ईरान के कड़े रुख से बैकफुट पर अमेरिका, फारस की खाड़ी खाली कर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागे जंगी जहाज विश्व 4 घंटे पहले 3
ईरान के नए मिसाइल ऐलान और बढ़ते सुरक्षा खतरों के बाद अमेरिका ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी सेना फारस की खाड़ी से दूर हट गई है और ब्रिटेन के एयरबेस से अपने सभी B-1 बॉम्बर वापस बुला लिए हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच जंग का नया मोड़

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जिसने पूरी वैश्विक राजनीति को हिलाकर रख दिया है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, पश्चिम एशिया में अमेरिका लगातार अपने सैन्य साजो-सामान और जवानों की संख्या में इजाफा कर रहा है। इसी के समानांतर इजरायल भी युद्ध की अपनी पूरी तैयारी कर रहा है। इन तमाम घटनाक्रमों के बीच तेहरान द्वारा किए गए एक ताजा ऐलान ने वाशिंगटन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी से अपनी सक्रियता को कम करते हुए खुद को ईरान के तट से लगभग 1000 किलोमीटर की सुरक्षित दूरी पर तैनात कर लिया है। यह रणनीतिक कदम ईरानी मिसाइलों की मारक क्षमता से बचने के लिए उठाया गया है। इसके अलावा, ब्रिटेन के RAF Fairford एयर बेस से अमेरिका ने अपने सभी 12 B-1 बॉम्बर विमानों को भी वहां से हटा लिया है।

युद्ध का लंबा खिंचना और अमेरिका की बदलती रणनीति

जब संघर्ष शुरू हुआ था, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया था कि यह सैन्य मिशन बहुत ही कम समय में पूरा हो जाएगा। हालांकि, वक्त गुजरने के साथ ही यह युद्ध उम्मीद से कहीं अधिक लंबा खिंच गया है और न ही ईरान ने कोई हार मानी है। इसके विपरीत, ईरान की जवाबी कार्रवाई ने अमेरिका को अपनी रक्षात्मक मुद्रा अपनाने पर मजबूर कर दिया है। फारस की खाड़ी, जिसे होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रवेश द्वार माना जाता है, वहां से अमेरिकी सेना का हटना अपने आप में एक बड़ा बदलाव है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना अब ईरान के तट से 1000 किलोमीटर दूर से अपना संचालन कर रही है। तेहरान ने इसी बात का फायदा उठाते हुए अपनी मिसाइलों की रेंज को 1000 किलोमीटर या उससे अधिक तक बढ़ाने का संकल्प लिया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किया जा रहा है।

ईरान का मिसाइल प्रोग्राम और नई चुनौतियां

ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया के बयान ने क्षेत्र में हलचल मचा दी है। अकरमिनिया ने स्पष्ट किया है कि हालिया युद्ध के अनुभवों से मिली सीख के बाद ईरान अपनी मिसाइल तकनीक को उन्नत करने की प्रक्रिया में है। उनका लक्ष्य अपनी मिसाइलों की रेंज को 1000 किलोमीटर तक विस्तारित करना है। साथ ही, इन मिसाइलों की गति और निशाना साधने की सटीकता को भी बेहतर किया जाएगा। सैन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि अब विरोधी सेनाएं ईरान के तट से काफी दूर 1000 किलोमीटर की दूरी पर तैनात हैं, इसलिए ईरान का यह कदम सीधे तौर पर उन दूरस्थ ठिकानों को अपनी पकड़ में लेने की कोशिश है। वर्तमान में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स के पास 2000 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइलें पहले से मौजूद हैं, लेकिन नई योजना मुख्य रूप से कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को अपग्रेड करने पर केंद्रित है।

अमेरिका और सहयोगी देशों के लिए खतरा

यदि ईरान अपनी प्रस्तावित मिसाइल योजनाओं को पूरी तरह से लागू करने में सफल हो जाता है, तो फारस की खाड़ी और अरब सागर में स्थित अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के लिए यह एक बहुत बड़ा खतरा बन जाएगा। खाड़ी के कई देश पहले से ही ईरान के करीब 200 से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। हालांकि, 1000 किलोमीटर की मारक क्षमता सीधे तौर पर यूरोप या इजरायल जैसे दूर स्थित ठिकानों तक नहीं पहुंचेगी, लेकिन क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों के लिए यह एक बड़ी सिरदर्दी साबित होगी। यही कारण है कि अमेरिका किसी भी बड़े नुकसान से बचने के लिए एहतियाती कदम उठा रहा है और फारस की खाड़ी से पीछे हट रहा है।

ब्रिटेन में सुरक्षा को लेकर खलबली

सुरक्षा चिंताओं के कारण अमेरिका ने ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस से अपने सभी 12 B-1 बमवर्षक विमानों को वापस बुला लिया है। इस निर्णय के पीछे एक बड़ी साजिश की जानकारी सामने आई है। ऐसा संदेह है कि ईरान से जुड़े किसी संभावित आतंकी समूह ने इस एयरबेस को निशाना बनाने की साजिश रची थी। अधिकारियों का मानना है कि इस हमले का उद्देश्य न केवल विमानों को तबाह करना था, बल्कि वहां तैनात सैन्यकर्मियों की जान लेना भी था। यह भी दावा किया गया है कि आईआरजीसी ने इस अभियान को अंजाम देने के लिए ब्रिटिश नागरिकों को काम पर रखा था। हालांकि, ब्रिटिश अधिकारियों ने इस साजिश की गंभीरता और जटिलता को लेकर अभी तक पूरी तरह पुष्टि नहीं की है, लेकिन 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, सभी 12 B-1 बॉम्बर सुरक्षित रूप से अमेरिका स्थित उनके ठिकानों पर भेज दिए गए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन्हें मिशन से बाहर नहीं किया गया है, और जरूरत पड़ने पर ये किसी भी वैश्विक मोर्चे पर तैनात किए जा सकेंगे। फिलहाल, अमेरिकी सेना के लिए ईरान के मिसाइल फायर पावर से बचना ही सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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