नागौर के विकास को मिली नई रफ्तार, 45.30 करोड़ की लागत से बनेगा तीसरा फ्लाईओवर राजस्थान 2 महीने पहले 64
नागौर शहर के डीडवाना बाइपास पर स्थित रेलवे फाटक एलसी-60 पर अब नया फ्लाईओवर बनने जा रहा है, जिससे हजारों वाहन चालकों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस 45.30 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दे दी है।

नागौर शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार

राजस्थान के नागौर वासियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। शहर में मानासर और बीकानेर रोड के बाद अब डीडवाना बाइपास पर स्थित रेलवे फाटक एलसी-60 पर तीसरा फ्लाईओवर बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस परियोजना के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है, जिससे अब टेंडर प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि यह फ्लाईओवर नागौर के आधुनिक बुनियादी ढांचे में एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से सुगम और आधुनिक हो जाएगी।

परियोजना का बजट और वित्तीय विवरण

इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने कुल 45.30 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस धनराशि का बंटवारा विभिन्न कार्यों के लिए किया गया है, ताकि काम में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। खर्च का विवरण इस प्रकार है:

  • मुख्य फ्लाईओवर के निर्माण कार्य पर 33.17 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
  • परियोजना के लिए आवश्यक जमीन के अधिग्रहण यानी भूमि अवाप्ति के लिए 9.93 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • बिजली और पानी की पाइपलाइनों जैसी यूटिलिटी शिफ्टिंग के लिए 2.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

विभाग ने धरातल पर काम शुरू करने के लिए प्रारंभिक तैयारियां तेज कर दी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई माह में टेंडर की प्रक्रिया संपन्न होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जमीन अधिग्रहण से जुड़े कार्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक विशेष कमेटी का भी गठन किया गया है।

ट्रैफिक जाम की समस्या और वर्तमान स्थिति

डीडवाना रेलवे फाटक वर्तमान में नागौर के सबसे व्यस्त मार्गों में गिना जाता है। यह फाटक दिनभर में लगभग 8 से 10 बार बंद होता है, जिसके कारण वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इस व्यस्त मार्ग से प्रतिदिन औसतन 5 से 7 हजार वाहन गुजरते हैं। फाटक बंद होने की स्थिति में वाहन चालकों को करीब 10 से 15 मिनट तक जाम में फंसे रहना पड़ता है। इस दैनिक समस्या के कारण लोगों का समय तो बर्बाद होता ही है, साथ ही ईंधन की भारी खपत और प्रदूषण भी बढ़ता है।

750 मीटर लंबा होगा नया फ्लाईओवर

प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई 750 मीटर होगी। इसके बनने के बाद वाहन चालकों को रेलवे फाटक के बंद होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे बिना किसी रुकावट के सीधे और सुरक्षित तरीके से यात्रा कर सकेंगे। इस फ्लाईओवर के निर्माण से न केवल हजारों लोगों के रोजाना के घंटों बचेंगे, बल्कि ईंधन की बचत होने से आर्थिक लाभ भी होगा और प्रदूषण के स्तर में भी कमी आएगी।

तकनीकी रूप से मजबूत डिजाइन

फ्लाईओवर के निर्माण के लिए डिजाइन को तकनीकी मंजूरी दी जा चुकी है। इसकी संरचना में स्पाइन और पिलर की मजबूती पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि ढांचा विश्वस्तरीय और टिकाऊ बने। विभाग का लक्ष्य है कि सभी प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताओं को तेजी से पूरा किया जाए ताकि निर्माण कार्य बिना किसी देरी के समय सीमा के भीतर पूरा हो सके।

स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त सुविधा

यह परियोजना केवल वाहनों के गुजरने के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों और दुकानदारों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • फ्लाईओवर के दोनों किनारों पर 5-5 मीटर चौड़ी सर्विस रोड बनाई जाएगी, ताकि आसपास के रिहायशी इलाकों और दुकानों का सामान्य यातायात बाधित न हो।
  • रेलवे फाटक बंद रहने के दौरान भी स्थानीय लोगों की आवाजाही जारी रहे, इसके लिए फ्लाईओवर के नीचे एक विशेष अंडरब्रिज का प्रावधान किया गया है।
  • यह दोहरी यातायात व्यवस्था मुख्य हाईवे के ट्रैफिक को प्रभावित किए बिना स्थानीय लोगों को सुरक्षित रास्ता प्रदान करेगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर होगा बड़ा असर

इस फ्लाईओवर के बनने से शहर की कई महत्वपूर्ण संस्थाओं तक पहुँच बेहद आसान हो जाएगी। जेएलएन जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज और कृषि कॉलेज जाने वाले छात्रों और मरीजों के लिए यह मार्ग जीवनरक्षक साबित होगा। इसके अलावा, केंद्रीय विद्यालय, मॉडल स्कूल, जिला परिवहन कार्यालय, रीको औद्योगिक क्षेत्र और हाउसिंग बोर्ड के निवासियों को भी इस कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिलेगा।

साथ ही, आबकारी थाना, बाल कल्याण समिति, लवकुश वाटिका और प्रस्तावित कोर्ट सचिवालय जैसी जगहों पर आने-जाने वाले लोगों के लिए भी अब घंटों का सफर मिनटों में सिमट जाएगा। इन प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक और आवासीय क्षेत्रों की डायरेक्ट कनेक्टिविटी बेहतर होने से न केवल आम जनजीवन सुगम होगा, बल्कि नागौर शहर के सर्वांगीण विकास को नई गति मिलेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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