मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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इंदौर में मानव तस्करी के काले कारोबार का पर्दाफाश
मध्य प्रदेश के इंदौर में पुलिस ने मानव तस्करी करने वाले एक बेहद खतरनाक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों की नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाता था। आरोपी इन लड़कियों को जल्दी अमीर बनने और खूब पैसा कमाने का लालच देकर झांसे में लेते थे और फिर उनकी फर्जी शादियां करवा देते थे। पुलिस की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि एक नाबालिग लड़की की शादी के बदले करीब 3 लाख रुपये का सौदा किया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है और आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह ने कई और नाबालिगों को भी अपने चंगुल में फंसाया होगा।
कैसे पुलिस तक पहुंची जानकारी
मध्य प्रदेश में ड्रग्स और अवैध शराब के बाद अब मानव तस्करी की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इंदौर के पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के निर्देश पर बाणगंगा थाना पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस पूरी कार्रवाई में डीसीपी जोन-3 अभिषेक रंजन, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ओमप्रकाश और एसीपी हीरानगर रूबीना मिजवानी की भूमिका अहम रही। पुलिस की सक्रियता तब बढ़ी जब बाणगंगा क्षेत्र से एक नाबालिग लड़की के लापता होने की शिकायत दर्ज हुई। पुलिस ने आधुनिक तकनीकी साक्ष्यों और गहन छानबीन के जरिए न केवल लड़की का पता लगाया, बल्कि उसे सुरक्षित दस्तयाब भी कर लिया।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए रची गई साजिश
पुलिस पूछताछ में पीड़िता ने जो खुलासा किया, उसने अधिकारियों को भी सन्न कर दिया। मुख्य आरोपी संजू उर्फ संजय यादव और रामविलास उर्फ राकेश यादव ने पीड़ित लड़की की गरीबी का फायदा उठाया। आरोपियों ने उसे प्रलोभन दिया कि अगर वह अलग-अलग लोगों से शादी करेगी, तो उसे हर शादी के बदले 50 हजार रुपये मिलेंगे। इसके साथ ही उसे आलीशान घर खरीदने और अमीर बनने के बड़े-बड़े सपने दिखाए गए। साजिश को कानूनी रूप देने के लिए इन लोगों ने लड़की के आधार कार्ड में बड़ी हेराफेरी की और उसकी जन्मतिथि बदलकर उसे बालिग घोषित कर दिया। आरोपी खुद को लड़की के माता-पिता या रिश्तेदार बताकर शादियां तय करते थे। इसी कड़ी में रतलाम जिले के बड़ावदा निवासी संजू पाटीदार से पीड़िता की शादी करवाई गई, जिसके लिए गिरोह ने 3 लाख रुपये वसूले थे।
गिरोह के खिलाफ कार्रवाई और अन्य आरोपियों की तलाश
पीड़िता की मां द्वारा अपहरण और गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस लगातार सक्रिय थी। जब पुलिस का शिकंजा मुख्य आरोपी संजय यादव पर कसा, तो गिरोह के सदस्यों में हड़कंप मच गया और वे डर के मारे लड़की को वापस इंदौर छोड़ गए। इंदौर पहुंचने पर पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता संजय यादव, रामविलास उर्फ राकेश यादव, दूल्हा संजू पाटीदार और उसके पिता नंदराम पाटीदार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस फिलहाल सोनू बंजारा, किशोर चौहान, कच्छूलाल गुर्जर, लालसिंह गुर्जर और बाबू दादा जैसे फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
आम जनता से इंदौर पुलिस की अपील
प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह गिरोह पहले भी कई बार इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे चुका है। इंदौर पुलिस अब उन सभी पुराने मामलों की फाइलें खोल रही है जिनमें संदिग्ध शादियां हुई थीं। पुलिस फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और पैसों के अवैध लेनदेन के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का साफ कहना है कि यदि जांच के दौरान और पीड़ित सामने आते हैं, तो आरोपियों पर और भी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा। इंदौर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति नाबालिग लड़कियों को शादी, नौकरी या बेहतर जीवन का लालच देकर बहलाने की कोशिश करता है, तो तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें। आपकी एक सही समय पर दी गई जानकारी किसी मासूम की जिंदगी को तबाही और शोषण से बचा सकती है।
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