पुराने इंसुलेशन का नाजुक होना शामिल है। वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि LINK के जरिए वे इस महत्वपूर्ण टेलीस्कोप को सुरक्षित रखने में कामयाब होंगे।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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