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एक घंटा पहले
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पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों पर बरसे अल्ताफ हुसैन
मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट यानी MQM के संस्थापक और प्रमुख नेता अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई को लेकर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान सरकार और वहां की सुरक्षा एजेंसियों को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे कश्मीरियों को बुरी तरह से कुचला जा रहा है। लंदन में निर्वासन का जीवन बिता रहे अल्ताफ हुसैन ने इस दमन को बेहद अमानवीय और दुखद करार दिया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी अल्ताफ हुसैन तब चर्चा में आए थे जब उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे मशहूर शायर अल्लामा इकबाल की कालजयी रचना 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा' गाते हुए सुनाई दिए थे।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बदले सरकार दे रही गोलियां
सोशल मीडिया के जरिए आयोजित एक आपातकालीन बैठक को संबोधित करते हुए अल्ताफ हुसैन ने स्पष्ट कहा कि कश्मीरी नागरिक काफी लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपने हकों के लिए आवाज उठा रहे थे। लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को रखने के बजाय, पाकिस्तान की सरकार ने उन पर बल प्रयोग का रास्ता चुना है। अल्ताफ हुसैन ने बड़े ही गंभीर शब्दों में कहा, 'कश्मीरियों का खून बेरहमी से बहाया जा रहा है। पाकिस्तान ने कश्मीर पर अत्याचार की तमाम हदें पार कर दी हैं। अब तक सैकड़ों कश्मीरी या तो अपनी जान गंवा चुके हैं या फिर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार जनता की आवाज सुनने के बजाय बंदूक की नोक पर उसे दबाने की कोशिश कर रही है। बता दें कि अल्ताफ हुसैन खुद अपनी जान बचाने के लिए वर्ष 1992 में पाकिस्तान छोड़कर लंदन चले गए थे, क्योंकि वहां की सेना और सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा था।
अस्पतालों पर भी कब्जा, निहत्थों पर अंधाधुंध फायरिंग
अल्ताफ हुसैन ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के आह्वान पर हो रहे प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि रावलाकोट और मीरपुर जैसे इलाकों में पुलिस व सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधी गोलीबारी की। उन्होंने दावा किया कि सड़कों पर बड़ी संख्या में शव बिखरे पड़े थे और घायल तड़प रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा एजेंसियां कई घायलों और शवों को जबरन अपने साथ ले गईं। हद तो तब हो गई जब सुरक्षा बलों ने अस्पतालों पर ही कब्जा कर लिया, जिससे घायलों को इलाज मिलना भी मुश्किल हो गया। अल्ताफ हुसैन का कहना है कि शांतिपूर्ण धरने पर बैठे इन निहत्थे लोगों को पूरी तरह से खून से नहला दिया गया है।
79 साल से कश्मीर के नाम पर हो रही ठगी
पाकिस्तान के शासक वर्ग और सरकारी संस्थानों की पोल खोलते हुए अल्ताफ हुसैन ने कहा कि पिछले 79 सालों से देश के हुक्मरान कश्मीर के नाम पर दुनिया भर से अरबों-खरबों डॉलर चंदा बटोर रहे हैं। लोगों को बरगलाने के लिए 'कश्मीर बनेगा पाकिस्तान' का नारा दिया गया, लेकिन आज जब वही कश्मीरी अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं, तो उन्हें गोलियों का जवाब दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कश्मीरियों का लहू बहाकर पाकिस्तान को एकजुट रखा जा सकता है? क्या इस तरह से जनता की आवाज को दबाना संभव है?
तस्वीरें देख मेरा दिल रो पड़ा
अल्ताफ हुसैन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार ने मीडिया को निर्देश दिए हैं कि इन घटनाओं की रिपोर्टिंग न की जाए ताकि दुनिया को हकीकत का पता न चल सके। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही दर्दनाक तस्वीरें और वीडियो देखकर उनका दिल दहल गया है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि बेगुनाह कश्मीरियों पर अत्याचार बंद करें और उन्हें उनके अधिकार सौंपें। MQM ने इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता जाहिर की है।
बातचीत की विफलता के बाद बढ़ा आंदोलन
ज्ञात हो कि जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने 27 जुलाई को दोपहर 1 बजे का अल्टीमेटम सरकार को दिया था। मांगें न माने जाने पर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक के लिए कूच किया। इस दौरान हुई फायरिंग में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की। आंकड़ों की बात करें तो जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का दावा है कि 5 जून से 28 जुलाई के बीच मरने वालों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है, हालांकि विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में 30 से अधिक मौतों की पुष्टि की गई है।
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