उत्तर प्रदेश
एक महीने पहले
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क्रिकेट के मैदान से अपराध की गलियों तक का सफर
मुजफ्फरनगर एनकाउंटर में ढेर हुए सतपाल सिंह उर्फ सत्तू की जीवन यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक समय वह क्रिकेट के मैदान में अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवा रहा था और भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ी युवराज सिंह के साथ रणजी मैच भी खेल चुका था। योगराज सिंह से कोचिंग लेने वाला यह खिलाड़ी करियर की ऊंचाइयों पर पहुंचने का सपना देख रहा था, लेकिन एक मोड़ ने उसे अपराध की दलदल में धकेल दिया।
क्यों भटक गया रास्ता
जानकारों के अनुसार, सतपाल का सपना इंग्लैंड जाकर क्रिकेट खेलने का था। इसके लिए उसे 2 लाख रुपए की आवश्यकता थी, जिसका इंतजाम न हो पाने के कारण वह हताश हो गया। एक विवाद के बाद जब उसे टीम से बाहर किया गया, तो उसने चयनकर्ताओं पर ही हमला कर दिया। यहीं से उसके आपराधिक जीवन की शुरुआत हुई। हालांकि, वह एक समय नगर निगम में पार्षद भी बना, लेकिन अपराध का रास्ता चुनने के बाद वह फिर कभी वापस नहीं लौट सका।
जघन्य अपराधों का लंबा इतिहास
सतपाल के अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद उसके कारनामे बढ़ते चले गए:
- वर्ष 2010 में उसने मेरठ में धागे से भरा ट्रक लूटा, जिसके बाद उसे जेल की हवा खानी पड़ी।
- उसने मुजफ्फरनगर के एक व्यापारी की हत्या की, जिसके लिए उसे 11 साल तक जेल में रहना पड़ा।
- वर्ष 2024 में जमानत पर बाहर आने के बाद उसने अपनी पत्नी के प्रेमी की हत्या कर दी।
- वह पंजाब पुलिस की हिरासत से 6 फरवरी 2026 को फरार हो गया था।
सीरियल रेपिस्ट बनकर दहलाया इलाका
फरार होने के बाद सतपाल ने अपराध का एक घिनौना रूप अपना लिया। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ कि वह 6 किशोरियों के अपहरण और उनके साथ दुष्कर्म की वारदातों में शामिल रहा। उस पर हत्या, लूट और डकैती जैसे 30 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज थे। उसके ऊपर पुलिस ने 25 हजार का इनाम रखा था। इतना ही नहीं, जांच एजेंसियों को यह भी पता चला था कि उसके संबंध छोटा राजन गैंग से भी रहे थे। अंततः मुजफ्फरनगर पुलिस के साथ मुठभेड़ में घायल होने के बाद इलाज के दौरान मंगलवार को उसकी मौत हो गई।
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