मुंबई में 100 करोड़ के साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़, मात्र 5 हजार के लालच में फंस रहे थे लोग महाराष्ट्र एक घंटा पहले 2
मुंबई पुलिस की डोंगरी शाखा ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी के लिए करता था। जांच में करीब 100 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन और 25 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है।

मुंबई पुलिस की बड़ी कार्रवाई

मुंबई पुलिस ने हाल ही में ऑनलाइन गेमिंग, क्रिकेट सट्टेबाजी और कैसीनो जैसे अवैध कार्यों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक बेहद शातिर और अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में डोंगरी पुलिस ने अब तक कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 5 अन्य अपराधी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं और उनकी तलाश जारी है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने न केवल साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से 25 करोड़ रुपये की ठगी की है, बल्कि जब्त किए गए खातों के माध्यम से 100 करोड़ रुपये से भी अधिक का संदिग्ध लेन-देन किया गया है। यह नेटवर्क देश के अलग-अलग राज्यों में फैले साइबर अपराधों के लिए एक मुख्य कड़ी के रूप में काम कर रहा था।

म्यूल बैंक अकाउंट क्या होता है और कैसे काम करता है?

साइबर अपराध की दुनिया में 'म्यूल बैंक अकाउंट' एक महत्वपूर्ण हथियार बन गया है। सरल शब्दों में कहें तो, यह वह बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी अपनी अवैध कमाई को ठिकाने लगाने, उसे इधर-उधर स्थानांतरित करने या नकदी के रूप में निकालने के लिए करते हैं। जालसाज कभी भी अपने नाम के खातों का इस्तेमाल नहीं करते क्योंकि इससे उनकी पहचान उजागर होने का खतरा होता है। इसलिए, वे आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को शिकार बनाते हैं। उन्हें मात्र 5 से 10 हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते हैं। इसके बाद, अपराधी उस खाते की पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड, सिम कार्ड और नेट बैंकिंग का पूरा एक्सेस अपने पास रख लेते हैं ताकि ठगी के पैसे को सुरक्षित रूप से ठिकाने लगाया जा सके।

पुलिस ने कैसे बिछाया जाल?

डोंगरी पुलिस के साइबर दस्ते को इस पूरे नेटवर्क के संचालन के बारे में बेहद पुख्ता और गोपनीय जानकारी मिली थी। जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने एक विस्तृत रणनीति बनाई और तकनीकी जांच, बैंक ट्रांजैक्शन की गहन पड़ताल और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू किया। पुलिस ने सैंडहर्स्ट रोड रेलवे स्टेशन, डॉ. महेश्वरी रोड और डोंगरी क्षेत्र में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान नेटवर्क के मुख्य सदस्यों को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान निखिल कमल कुमार जयसवानी (32), राहुल श्यामलाल परवानी (22) और जय बिहारीलाल तीरपाठी (26) के रूप में हुई है, जो सभी मूल रूप से मध्य प्रदेश के निवासी हैं। पुलिस ने अब तक कुल 6 लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया है और फरार 5 आरोपियों की धरपकड़ के लिए अभियान चलाया जा रहा है। मामले में शामिल तीन महिलाओं को पूछताछ के लिए पुलिस ने नोटिस भी जारी किए हैं।

बरामदगी और जांच का दायरा

छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से करीब 50 लाख रुपये मूल्य का सामान मिला है। इसमें 44 बैंक पासबुक, 70 डेबिट कार्ड, 36 सिम कार्ड, 23 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 1 टैबलेट, 12 बैंक किट और एक कार बरामद की गई है। पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कुल 110 बैंक खातों की पहचान की है, जिनमें से 17 खातों का विवरण बैंकों से मंगवाया गया है। जांच के दौरान यह पाया गया कि देशभर में दर्ज 38 अलग-अलग साइबर अपराधों और शिकायतों का सीधा संबंध इन बैंक खातों से है। पुलिस को यह संदेह है कि बाकी बचे खातों का उपयोग भी अन्य साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया गया है।

करोड़ों की संदिग्ध गतिविधि

पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि केवल उन 17 खातों में, जिनका विस्तृत विवरण लिया गया, पिछले डेढ़ से दो महीने के भीतर ही 25 करोड़ 45 लाख रुपये की भारी धनराशि का लेन-देन हुआ है। इन खातों में होने वाली वित्तीय गतिविधियों और लाभार्थी खातों के बीच के संबंधों की कड़ी को पुलिस बारीकी से खंगाल रही है। 100 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध ट्रांजैक्शन का पता चलने के बाद पुलिस यह मानकर चल रही है कि यह गिरोह बहुत बड़े स्तर पर संगठित होकर काम कर रहा था।

मुंबई से अन्य राज्यों तक फैली नेटवर्क की जड़ें

जांच में यह साफ हो गया है कि यह गिरोह केवल मुंबई के डोंगरी या गोवंडी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क नवी मुंबई के बेलापुर, पनवेल, उलवे और यहां तक कि उस्मानाबाद तक फैला था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन खातों का इस्तेमाल करके की गई साइबर ठगी की शिकायतें महाराष्ट्र के बाहर कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से भी मिली हैं। इसका मतलब है कि अपराधी इन म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल पूरे देश में अपनी जड़ें जमाने के लिए कर रहे थे।

आगे की कार्रवाई और सावधानियां

वर्तमान में पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से सघन पूछताछ कर रही है ताकि इन खातों का अंतिम उपयोग करने वाले मुख्य साइबर अपराधियों तक पहुंचा जा सके। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी का पैसा अंत में किन खातों में गया और इस पूरे षड्यंत्र में और कौन लोग शामिल हैं। इसके साथ ही, डोंगरी पुलिस ने आम जनता को सलाह दी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। OTP और पिन जैसी जानकारी को गुप्त रखना ही साइबर सुरक्षा का पहला कदम है। इस पूरे मामले में BNS और IT Act की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और आने वाले दिनों में मामले में और भी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप